Monday, July 26, 2021
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3 साल से कर रहा था पीछा, घर में घुस लड़की को जलाया: 5 बार थाने पहुॅंची पर पुलिस ने नहीं सुनी

लड़की के परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस ने समय पर एक्शन लिया होता तो यह घटना नहीं होती। इस घटना के बाद भी पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है उसमें धारा 376 नहीं जोड़ा है। परिजनों का कहना है कि उन पर केस मैनेज करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

बिहार के मुजफ्फरपुर में बीते शनिवार को एक प्रॉपर्टी डीलर के बेटे ने एक लड़की के घर में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। लड़की के विरोध के कारण जब वह अपने मनसूबों में नाकाम रहा तो उसने लड़की पर केरोसिन डालकर उसे जला दिया। पूरे वाकये में लड़की 85% जल गई। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ फिलहाल वह कोमा में हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पीड़िता की हालत गंभीर है और उसका बचना मुश्किल है।

पूरे मामले में लड़की के घरवालों की शिकायत के आधार पर आरोपित को पकड़ लिया गया है। उसकी पहचान राजा राय के रूप में हुई है। पीड़िता की माँ ने बताया कि आरोपित 3 साल से उनकी बेटी का पीछा कर रहा था। इस संबंध में 5 बार वे अहियापुर थाने में शिकायत दर्ज कराने भी गए थे, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी। छठ के दिन भी राजा ने घर में घुसकर उनकी बेटी से छेड़खानी की। बावजूद इसके पुलिस ने शिकायत नहीं दर्ज की। धीरे-धीरे लड़की के भीतर इतना खौफ बैठ गया था कि उसने कोचिंग जाना भी छोड़ दिया।

पीड़िता की माँ के मुताबिक जिस समय यह घटना घटी, उस समय तक वह नाइट ड्यूटी की वजह से साढ़े पांँच बजे कटरा पीएचसी चली गई थी और घर में छाेटी बेटी (पीड़िता) अकेली थी। इसी दाैरान आरोपित राजा उनके घर में घुसा और उसने उनकी बेटी के साथ मारपीट शुरू कर दी। माेहल्ले में ही रहने वाली दूसरी बेटी की बेटी (नातिन) ने उन्हें फोन करके मामले की जानकारी दी। मगर, रात हाे जाने के कारण कटरा से आने के लिए उन्हें काेई सवारी नहीं मिली। वो वापस आने के लिए कोई और साधन खोज पाती इससे पहले उनकी नातिन का दोबारा फोन आ गया। उसने बताया कि राजा ने उनकी बेटी को जला दिया।

घटना को अंजाम देने के बाद राजा खुद को निर्दोष साबित करने के लिए लड़की को एक निजी अस्पताल ले गया, ताकि लोगों को यकीन दिला सके कि इस घटना में उसका हाथ नहीं हैं। लड़की के घरवालों का कहना है कि इस मामले को दबाने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही पुलिस भी इसमें ढिलाई बरत रही है। उनके मुताबिक अस्पताल के इन्फाॅर्मेशन स्लिप को थाने में रात 10.05 मिनट पर रिसीव किया गया। शनिवार रात करीब 11 बजे अहियापुर थाने की पुलिस अस्पताल भी पहुँची।

पुलिसकर्मी भर्ती युवती को देख कर लौट गए। अगले दिन रविवार दोपहर 3:30 बजे तक युवती इसी अस्पताल में रही, लेकिन पुलिस दोबारा नहीं आई। मरीज को ट्रॉमा सेंटर से परिजन एसकेएमसीएच ले गए। फिर रात 8 बजे अहियापुर थाने की पुलिस ने युवती की माँ के बयान को दर्ज किया और जहाँ आईसीयू में पीड़िता ने भी मजिस्ट्रेट ललिता कुमारी के समक्ष बयान दिए।

घरवालों के अनुसार इस मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही एक बहुत बड़ा कारण है। लड़का तीन साल से छेड़खानी कर रहा था, अगर पुलिस द्वारा उसी समय एक्शन लिया जाता तो शायद ऐसा नहीं होता। इसके अलावा शिकायत के बाद भी पुलिस ने राजा के ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर में 307, व 326 और अपराध में कई लोगों की संलिप्तता की धारा 34 लगाई है। लेकिन धारा 376 को इसमें नहीं जोड़ा गया है।

इतना ही नहीं, पीड़िता के घरवालों का ये भी आरोप है कि पुलिस की तैनाती के बाद भी एक सफेदपोश आदमी लड़की के भाई और बहनोई से मिला। जहाँ उसने उन पर केस मैनेज करने का दबाव बनाया। हालाँकि, युवती के भाई ने उस सफेदपोश की तस्वीर ली और नगर डीएसपी रामनरेश पासवान को दिखाते हुए शिकायत की। लड़की के भाई का आरोप है कि वो आदमी उसकी बहन को दिलासा देने के बहाने आया था, लेकिन उनसे कहकर गया कि वे जिस परिवार से उलझे हैं, उससे बैर करना ठीक नहीं, इसलिए समझौता कर लेने में ही भलाई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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