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कोरोना से पिता की मौत हो गई, LNJP ने एडमिट नहीं किया: महिला ने केजरीवाल सरकार के दावों की खोली पोल

अमरप्रीत ने एक ऑडियो फ़ाइल भी शेयर किया, जिसमें उसने कहा था कि उसके पिता को गंगाराम अस्पताल से एलएनजेपी अस्पताल में शिफ्ट किया जाना था, लेकिन अस्पताल ने रेफरल के बिना स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद वह वापस रेफरल लेने गंगा राम अस्पताल गई।

दिल्ली की रहने वाली अमरप्रीत के पिता की गुरुवार (4 मई 2020) को कोरोना वायरस से मौत हो गई। अमरप्रीत का दावा है कि उन्हें LNJP हॉस्पिटल ने भर्ती करने से मना कर दिया था। उनके पिता तेज बुखार से पीड़ित थे और गंगाराम हॉस्पिटल से एलएनजेपी शिफ्ट किए गए थे।

आज सुबह के आठ बजे अमरप्रीत ने ट्विटर पर बताया कि उनके पिता को तेज बुखार है और सॉंस लेने में दिक्कत हो रही है और वह दिल्ली सरकार के एलएनजेपी अस्पताल के बाहर उन्हें भर्ती किए जाने के इंतजार में बैठी है।

उन्होंने दिल्ली के विधायक दिलीप पांडे, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भी अपने ट्वीट में टैग किया था।

अमरप्रीत ने एक ऑडियो फ़ाइल भी शेयर किया, जिसमें उसने कहा था कि उसके पिता को गंगाराम अस्पताल से एलएनजेपी अस्पताल में शिफ्ट किया जाना था, लेकिन अस्पताल ने रेफरल के बिना स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद वह वापस रेफरल लेने गंगा राम अस्पताल गई।

दिल्ली सरकार द्वारा चलाया जा रहा एलएनजेपी अस्पताल स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के अंतर्गत आता है।

हालाँकि करीब एक घंटे के बाद उन्होंने दोबारा ट्वीट किया और बताया कि अस्पताल के बाहर इंतजार करते हुए उसके पिता ने दम तोड़ दिया और वह अब जिंदा नहीं है।

दिल्ली सरकार के कोरोनावायरस डैशबोर्ड के अनुसार, एलएनजेपी अस्पताल में कुल उपलब्ध 2,000 बेड्स में से 1,129 बेड्स इस समय खाली हैं।

वहीं इस सप्ताह के शुरूआत में अमरप्रीत ने ट्विटर के जरिए दिल्ली सरकार से अपने पिता के लिए मदद की गुहार लगाई थी, जब उनके पिता का कोरोना वायरस टेस्ट पॉजिटिव आया था।

पिता का कोरोना वायरस टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद 2 जून को अमरप्रीत ने दिल्ली सरकार द्वारा जारी सभी हेल्पलाइन नबरों पर कॉल की कोशिश की लेकिन कथित तौर पर उनमें से कोई भी नंबर काम नहीं कर रहा था। बाद में उन्होंने मदद को सामने आए दिल्ली के विधायक दिलीप पांडे और अन्य लोगों को धन्यवाद दिया था।

लोकनायक अस्पताल में शवों की बदतर स्थिति

बता दें अभी हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने लोकनायक अस्पताल में शवों की बदतर स्थिति को लेकर दिल्ली सरकार और तीनों नगर निगमों को नोटिस जारी किया था। हाईकोर्ट ने शवों को लेकर मानवाधिकारों के उल्लंघन पर आपत्ति जताई थी।

जहाँ अस्पताल स्थित कोविड-19 मॉर्चरी में 108 शव रखे हुए थे। मॉर्चरी में 80 शवों वाले रेक के भरने के बाद 28 कोरोना संक्रिमत शवों को ज़मीन पर एक के ऊपर रखा गया था। अस्पताल अधिकारी ने शवगृह की हालत बताते हुए कहा कि, अभी तक पाँच दिन पहले जिनकी मौत हुई थी, उनका अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। इसकी वजह से मॉर्चरी में हर दिन संख्या बढ़ती चली जा रही है। पिछले हफ्ते जमीन पर 28 की जगह 34 शव पड़े हुए थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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