Monday, May 25, 2020
होम देश-समाज 'नीतीश कुमार, आपको समय क्षमा नहीं करेगा': 11 माँगों के साथ बिहार के 4.5...

‘नीतीश कुमार, आपको समय क्षमा नहीं करेगा’: 11 माँगों के साथ बिहार के 4.5 लाख शिक्षक हड़ताल पर

"बिहार में पिछले 25 दिनों से लगभग साढ़े चार लाख शिक्षक हड़ताल पर हैं। राज्य के सारे प्राथमिक विद्यालयों के करोड़ों बच्चों की शिक्षा बाधित है। सरकार चुप है। कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं। शिक्षकों की माँगें कितनी जायज या नाजायज हैं, इसका निर्णय तब होगा जब सरकार उनके प्रतिनिधियों से बात करे। पर अबतक कोई वार्ता नहीं हुई है।"

ये भी पढ़ें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

बिहार में कुल मिला कर लगभग साढ़े चार लाख शिक्षक हैं जो नियोजित हैं। इनका वेतन वेतन लगभग 25-30 हजार रुपए के क़रीब है। इनके अलावा लगभग दस हजार पुराने शिक्षक हैं, जिनका वेतन 85-90 हजार रुपए है। फिलहाल नियोजित शिक्षक पूर्ण हड़ताल में हैं। स्कूल पूरी तरह बंद हैं। पिछली बार 2015 मे भी शिक्षकों ने सेवा शर्त नियमावली के लिए हड़ताल किया था तब सरकार ने दो महीने में ही सेवा शर्त नियमावली लागू करने का वादा किया था। ये अब तक पूरा नहीं हुआ। शिक्षक आक्रोश में हैं।

बिहार एकमात्र राज्य हैं जहाँ TET पास कर के आए अभ्यर्थियों का भी नियोजन शिक्षामित्रों की तरह पंचायत द्वारा अल्प वेतन पर कराया गया। आज वे शिक्षमित्रों से जूनियर हैं। बिहार में 2002, 2005, 2007, 2009, 2011, 2013-14 में शिक्षक नियोजन हुआ। सन 2002 और 2005 में 1500 के वेतन पर मात्र 11 महीने के लिए शिक्षकों का नियोजन हुआ था। 2006 में उन सब को परमानेंट कर दिया गया और उनका नियत वेतन 5000 रुपए हो गया। फिर धीरे धीरे बढ़ते बढ़ते वेतन 9000 तक हुआ। 2015 में सरकार ने उन्हें एक 5200-20200 का अधूरा वेतनमान दिया, जो अब तक दिया जा रहा है। जो लड़के TET पास कर के आए, उन्हें भी इसी वेतनमान के अधीन रखा गया।

अब आक्रोशित शिक्षक पुराने शिक्षकों वाला वेतनमान माँग रहे हैं। पटना हाईकोर्ट ने अक्टूबर 31, 2017 को शिक्षकों के पक्ष में निर्णय भी दिया था। लेकिन, सरकार सुप्रीम को र्टगई और वहाँ निर्णय बदल दिया गया। आम लोगों में एक मत यह भी है कि शिक्षक मन से काम नहीं करते, और अधिकांश अयोग्य हैं। जब ऑपइंडिया ने कुछ प्रदर्शनकारी शिक्षकों से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि यह कुछ हद तक सही भी है, पर इसके लिए पूरी व्यवस्था को ठप नहीं किया जा सकता। उनसे काम कराना सरकार की जिम्मेवारी है। उनका कहना है कि काम न करने के लिए केवल शिक्षक दोषी नहीं, सरकार भी दोषी है।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

कहा जा रहा है कि शिक्षा विभाग को सबसे अधिक मध्याह्न भोजन ने प्रभावित किया है। शिक्षकों का कहना है कि हेडमास्टर उसी के संचालन में रह जाते हैं, निरीक्षण करने आए अधिकारी भी वही जाँच करते हैं क्योंकि वहीं से ‘माल’ निकलता है। इस चक्कर मे पठन-पाठन व्याधित हो रहा है। शिक्षकों बताते हैं कि जब तक मध्याह्न भोजन को हेडमास्टर से अलग नहीं किया जाता, कोई उपाय नहीं।

शिक्षकों की 11 माँगें

प्राइमरी स्कूल में कार्यरत सर्वेश तिवारी ने अपने फेसबुक पोस्ट में इस समस्या पर बात करते हुए लिखा:

“बिहार में पिछले 25 दिनों से लगभग साढ़े चार लाख शिक्षक हड़ताल पर हैं। राज्य के सारे प्राथमिक विद्यालयों के करोड़ों बच्चों की शिक्षा बाधित है। सरकार चुप है। कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं। शिक्षकों की माँगें कितनी जायज या नाजायज हैं, इसका निर्णय तब होगा जब सरकार उनके प्रतिनिधियों से बात करे। पर अबतक कोई वार्ता नहीं हुई है।”

“कितना अजीब है न! सरकारें शिक्षा जैसे विषय पर इतनी उदासीन कैसे हो सकती हैं? शिक्षकों की माँगों से असहमति हो सकती है, पर छात्रों के भविष्य से नहीं होनी चाहिए। शिक्षकों की कुल 11 माँगें हैं। उनमें एक माँग देख लीजिए। सन 2005 में कुछ लड़कियों की शिक्षक के पद पर अपने गाँव में नियुक्ति हुई। बाद में चालीस किलोमीटर दूर किसी गाँव में उनका विवाह हो गया। विवाह हुए चौदह-पन्द्रह वर्ष हो गए, पर वह शिक्षिका कभी दस दिन ससुराल नहीं रही। कैसे रहे? नौकरी तो मायके के गाँव में है, और स्थानांतरण की व्यवस्था नहीं है। आप अंदाजा लगाइए कि उसका जीवन कितना नरक बन गया होगा।”

धरने पर बैठे आक्रोशित नियोजित शिक्षक
- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

उन्होंने आगे लिखा:

“पाँच साल पहले सरकार ने कहा था कि दो महीने में ही हम सेवा शर्त नियमावली ला देंगे। शिक्षकों के पाँच वर्ष बीत गए पर सरकार के दो महीने पूरे नहीं हुए। यह है सरकार! शिक्षक कुछ और नहीं माँग रहे, यही सेवा शर्त नियमावली माँग रहे हैं। शिक्षक स्वाभिमान की लड़ाई लड़ रहे हैं। शिक्षक सरकार की उस मानसिकता के विरुद्ध लड़ रहे हैं जिसके कारण सरकार हमेशा यह कह देती है कि शिक्षक हमारे राज्यकर्मी नहीं है। तनिक सोचिए तो, यदि शिक्षक सचमुच राज्यकर्मी नहीं हैं, तो सरकार कितनी असंवैधानिक है जो शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य में भी अपने कर्मी नहीं रखी है।”

बिहार में पिछले 25 दिनों से लगभग साढ़े चार लाख शिक्षक हड़ताल पर हैं। राज्य के सारे प्राथमिक विद्यालयों के करोड़ों बच्चों…

Posted by Sarvesh Kumar Tiwari on Wednesday, March 11, 2020
सर्वेश कुमार तिवारी का फेसबुक लेख

इसी पर बात करते हुए उन्होंने आगे बताया:

“शिक्षक सरकार की इसी नीचता के विरुद्ध लड़ रहे हैं। सरकार कह रही है कि हम वेतन बढ़ा देते हैं, पर शिक्षकों से बात नहीं करेंगे। सच पूछिए तो सरकार की इसी तानाशाही के विरुद्ध लड़ रहे हैं शिक्षक। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तानाशाही को केवल शिक्षक ही नहीं देख रहे, समय देख रहा है। अपने पन्द्रह वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को तो लगभग लगभग मार ही दिया है। उन्हें समय शायद ही क्षमा करे।”

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ख़ास ख़बरें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

माफ करना विष्णुदत्त विश्नोई! सिस्टम आपके लायक नहीं… हम पर्दे का सिंघम ही डिजर्व करते हैं

क्या ईमानदार अधिकारियों की जान की कीमत यह देखकर तय की जाएगी कि सत्ता में कौन है? फिर आप पर्दे का सिंघम ही डिजर्व करते हैं।

मोदी-योगी को बताया ‘नपुंसक’, स्मृति ईरानी को कहा ‘दोगली’: अलका लाम्बा की गिरफ्तारी की उठी माँग

अलका लाम्बा PM मोदी और CM योगी के मुँह पर थूकने की बात करते हुए उन्हें नपुंसक बता रहीं। उन्होंने स्मृति ईरानी को 'दोगली' तक कहा और...

‘₹60 लाख रिश्वत लिया AAP MLA प्रकाश जारवाल ने’ – टैंकर मालिकों का आरोप, डॉक्टर आत्महत्या में पहले से है आरोपित

AAP विधायक प्रकाश जारवाल ने पानी टैंकर मालिकों से एक महीने में 60 लाख रुपए की रिश्वत ली है। अपनी शिकायत लेकर 20 वाटर टैंकर मालिकों ने...

भारत माता का हुआ पूजन, ग्रामीणों ने लहराया तिरंगा: कन्याकुमारी में मिशनरियों का एजेंडा फेल

ग्रामीणों का कहना है कि देश और देश के सैनिकों को सलाम करने के लिए उन्होंने ये अभियान शुरू किया था, लेकिन कुछ मिशनरियों के दबाव में......

मुंबई पुलिस ने सोशल मीडिया पर संदेशों के खिलाफ जारी किया आदेश: उद्धव सरकार की आलोचना पर भी अंकुश

असल में यह आदेश परोक्ष रूप से उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार की सभी आलोचनाओं पर भी प्रतिबंध लगाता है, क्योंकि......

‘महाराष्ट्र में मजदूरों को एंट्री के लिए लेनी होगी अनुमति’ – राज ठाकरे ने शुरू की हिंदी-मराठी राजनीति

मजदूरों पर राजनीति करते हुए राज ठाकरे ने CM योगी आदित्यनाथ के 'माइग्रेशन कमीशन' के फैसले पर बयान जारी किया। दरअसल वे हिंदी-मराठी के जरिये...

प्रचलित ख़बरें

गोरखपुर में चौथी के बच्चों ने पढ़ा- पाकिस्तान हमारी प्रिय मातृभूमि है, पढ़ाने वाली हैं शादाब खानम

गोरखपुर के एक स्कूल के बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बने व्हाट्सएप ग्रुप में शादाब खानम ने संज्ञा समझाते-समझाते पाकिस्तान प्रेम का पाठ पढ़ा डाला।

‘न्यूजलॉन्ड्री! तुम पत्रकारिता का सबसे गिरा स्वरुप हो’ कोरोना संक्रमित को फ़ोन कर सुधीर चौधरी के विरोध में कहने को विवश कर रहा NL

जी न्यूज़ के स्टाफ ने खुलासा किया है कि फर्जी ख़बरें चलाने वाले 'न्यूजलॉन्ड्री' के लोग उन्हें लगातार फ़ोन और व्हाट्सऐप पर सुधीर चौधरी के खिलाफ बयान देने के लिए विवश कर रहे हैं।

राजस्थान के ‘सबसे जाँबाज’ SHO विष्णुदत्त विश्नोई की आत्महत्या: एथलीट से कॉन्ग्रेस MLA बनी कृष्णा पूनिया पर उठी उँगली

विष्णुदत्त विश्नोई दबंग अफसर माने जाते थे। उनके वायरल चैट और सुसाइड नोट के बाद कॉन्ग्रेस विधायक कृष्णा पूनिया पर सवाल उठ रहे हैं।

रवीश ने 2 दिन में शेयर किए 2 फेक न्यूज! एक के लिए कहा: इसे हिन्दी के लाखों पाठकों तक पहुँचा दें

NDTV के पत्रकार रवीश कुमार ने 2 दिन में फेसबुक पर दो बार फेक न्यूज़ शेयर किया। दोनों ही बार फैक्ट-चेक होने के कारण उनकी पोल खुल गई। फिर भी...

तब भंवरी बनी थी मुसीबत का फंदा, अब विष्णुदत्त विश्नोई सुसाइड केस में उलझी राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार

जिस अफसर की पोस्टिंग ही पब्लिक डिमांड पर होती रही हो उसकी आत्महत्या पर सवाल उठने लाजिमी हैं। इन सवालों की छाया सीधे गहलोत सरकार पर है।

हमसे जुड़ें

206,924FansLike
60,016FollowersFollow
241,000SubscribersSubscribe
Advertisements