मेरी नहीं तो किसी और की भी नहीं होगी… जिंदा जला देंगे: CM गहलोत के सामने फूट- फूट कर रोई छात्रा

"वे लड़के ब्लैकमेल करते हैं। सोशल मीडिया में मेरी फोटो लगा देते हैं। मेरे पापा उनको समझाने गए तो उन पर हमला कर दिया। मेरे को बोलते हैं कि एफआईआर करवाई तो तेरे को जिंदा जला देंगे। एफआईआर करवाए दो महीने हो गए, पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही।"

हैदराबाद, उन्नाव… और अब जोधपुर। हैवानियत का सिलसिला टूटता नहीं दिख रहा है। राजस्थान के जोधपुर में एक छात्रा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जान बचाने की गुहार लगाई है। सीएम की जनसुवाई में पहुॅंची छात्रा अपनी पीड़ा बताते हुए रो पड़ी। कहा- मुख्यमंत्री जी मुझे बचा लो…दरिंदे मुझे जिंदा जला देंगे।

मामला जोधपुर के भोपालगढ़ थाना क्षेत्र का है। पीड़िता रविवार (नवंबर 8, 2019) को जोधपुर में सीएम अशोक गहलोत की जनसुनवाई में पहुँची थी। मुख्यमंत्री को उसने बताया कि कुछ लड़के उसे करीब 2 महीने से लगातार परेशान कर रहे हैं। आरोपितों ने खुद के नंबर वाले व्हाट्सअप पर उसकी फोटो की डीपी लगा रखी है। स्टेटस में लिख रखा है, ‘मेरी नहीं तो किसी और की भी नहीं होगी।’

मुख्यमंत्री के सामने छात्रा बिलख पड़ती है और कहती है, “वे लड़के मेरे को बोलते हैं कि मेरे से बात कर। वे ब्लैकमेल करते हैं। सोशल मीडिया में मेरी फोटो लगा देते हैं। मेरे पापा उसके घरवालों को समझाने गए तो उन पर हमला कर दिया। पापा को ज्यादा चोट पहुँची तो एमजीएम हॉस्पिटल में एडमिट कराना पड़ा। मेरे को बोलते हैं कि एफआईआर करवाई तो तेरे को जिंदा जला देंगे। एफआईआर करवाए दो महीने हो गए, पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही।”

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आगे लड़की कहती है कि वह कलेक्टर से लेकर एसपी, आईजी तक के पास गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लड़की का कहना है, “इससे उन लड़कों के हौसले बुलंद हो रहे हैं और हम डर रहे हैं। हमारे घरवाले सब्जी लेने तक के लिए बाहर नहीं जाते हैं। हमलोग उनसे डर के मारे घर में बैठे हैं। मैं पढ़ नहीं पा रही हूँ। उनकी वजह से मेरी पीएमटी (प्री-मेडिकल टेस्‍ट) की पढ़ाई छूट गई है।”

जानकारी के मुताबिक सीएम गहलोत ने लड़की को ढाढस बँधाया और साथ ही वहाँ मौजूद पुलिस कमिश्नर प्रफुल्ल कुमार को बुलाकर कार्रवाई के आदेश दिए। चूँकि मामला जोधपुर ग्रामीण का था, इसलिए वहाँ के एसपी राहुल बारहट को बुलाया गया। एसपी ने बताया कि सुरपुरा खुर्द के रहने वाले कैलाश, उसके भाई भगवान और मुकेश को 6 महीने पहले गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में वे जमानत पर छूट गए।

हैदराबाद, उन्नाव, मुजफ्फरपुर जैसी वारदातों में पुलिस का लापरवाही भरा रवैया रहा है। इस मामले में भी पुलिस-प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा दिख रहा है।

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