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पाकिस्तानी बिल्डिंग में इस्लामी संगठन का हेडक्वार्टर, सीलिंग के दौरान जमात के अड़ंगा से चेन्नई में तनाव

तौहीद जमात के कार्यालय पर इससे पहले कई बार अधिनियम का उल्लंघन होने के मामले में नोटिस भेजे जा चुके थे। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर स्थानीय पुलिस, राजस्व अधिकारियों के साथ कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी ऑफ इंडिया के अधिकारियों को बिल्डिंग सील करने के लिए पहुँचना पड़ा।

चेन्नई के मन्नाडी (Mannady) इलाके में बुधवार (जनवरी 6, 2021) को शत्रु संपत्ति अधिनियम (Enemy Property Act) का उल्लंघन होने पर एक इमारत सील करने पहुँचे कुछ अधिकारियों को देखने के बाद तमिलनाडु तौहीद जमात नाम के इस्लामी संगठन ने हंगामा मचाकर क्षेत्र में तनाव उत्पन्न कर दिया। इस बिल्डिंग से इस संगठन का हेडक्वार्टर संचालित हो रहा था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय पुलिस व राजस्व अधिकारियों के साथ ये ऑफिसर वहाँ पहुँचे थे। जिसे शत्रु अधिनियम संपत्ति 1968 के तहत पाकिस्तान की संपत्ति के रूप में पंजीकृत किया गया है।

तौहीद जमात के कार्यालय पर इससे पहले कई बार अधिनियम का उल्लंघन होने के मामले में नोटिस भेजे जा चुके थे। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर स्थानीय पुलिस, राजस्व अधिकारियों के साथ कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी ऑफ इंडिया के अधिकारियों को बिल्डिंग सील करने के लिए पहुँचना पड़ा

कथिततौर पर यह इमारत संगठन के उपाध्यक्ष अब्दुल रहमान को लुंगी फर्म चलाने के लिए दी गई थी। लेकिन रहमान ने इसका इस्तेमाल हेडक्वार्टर चलाने के लिए किया। जबकि वास्तविकता में रहमान के पास सिर्फ़ इसकी पॉवर ऑफ़ अटॉर्नी है, लेकिन हकीकत में संपत्ति तूबा खलीली की है, जो अब पाकिस्तान में रहती हैं। 

बता दें कि साल 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद, 1968 में शत्रु संपत्ति अधिनियम बनाया गया, जो ऐसी संपत्तियों को नियंत्रित करता है और संरक्षक की शक्तियों को सूचीबद्ध करता है। यही अधिनियम संशोधित होने के बाद से कस्टोडियन को ही प्रॉपर्टी का मालिक मानता है और उन्हें ही उससे जुड़े अधिकार देता है।

अब ऐसे में जैसे ही इस अधिनियम के उल्लंघन पर अधिकारियों ने मुख्यालय पर कार्रवाई की तो तौहीद जमात के लोग इकट्ठा होकर प्रदर्शन करने लगे। करीब दो घंटों तक विवाद चला। रहमान ने कहा कि जब सरकार ने शत्रु अधिनियम के तहत संपत्ति के निपटान का फैसला किया, तो उन्होंने सरकार को किराया देना शुरू कर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि उन लोगों ने जमीन खरीदने का विचार किया था। हालाँकि, बुधवार को बिना किसी जानकारी के पुलिस वहाँ तैनात हुई और उन्हें जाने को कह दिया गया।

उनके अनुसार, “केंद्र सरकार ने बिना सूचना दिए संपत्ति सीज करने को कहा है। ये स्वीकार्य नहीं होगा।” रहमान कहते हैं, “इस कदम के पीछे राजनीतिक उद्देश्य है। सरकार हमें परेशान करना चाहती है, लेकिन हम गुस्सा नहीं करेंगे। अगर हम प्रदर्शन भी करेंगे तो लोकतांत्रित ढंग से।

बता दें कि देश में कुल 9,400 शत्रु संपत्तियाँ हैं, जो कि स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान चले गए लोगों द्वारा छोड़ी या बेची गई जमीन है, इसकी कीमत 1 लाख करोड़ रुपए है। 2017 में, केंद्र सरकार ने शत्रु संपत्ति (संशोधन और सत्यापन) अधिनियम पारित किया, जिसने शत्रु संपत्ति पर उनके कानूनी उत्तराधिकार को अस्वीकार कर दिया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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