₹2000 करोड़ धोखाधड़ी मामला: देश छोड़ कर भाग रहा था पूर्व BSP प्रत्याशी का भाई, गिरफ़्तार

मकरंद कुलकर्णी को मुंबई एयरपोर्ट से तब गिरफ़्तार किया गया, जब वह मंगलवार की सुबह देश छोड़ कर भागने की तैयारी में था। मकरंद की जमानत याचिका पहले ही ख़ारिज की जा चुकी है, पुलिस ने उसके ख़िलाफ़ लुकआउट सर्कुलर जारी किया था।

पुणे के बिल्डर डीएस कुलकर्णी के भाई मकरंद कुलकर्णी को गिरफ़्तार कर लिया गया है। डीएसके ग्रुप से जुड़े कई लोगों पर निवेशकों से 2000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है। मकरंद कुलकर्णी को मुंबई एयरपोर्ट से तब गिरफ़्तार किया गया, जब वह मंगलवार (अगस्त 13, 2019) की सुबह देश छोड़ कर भागने की तैयारी में था। मकरंद की जमानत याचिका पहले ही ख़ारिज की जा चुकी है, जिसके बाद पुलिस ने उसके ख़िलाफ़ लुकआउट सर्कुलर जारी किया था।

2017 में डीएस कुलकर्णी और उसकी पत्नी हेमंता के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया था। डीएस कुलकर्णी 2009 लोकसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुका है। उस चुनाव में वह चौथे नंबर पर रहा था और कॉन्ग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी ने जीत दर्ज की थी। डीएसके ग्रुप धोखाधड़ी मामले में अब तक 15 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया जा चुका है। इनमें से 10 आरोपितों को अलग-अलग समय पर गिरफ़्तार कर उनके ख़िलाफ़ चार्जशीट भी दायर की जा चुकी है।

इन 10 लोगों में से डीएस कुलकर्णी और उसकी पत्नी हेमंती सहित 8 आरोपित पुणे की यरवदा जेल में बंद हैं। वहीं अब डीएस कुलकर्णी का भाई गिरफ़्तार होने से बचने के लिए देश छोड़ने की फ़िराक में था। चूँकि, उसके ख़िलाफ़ लुकआउट सर्कुलर जारी था, एयरपोर्ट स्टाफ ने उसे हिरासत में ले लिया। इसके बाद पुणे पुलिस की एक टीम ने एयरपोर्ट पहुँच कर उसे गिरफ़्तार कर लिया। उसे पुणे की अदालत में पेश किया जाएगा।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

डीएसके ग्रुप ने डिपाजिट के रूप में निवेशकों से भारी रकम लिया था और उन्हें मासिक एवं वार्षिक रिटर्न देने का वादा किया था। इसके बाद डीएसके ग्रुप ने एक योजना लाई जिसमें पहले घर दिए जाने और बाद में भुगतान करने की बात कही गई। फरवरी 2018 में गिरफ़्तारी से पहले 2 प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डीएस कुलकर्णी ने इन आरोपों को नकार दिया था।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by making a monetary contribution

बड़ी ख़बर

कमलेश तिवारी, राम मंदिर
हाल ही में ख़बर आई थी कि पाकिस्तान ने हिज़्बुल, लश्कर और जमात को अलग-अलग टास्क सौंपे हैं। एक टास्क कुछ ख़ास नेताओं को निशाना बनाना भी था? ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कमलेश तिवारी के हत्यारे किसी आतंकी समूह से प्रेरित हों।

सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

100,990फैंसलाइक करें
18,955फॉलोवर्सफॉलो करें
106,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

Advertisements
शेयर करें, मदद करें: