Monday, May 25, 2020
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दलित महिला के हत्यारों को बचा रहे MLA फैयाज अहमद! काला देवी के बेटे ने बताई उस रात की पूरी कहानी

"इस मुहल्ले में कोई भी बच्चा हिंदू का नहीं है, सभी बच्चे मुस्लिमों की पैदाइश हैं।" शरीफ नदाफ की ऐसी गाली पर भी लोगों ने उसे अनसुना कर दिया क्योंकि वह नशे में था। इसके बाद वो सुरेंद्र के घर की ओर आगे बढ़ा और उनकी 70 वर्षीय माता जी के सर पर वार किया फिर गला दबा कर...

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जब पूरा देश दीपक, मोमबत्ती, टॉर्च आदि जलाकर कोरोना वायरस जैसी महामारी की लड़ाई के खिलाफ एकजुटता दिखा रहा था, बिहार के मधुबनी में एक मुस्लिम परिवार ने 70 साल की बुजुर्ग महिला काला देवी (उर्फ कैली देवी) की गला दबाकर हत्या कर दी। यह दिन था रविवार (अप्रैल 5, 2020) का। हत्या को अंजाम देने के बाद सुलेमान नदाफ, मलील नदाफ और शरीफ नदाफ फरार है। घटना जिले के रहिका प्रखंड के सतलखा मानी दास टोल की है।

इस बाबत हमने मृतक महिला काला देवी (पति: जवाहर मंडल) के बेटे सुरेंद्र मंडल से बात की। उन्होंने हमें इस घटना से संबंधित पूरी बात बताई और साथ ही कई सारे सवाल भी खड़े किए। सुरेंद्र मंडल ने बताया कि यह हिन्दू बहुल इलाका है। यहाँ पर सिर्फ दो ही मुस्लिम परिवार रहते हैं और वो भी कहीं और से आकर बसे हुए हैं। शरीफ नदाफ का यहाँ पर ससुराल है। उसका घर रहिका के अंदर मुस्लिम बस्ती में है।

मधुबनी में दीप जलाने को लेकर विवाद: मुस्लिम परिवार ने 70 वर्षीय हिंदू महिला की गला दबाकर हत्या की

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सुरेंद्र ने बताया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर रात के 9 बजे कुछ बच्चे दीपक जलाने के बाद इधर-उधर खेल रहे थे। शरीफ नदाफ ने गाली-गलौज शुरू कर दी। भद्दी और गंदी गालियाँ देने के साथ ही कहा कि इस मुहल्ले में कोई भी बच्चा हिंदू का नहीं है, सभी बच्चे मुस्लिमों की पैदाइश हैं। 

सुरेंद्र का परिवार दरवाजे पर बैठा ये सब सुन रहा था। लेकिन उन्होंने आरोपितों को जवाब नहीं दिया। बकौल सुरेंद्र आरोपित नशे में थे। इस वजह से उन लोगों ने उनके साथ उलझना मुनासिब नहीं समझा। वे लोग चुप रहे। 

इसके बाद सुलेमान नदाफ का बेटा मलीन नदाफ घर से बाहर निकला और एक बच्चे को धक्का देकर वहाँ से भगा दिया। इस पर सुरेंद्र ने आपत्ति जताते हुए कहा कि आप बच्चे को धक्का क्यों दे रहे हैं, ये आपके घर के आगे तो नहीं हैं। इन्हें खेलने दीजिए। अगर आप देश के प्रधानमंत्री की बात नहीं मान सकते तो फिर उल्लंघन भी मत कीजिए। जो पालन कर रहे हैं, उनको करने दीजिए। इसके बाद उसने बच्चे को छोड़ दिया और सुरेंद्र की घर की तरफ बढ़ गया। 

सुरेंद्र के घर के बाहर ही बेंच पर उनकी माँ काला देवी बैठी हुईं थीं। मलीन नदाफ ने काला देवी के सिर पर दो-तीन बार मारा। सुरेंद्र ने ये देखा लेकिन उन्होंने ये नहीं सोचा था कि वो ऐसा कुछ करेगा, इसलिए वो आगे बढ़ गए। सुरेंद्र के छोटे भाई भी वहीं पर थे। उन्होंने काला देवी के साथ हाथापाई करते हुए देखा तो वहाँ पर गए और उससे कहा कि आपने पी रखी है, आप यहाँ से जाओ। मगर इससे पहले ही मलीन नदाफ ने काला देवी के सिर पर मारने के बाद इतनी जोर से गला दबाया कि वह बेंच पर से नीचे गिर गईं।

मृतका काला देवी
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उनके गिरने के साथ ही चीख-पुकार मच गई। उनको आँगन लाया गया। आँगन में काला देवी ने दो बार हिचकी ली और फिर वहीं पर दम तोड़ दिया। इसके बाद उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ पर डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सुरेंद्र ने कहा, “आक्रोश तो हम लोगों में इतना था कि सोचे उसके घर में आग लगा देंगे, मार देंगे। लेकिन हम लोगों ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। हम लोगों ने सब कुछ समाज के ऊपर छोड़ दिया कि वो लोग जैसा कहेंगे, वैसा ही करेंगे।”

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इधर वो लोग काला देवी को लेकर हॉस्पिटल गए और उधर वो तीनों फरार हो गए और 24 घंटे से ज्यादा बीतने के बाद भी प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाई है। इतनी बड़ी घटना होने के बाद तो अब तक कार्रवाई हो जानी चाहिए। घटना के बाद सुरेंद्र ने तुरंत मुखिया को बुलाया और इसका समाधान करने के लिए कहा। उन्होंने कहा, “आज यहाँ पर दो मुस्लिम परिवार रहकर इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया। अगर यहाँ पर हिन्दुओं का सिर्फ दो परिवार होता तो ये लोग कब का उजाड़ कर मार दिए होते, घर में आग लगा दिए होते। लेकिन हम लोगों ने कभी उनके साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया। हमने कभी नहीं समझा कि ये लोग मुसलमान हैं। आज हमारे साथ हुआ है। कल को किसी और के साथ हो सकता है।”

सुरेंद्र ने बताया कि घटना के बाद रात के 10-11 बजे पुलिस स्टेशन के बड़े बाबू को फोन कर जानकारी दी, लेकिन उनसे ठीक से बात नहीं हो पाई। इसके बाद उन्होंने 4 लोगों के साथ पुलिस स्टेशन जाकर तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई। फिर प्रशासन घर पर आकर पूरी जानकारी लेकर गई। पुलिस ने सुलेमान से भी फोन पर बात की। सुलेमान से पुलिस ने आधे घंटे में आने की बात कही। सुरेंद्र ने यह भी बताया कि उन्होंने जब आरोपितों के घरवालों से सुलेमान के नंबर माँगे तो उन्होंने बोला कि उनके पास नंबर नहीं है, लेकिन जब पुलिस ने माँगी तो उनकी बहू ने नंबर दे दिया।

वहीं प्रशासन की तरफ से किसी तरह का मदद मिलने की बात पर सुरेंद्र ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद फिर से प्रशासन उनके घर पर आ गई और जल्दी से अंतिम संस्कार करने के लिए कहने लगी। लेकिन वो लोग भी अड़े थे कि जब तक उनको इंसाफ नहीं मिलेगा, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। इसके बाद थाने की तरफ से कहा गया कि आप शव का दाह-संस्कार कर दीजिए, जो भी प्रक्रिया होगी, वो बाद में होगी। मुखिया जय प्रकाश चौधरी ने अंतिम संस्कार के लिए 3,000 की राशि दी।

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राष्ट्रीय जनता दल के स्थानीय विधायक फैयाज अहमद पर आरोपितों को बचने और मामला रफा दफा करने के लिए प्रशासन पर दबाब बनाने का आरोप लग रहा है। सुरेंद्र ने बताया , “हम लोगों को विधायक से किसी तरह की सहायता नहीं मिलती है। मुस्लिम परिवारों को उनकी तरफ से हर तरह से सहायता मिलती है। उन लोगों को छोटी से छोटी समस्या होती है, तो तुरंत समाधान होता है, क्योंकि वे उनकी बिरादरी के हैं। उनके साथ कुछ भी होता है तो विधायक फ़ैयाज़ अहमद और सरपंच फकरे आलम की गाड़ी तुरंत पहुँच जाती है, लेकिन हमारे साथ इतनी बड़ी घटना हो गई कोई नहीं आया।”

इस संबंध में विधायक फैयाज अहमद का पक्ष जानने के लिए हमने कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया (बात होते ही हम उनके पक्ष से आपको अपडेट करेंगे।)। सुरेंद्र ने कहा, “वे उन दो मुस्लिमों परिवार (आरोपित)की हर समस्या में आते हैं और हमारे साथ इतना बड़ा कांड होने के बाद भी नहीं आए तो हम कैसे मान लें कि वे हमारे साथ हैं? आज अगर मुस्लिमों के साथ कुछ होता तो विधायक फैयाज जी भी आते और फकरे आलम भी दौड़कर आता। लेकिन जब हमारे साथ हुआ तो कोई नहीं आया।” 

सुरेंद्र ने सरपंच फकरे आलम पर सुलेमान नदाफ, मलील नदाफ और शरीफ नदाफ की मदद का आरोप लगाया है। उसने बताया की फरार होने से पहले आरोपित फकरे आलम के पास ही गए थे। फकरे आलम इस मामले में मुस्लिमों के नाम न आने देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हालत देखते हुए प्रशासन की तरफ से मौके पर एक कोतवाल को तैनात किया गया है। 

विहिप के जिलाध्यक्ष महेश प्रसाद और बीजेपी के विधानपार्षद सुमन महासेठ ने भी घटना की पुष्टि की है।हमने रहिका थाना प्रभारी के नंबर पर भी कई बार कॉल किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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