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मोदी सरकार द्वारा भेजे गए वर्किंग वेंटिलेटर को विरोधी राज्यों ने ‘दोषपूर्ण’ बता डंप किया: रिपोर्ट में खुलासा

केंद्र सरकार ने कहा है, “कई अस्पतालों में वेंटिलेटर लगाने के लिए साइट तैयार नहीं हैं। इसमें पाइप से ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रणाली की कमी या पाइप सिस्टम में अनुकूल ऑक्सीजन दबाव की कमी या यहाँ तक कि उचित विद्युत फिटिंग की कमी शामिल है।”

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), जिसे पिछले साल लगभग 30,000 वेंटिलेटर मशीनों के निर्माण का काम सौंपा गया था, ने कहा कि पंजाब जैसे राज्यों में कुछ वेंटिलेटर को ‘दोषपूर्ण’ (‘faulty’) कह कर खारिज कर दिया गया। टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के अस्पताल नियमित रिपेयर और रखरखाव के काम को कवर करने में विफल रहे, जिसके कारण वेंटिलेटर ‘खराब’ हो गए।

बीईएल के सीएमडी एमवी गौतम ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “मरीज के आईसीयू से जुड़े फ्लो सेंसर हैं और फिर ऑक्सीजन सेंसर हैं। जब हमारी टीम फरीदकोट गई तो हमने देखा कि उपयोग करने वाली सामग्रियों को बदला नहीं गया था। हर बार जब कोई नया मरीज आईसीयू में आता है तो फ्लो सेंसर को बदलना अनिवार्य होता है। दूसरी बात, कुछ वेंटिलेटर इंस्टॉलेशन के दौरान फरीदकोट के लैटीट्यूड-लॉन्गिट्यूड के साथ कैलिब्रेट नहीं किए गए थे। जब भी कोई वेंटिलेटर स्थान बदलता है, तो उस स्थान के अनुसार ऑक्सीजन का दबाव बदलना चाहिए। तीसरी बात, ऑक्सीजन सेंसर की सेल्फ लाइफ होती है। यदि आप इसे एक दर्जन रोगियों के साथ 100% ऑक्सीजन के साथ उपयोग करते हैं, तो यह खराब हो जाएगा, यह काम नहीं करेगा। ऑक्सीजन सेंसर को बदलना होगा, जो फरीदकोट में नहीं हुआ।”

केंद्र सरकार ने कहा है, “कई अस्पतालों में वेंटिलेटर लगाने के लिए साइट तैयार नहीं हैं। इसमें पाइप से ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रणाली की कमी या पाइप सिस्टम में अनुकूल ऑक्सीजन दबाव की कमी या यहाँ तक कि उचित विद्युत फिटिंग की कमी शामिल है।”

Image Credit: Rohan Dua/ToI

केंद्र सरकार ने कहा कि जहाँ निर्माता वेंटिलेटर की आपूर्ति करेंगे और उनके उचित उपयोग का प्रदर्शन करेंगे, वहीं अस्पतालों को भी कुछ उपाय करने की आवश्यकता है जिसमें, “अस्पतालों के उपयोगकर्ता कर्मचारियों का प्रशिक्षण, उन्हें सुरक्षा के लिए मैनुअल और ऑडियो-विजुअल / ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल है। वेंटिलेटर के उपयोग में किसी भी तरह की जानकारी की कमी” और “व्हाट्सएप ग्रुप्स, ईमेल, टेलीफोन कॉल्स और टोल-फ्री नंबरों के माध्यम से राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को पहले से ही सूचित किए गए अस्पतालों / राज्यों से प्राप्त शिकायतों का मजबूत और त्वरित अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करें।”

नतीजतन, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी कुछ उपायों को अपनाने का निर्देश दिया गया है, जिसमें अस्पतालों में वेंटिलेटर कनेक्टर और उचित विद्युत फिटिंग की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को “निर्माताओं द्वारा प्रदान किए गए मार्गदर्शन के अनुरूप समय पर प्रतिस्थापन और ताजा उपभोग्य सामग्रियों का उपयोग सुनिश्चित करने” के लिए निर्देशित किया गया है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ मंदीप के भंडारी द्वारा 9 मई को भेजे गए एक अन्य पत्र में कहा गया है, “स्थापना की कमी विभिन्न अकाउंट्स पर हो सकती है, जैसे कि उनका उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित और कुशल जनशक्ति की कमी, अनुचित संचालन उपकरण… सुनिश्चित करें कि वेंटिलेटर का उपयोग करने के लिए दी गई जनशक्ति को संवेदनशील बनाया गया है और आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया हो।”

पहले यह बताया गया था कि पंजाब में कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के दौरान 250 वेंटिलेटर बिना इस्तेमाल किए रह गए थे। महाराष्ट्र के एक कॉन्ग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर ‘वेंटिलेटर घोटाले’ का आरोप लगाया था, जिसके बाद MoFHW को उनके दावों को खारिज करते हुए स्पष्टीकरण जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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