Friday, July 30, 2021
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ममता के बंगाल में जुमे की नमाज के बाद कट्टरपंथियों ने योजना बनाकर की जमकर हिंसा, पत्थरबाजी, आगजनी

प्रदर्शनकारियों ने CAB विरोध की आड़ में गाड़ियों पर पथराव किया। इसकी वजह से हावड़ा सेक्शन में कई लंबी दूरी की और लोकल ट्रेनें हिंसा के कारण फँसी हुई थीं। भीड़ ने कई वाहनों को आग लगा दी और एक एम्बुलेंस पर भी पथराव किया। हिंसक विरोध प्रदर्शन में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAB) के पारित होने के बाद विभिन्न मजहबी संगठनों से संबंधित कई सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किए। हालाँकि यह विरोध प्रदर्शन तक ही सीमित नहीं रहा, ये जल्द ही हिंसा में तब्दील हो गया। खासकर पश्चिम बंगाल में हिंसा का उग्र रूप देखने को मिला।

रिपोर्ट के मुताबिक यह हिंसा सोची-समझी साजिश थी। राज्य और देश के अन्य विभिन्न हिस्सों में मस्जिदों में शुक्रवार (दिसंबर 13, 2019) को जुमे की नमाज के बाद CAB के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी, इसी का परिणाम है कि पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में अत्यधिक हिंसा हुई।

जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में एक रेलवे स्टेशन परिसर में शुक्रवार शाम को हजारों लोगों द्वारा आग लगा दी गई, जिसमें अधिकतर लोग समुदाय विशेष से संबंधित थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बेलडांगा रेलवे स्टेशन परिसर में रेलवे पुलिस बल के कर्मियों की भी पिटाई की।

इंडिया टुडे के एसोसिएट एडिटर इंद्रजीत कुंडू की एक रिपोर्ट के अनुसार, उग्र मजहबी भीड़ ने एंबुलेंस पर पथराव किया और बेलडांगा रेलवे स्टेशन पर तोड़फोड़ की। रेलवे पटरियों पर टायर भी जलाए गए थे। 

भीड़ ने कई वाहनों को आग लगा दी और एक एम्बुलेंस पर भी पथराव किया। हिंसक विरोध प्रदर्शन में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों ने पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में भी उग्र प्रदर्शन किया। उन्होंने उलुबेरिया रेलवे स्टेशन पर पटरियों को अवरुद्ध करके हिंसा किया।

अधिकारियों ने कहा कि उग्र भीड़ ने पथराव कर कॉम्प्लेक्स और कुछ गाड़ियों में तोड़फोड़ की। पूर्व रेलवे के सियालदह डिवीजन में हिंसा ने ट्रेन सेवाओं को भी प्रभावित किया।

प्रदर्शनकारियों ने CAB विरोध की आड़ में गाड़ियों पर पथराव किया। इसकी वजह से हावड़ा सेक्शन में कई लंबी दूरी की और लोकल ट्रेनें हिंसा के कारण फँसी हुई थीं।

कोलकाता में प्रदर्शनकारियों ने पार्क सर्कस में भी घंटों तक यातायात बाधित किया और शहर में बड़ी संख्या में नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में इकट्ठा हुए। समुदाय के हजारों लोगों ने क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 6 को भी अवरुद्ध कर दिया।

पूर्वी मिदनापुर जिले में, भाजपा महासचिव सायंतन बसु की कार पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया। भीड़ इतनी आक्रामक थी कि पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से उन्हें प्रदर्शनकारियों के बीच से निकाला।

भीड़ द्वारा हिंसक हिंसक विरोध प्रदर्शन केवल पश्चिम बंगाल तक ही सीमित नहीं है। राजधानी दिल्ली में भी नागरिकता बिल के विरोध में जामिया मिल्लिया इस्मालिया के छात्रों ने न केवल विरोध प्रदर्शन दिया, बल्कि उसमें पत्थरबाजी भी करने लगे। और इतनी उग्र हिंसा की कि दो पुलिस वालों को न केवल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है, बल्कि वे पुलिस वाले आईसीयू में ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। कुल 12 पुलिस वाले जामिया के छात्रों के हाथों घायल हुए हैं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तकरीबन 50 छात्रों को हिरासत में ले लिया है।

गौरतलब है कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक बुधवार (दिसंबर 11, 2019) को राज्यसभा द्वारा और सोमवार (दिसंबर 9, 2019) को लोकसभा द्वारा पारित किया गया। गुरुवार (दिसंबर 12, 2019) को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा सहमति देने के बाद नागरिकता (संशोधन) विधेयक अब कानून बन गया है। बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल के कानून बनने के बाद पड़ोसी देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के चलते आए हिन्दू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को लोगों को CAB के तहत भारतीय नागरिकता मिल जाएगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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