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‘घर में भी तो हो सकता है Corona, प्रोटेस्ट से कोई लेना-देना नहीं’: शाहीन बाग़ ने बताया कोरोना को CAA विरोध शांत करवाने की साजिश

"हम अपने घरों से बाहर जा रहे, बच्चे स्कूल जा रहे, लोग बैंक जा रहे, 10 लोग जो संसद में बैठ कर बात कर रहे क्या उन्हें कोरोना संक्रमण नहीं हो सकता? ये केवल एक बहाना है अमित शाह या केजरीवाल का जिससे हमारा प्रोटेस्ट खत्म किया जा सके।"

शाहीन बाग़ में पिछले कई महीनों से प्रदर्शनकारियों का मानना है कि कोरोना वायरस की ख़बरें गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की एक चाल है, जिसकी आड़ में वो शाहीन बाग़ में चल रहे नागरिकता कानून के विरोध प्रदर्शन को खत्म करवाना चाहते हैं।

इस वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारी कहती है, “कोरोना वायरस तो मेट्रो में भी हो सकता है, कोई उन्हें नहीं रोकता। लेकिन सभी बस शाहीन बाग़ प्रोटेस्ट खत्म करवाना चाहते हैं।” महिला आगे कहती है कि क्या यह जरुरी है कि उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमण तभी होगा जब वो प्रोटेस्ट में जाएगी? उन्होंने कहा कि यह तो हमारे घरों में भी हो सकता है तो क्या हम अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे? वीडियो में महिला ने कहा- “हम अपने घरों से बाहर जा रहे, बच्चे स्कूल जा रहे, लोग बैंक जा रहे, 10 लोग जो संसद में बैठ कर बात कर रहे क्या उन्हें कोरोना संक्रमण नहीं हो सकता? ये केवल एक बहाना है अमित शाह या केजरीवाल का जिससे हमारा प्रोटेस्ट खत्म किया जा सके।”

उल्लेखनीय है कि इस महामारी के कारण दिल्ली में सारे शॉपिंग माल्स, सिनेमा हॉल्स तथा सभी गैर जरूरी सार्वजनिक स्थानों को बंद कर दिया गया है। केंद्र तथा राज्य सरकारों ने भीड़-भाड़ वाले इलाकों से दूरी बनाने और सामाजिक मेल-जोल को कमतर करने की अपील की हैं। हालाँकि सरकारी नियम कानून की धज्जियाँ उड़ा रहीं शाहीन बाग़ की महिलाओं के लिए शायद उतना ही कम नहीं था, जो अब उन्हें कोरोना वायरस में भी साजिश नजर आने लगी है।

इससे पहले भी शहीन बाग़ की प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कोरोना के चलते अपने धरना प्रदर्शन को बंद करने से मना किया था। कुछ दिन पहले एक टीवी चैनल से बातचीत में महिला प्रदर्शनकारी ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि मोदी सरकार उनसे डरती है और शाहीन बाग में सभाओं को प्रतिबंधित करने के लिए सरकार का हालिया निर्देश उनके द्वारा जारी आंदोलन को कमजोर करने की ही एक चाल है।

दरअसल, हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 1897 में महामारी रोग अधिनियम लागू किया था और अत्यधिक संक्रामक रोग के प्रसार को सीमित करने के लिए प्रतिबंधों का एक नया सेट घोषित किया था। इसके बाद मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने फैसला किया कि कम लोग ही धरने पर रहेंगे, लेकिन न तो धरने को समाप्त करेंगे और न ही घरना स्थल को खाली करेंगे।

केजरीवाल सरकार की अपील के बाद भी शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों का सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। एक ओर चीन के वुहान शहर से तेजी से फैली महामारी ने दुनियाँ को बंद कर दिया है। तो वहीं, दूसरी ओर शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी धरना स्थल पर कुरान पढ़ रहे हैं, यह मानते हुए कि अल्लाह उन्हें कोरोना के संकट से बचाएगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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