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लॉकडाउन: आदिवासियों से नक्सली माँग रहे राशन, नहीं देने पर लूटपाट-मारपीट, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

आदिवासियों द्वारा राशन और रुपया नहीं देने पर उनके घर में हथियारों के बल पर लूटपाट की जा रही है और फिर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाकर उनके साथ मारपीट भी की जा रही है।

लॉकडाउन में आदिवासियों और गरीबों से नक्सली माँग रहे राशन! सुनने में अजीब लग रहा होगा, लेकिन वामपंथी आतंकियों ने हमेशा सर्वहारा के नाम पर ऐसे ही घटिया काम किए हैं। दरअसल लॉकडाउन के चलते भूखे घूम रहे नक्सली आदिवासियों के घरों से राशन और रुपए माँग रहे हैं। इतना ही नहीं राशन नहीं देने पर वह घरों में लूटपाट भी कर रहे हैं और परिवार के लोगों के साथ मारपीट भी कर रहे हैं। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस ने गाँव में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।

दरअसल लॉकडाउन के बीच राशन नहीं होने से नक्सलियों के खाने के लाले पड़ गए हैं। इसके बाद वह हथियारों के साथ गाँव में भूखे घूम-घूमकर आदिवासियों के घरों से राशन के साथ पाँच सौ रुपए भी माँग कर रहे हैं। आदिवासियों द्वारा राशन और रुपया नहीं देने पर उनके घर में हथियारों के बल पर लूटपाट की जा रही है और फिर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाकर उनके साथ मारपीट भी की जा रही है।

इसे लेकर ग्रामीण ज्यादा बोलने काे तैयार नहीं हैं, लेकिन इसके बाद भी कुछ शिकायतें पुलिस के पास आई हैं। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस ने ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है। साथ ही छत्तीसगढ़ से लगे मध्य प्रदेश बॉर्डर पर पुलिस नजर बनाए हुए है। गाँव में पुलिस की सुरक्षा को बढ़ता देख नक्सली परेशान हैं और भूखे होने के कारण उनकी टोलियों में हड़कंप मचा हुआ है।

दरअसल कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन के दौरान आदिवासी लोगों को राज्य सरकार दो माह का राशन एक साथ दे रही है। इसका मकसद यह है कि आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में लोगों को परेशानी नहीं हो। ग्रामीणों को मिलने वाले दो महीने के इसी राशन को नक्सली दो हिस्सो में बाँट रहे हैं। एक हिस्सा अपने लिए और दूसरा ग्रामीणों काे दे रहे हैं। बात नहीं मानने पर ग्रामीणों से मारपीट की जा रही है। 

बालाघाट एसपी अभिषेक तिवारी ने बताया कि लगातार ये सूचना आ रही थी कि राशन के लिए नक्सली, गाँव वालों को परेशान कर रहे हैं. जिन इलाकों से यह सूचनाएँ मिली हैं, वहाँ सभी जगह सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस की सख्ती की वजह से अब इस तरीके की शिकायत कम हो गई हैं। जिन ग्रामीण इलाकों में राशन की कमी है, वहाँ पर पुलिस की मदद से राशन गाँव वालों तक पहुँचाया भी जा रहा है।

खबरों के मुताबिक छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में पुलिस के बढ़ते दबाव के बाद नक्सली मध्य प्रदेश को अपनी पनाहगार बना रहे हैं। नक्सली संगठन छत्तीसगढ़ अक्सर पेंच-कान्हा कॉरीडोर से बालाघाट में प्रवेश कर मंडला-अमर कंटक की ओर आते हैं। बालाघाट के बैहर और मंडला के बिछिया-मवई तहसील में ग्रामीणों ने पुलिस को भी संदिग्ध लोगों को देखे जाने की सूचना कई बार दी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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