Tuesday, July 27, 2021
Homeदेश-समाजसंख्याबल में खेलता लोकतंत्र: जानिए किसको मिले वोटों की मार्जिन है सबसे कम और...

संख्याबल में खेलता लोकतंत्र: जानिए किसको मिले वोटों की मार्जिन है सबसे कम और सबसे ज्यादा

गुजरात में तो भाजपा का ऐसा जादू चला कि यहाँ के नवसारी लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशी सी आर पाटिल ने सबसे ज्यादा वोटों से जीतने का रिकॉर्ड बना दिया। सी आर पाटिल ने इस रेस में पीएम मोदी को भी पीछे छोड़ दिया है।

लोकसभा चुनाव 2019 में बाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ वापसी की है। गुजरात में तो भाजपा का ऐसा जादू चला कि यहाँ के नवसारी लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशी सी आर पाटिल ने सबसे ज्यादा वोटों से जीतने का रिकॉर्ड बना दिया। सी आर पाटिल ने इस रेस में पीएम मोदी को भी पीछे छोड़ दिया है। प्रधानमंत्री को इस बार वाराणसी में 4 लाख 80 हजार वोटों से जीत मिली है, जबकि सीआर पाटिल ने कॉन्ग्रेस प्रत्याशी पटेल धर्मेंशभाई भीमभाई को 6,89,668 वोटों के अंतर से हराकर ऐतिहासिक जीत हासिल की। 2009 से लगातार जीतते आ रहे सी आर पाटिल को भाजपा ने तीसरी बार नवसारी सीट से उम्मीदवार बनाया था।

ख़ास बात यह भी है कि वोटों का ये अंतर 2019 में सबसे ज्यादा है, मगर भारत के चुनावी इतिहास में यह दूसरी सबसे बड़ी जीत है। पूर्व केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की बेटी प्रीतम मुंडे ने अक्टूबर 2014 में उप चुनाव के दौरान महाराष्ट्र की बीड सीट पर 6.96 लाख वोटों से जीत हासिल की थी। पाटिल के जीत का आँकड़ा इससे थोड़ा सा ही कम है।

सबसे अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों में दूसरा नाम संजय भाटिया का है। संजय करनाल लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार थे। इन्होंने 6,56,142 वोटों के अंतर से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार कुलदीप शर्मा को हराया।

तीसरे नंबर पर रहे हरियाणा की फरीदाबाद लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार कृष्णपाल गुर्जर। इन्होंने 6,38,239 वोटों के अंतर से अपने प्रतिद्वंदी कॉन्ग्रेस उम्मीदवार अवतार सिंह को हराया। कृष्णपाल के बाद चौथे नंबर पर सबसे ज्यादा वोटों से जीतने का अंतर राजस्थान के भिलवाड़ा सीट से सुभाष चंद्र बहेरिया रहे। इन्होंने 6,12,000 वोटों के अंतर से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार रामपाल शर्मा को मात दी। इस क्रम में पाँचवें नंबर पर भाजपा प्रत्याशी रंजनबेन भट्ट का नाम आता है। इन्होंने गुजरात के वडोदरा सीट से 5,89,177 वोटों के कॉन्ग्रेस के प्रशांत पटेल को हराया।

वहीं अगर बात करें, सबसे कम मार्जिन से हारने का, तो इसमें सबसे पहला नाम आता है भाजपा प्रत्याशी बी पी सरोज का। ये उत्तर प्रदेश के मछलीशहर से भाजपा उम्मीदवार थे। इन्होंने महज 181 वोट के अंतर से बसपा के त्रिभुवन राम को मात दी। सबसे कम वोटों के अंतर से जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों में दूसरा नाम लक्षद्वीप से नेशलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी के उम्मीदवार पीपी मोहम्मद फैजल का है। इन्होंने मात्र 823 वोट के अंतर से कॉन्ग्रेस के हमीदुल्ला सईद को हरा दिया।

पश्चिम बंगाल की आरामबाग लोकसभा सीट से तृणमूल कॉन्ग्रेस की प्रत्याशी अपरुपा पोद्दार ने 1,142 वोट के अंतर से जीत हासिल की। वो इस चुनाव में सबसे कम वोटों के अंतर से जीतने वाली तीसरी उम्मीदवार हैं। इस सीट पर उन्हें भाजपा के तपन कुमार रॉय से कड़ी टक्कर मिली।

इस क्रम में चौथे नंबर पर आते हैं कुलदीप राय शर्मा। अंडमान निकोबार से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी कुलदीप ने भाजपा के विशाल जोली को 1,407 वोट के अंतर से अपने प्रतिद्वंदी को मात देकर जीत हासिल की। इसके साथ ही झारखंड के खुंटी से भाजपा उम्मीदवार अर्जुन मुंडा ने 1,445 वोटों के अंतर से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी कालीचरण मुंडा को हराकर जीत हासिल की।

अपनी जीत पर सीआर पाटिल कहते हैं, “पहली बार वोट डालने वाले वोटरों तक पहुँचने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रयास रंग लाया है। जीत की मार्जिन में इतनी बड़ी बढ़त के पीछे वोट देने के लिए उमड़े पहली बार के वोटरों की भीड़ जिम्‍मेदार है। युवाओं ने बीजेपी को उसकी सशक्‍त और निर्णायक नेतृत्‍व क्षमता, चहुँमुखी विकास और राष्‍ट्रीय सुरक्षा के नाम पर वोट दिया।”

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘राजीव गाँधी थे PM, उत्तर-पूर्व में गिरी थी 41 लाशें’: मोदी सरकार पर तंज कसने के फेर में ‘इतिहासकार’ इरफ़ान हबीब भूले 1985

इतिहासकार व 'बुद्धिजीवी' इरफ़ान हबीब ने असम-मिजोरम विवाद के सहारे मोदी सरकार पर तंज कसा, जिसके बाद लोगों ने उन्हें सही इतिहास की याद दिलाई।

औरतों का चीरहरण, तोड़फोड़, किडनैपिंग, हत्या: बंगाल हिंसा पर NHRC की रिपोर्ट से निकली एक और भयावह कहानी

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 14 जुलाई को बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा पर अपनी अंतिम रिपोर्ट कलकत्ता हाईकोर्ट को सौंपी थी।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
111,464FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe