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बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी मुहर्रम की जुलूस निकालने की अनुमति, सरकारी वकील ने कहा- ‘भीड़ और मजहबी जुलूस को नियंत्रित करना मुश्किल’

अगर लोग बड़ी संख्या में सड़क पर निकलते हैं तो इससे शहर के पुलिस थानों के लिए समस्या खड़ी हो सकती है। सरकारी वकील ने कहा, "भीड़ और जुलूस को नियंत्रित करना मुश्किल है, विशेष रूप से एक धार्मिक जुलूस।"

कोरोना संकट से जूझ रहे महाराष्ट्र में मुहर्रम को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार (17 अगस्त 2021) को शिया मुस्लिम समुदाय को जुलूस निकालने इजाजत दे दी। हालाँकि कोर्ट ने अपने फैसले में ये भी स्पष्ट किया है कि जुलूस के दौरान लोगों को कोरोना के मद्देनजर शर्तों और गाइडलाइंस का पालन करना होगा।

बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस केके टेट और पीके चव्हाण की पीठ ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि कोरोना प्रोटोकॉल के अलावा भी कई नियमों का पालन करना होगा। फैसले के मुताबिक, 20 अगस्त 2021 को 3 घंटे तक चलने वाले इस जुलूस में प्रति ट्रक 15 व्यक्ति और 7 ऐसे ट्रक शामिल हो सकेंगे। इन ट्रकों में उन्हीं लोगों को चढ़ने की इजाजत होगी, जिन्होंने कोरोना के सभी डोज लगवाए होंगे। इस दौरान केवल 5 ताजिया को ही निकलने दिया जाएगा। इसके अलावा 105 व्यक्तियों में से केवल 25 को ही कब्रिस्तान के अंदर जाने की अनुमति होगी।

बता दें कि इस मामले में ऑल इंडिया इदारा तहफ़ाज़-ए-हुसैनियत नाम के एक एनजीओ ने याचिका दायर की थी। इसमें उसने महाराष्ट्र सरकार द्वारा लोकल ट्रेनों, दुकानों, मॉल और रेस्तराँ के आसपास प्रतिबंधों में ढील देने के बाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। दरअसल, ये लोग 18 से 20 अगस्त 2021 तक प्रतिदिन 2 घंटे के लिए लगभग 1,000 व्यक्तियों के जुलूस की अनुमति चाहते थे।

एनजीओ की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ वकील राजेंद्र शिरोडकर ने अदालत में कहा कि इमाम हुसैन के मकबरे की प्रतिकृति के रूप में ताजिया निकालना और भोजन और पानी के स्टॉल वाले सबील स्थापित करना “शिया धर्म का आंतरिक हिस्सा”, जिसके बिना मुहर्रम की रस्में अधूरी रहेंगी। उन्होंने बताया कि भले ही 1000 व्यक्तियों के लिए प्रार्थना की गई हो, लेकिन कोर्ट के हर आदेश का पालन करेंगे।

सरकार के फैसले पर उठाया सवाल

एडवोकेट शिरोडकर ने अदालत में तर्क देते हुए सरकार के प्रतिबंधों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले साल की तुलना में महामारी का प्रकोप इस बार अलग है। वकील ने दावा किया कि पिछले साल जब उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में इस तरह का जुलूस निकाला गया था, तब पुलिस द्वारा किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं दी गई थी।

जुलूस को नियंत्रित कर पाना मुश्किल

एनजीओ की याचिका का विरोध करते हुए सरकारी वकील पूनम कंथारिया ने सर्कुलर पर भरोसा करते हुए कहा कि नवीनतम परिपत्र में जुलूस की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर लोग बड़ी संख्या में सड़क पर निकलते हैं तो इससे शहर के पुलिस थानों के लिए समस्या खड़ी हो सकती है। उन्होंने कहा, “भीड़ और जुलूस को नियंत्रित करना मुश्किल है, विशेष रूप से एक धार्मिक जुलूस।”

हालाँकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने एनजीओ को यह सुनिश्चित करने का सुझाव दिया है कि प्रत्येक ट्रक में धर्म का कोई न कोई मुखिया हो या कोई जिम्मेदार व्यक्ति हो जो जुलूस के दौरान भीड़ को नियंत्रित कर सके। इसके साथ ही कोर्ट ने शिरोडकर से एक वचन भी लिया कि 20 अगस्त, 2021 को निकाले जाने वाले जुलूस के दौरान इस तरह के सभी अनुपालनों का अक्षरश: पालन किया जाएगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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