Wednesday, April 24, 2024
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हाथरस: दिल्ली पुलिस व खुफिया विभाग से मिली थी दंगे भड़काने की साजिश की जानकारी, UP पुलिस ने दायर किया हलफनामा

इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि हाथरस पीड़िता का शव आते ही, परिवार, समर्थक और राजनीतिक संगठन उसका शव लेने और दाह संस्कार करने से इनकार कर सकते हैं।

हाथरस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रहीं सुनवाई के बीच यूपी पुलिस ने शीर्ष अदालत में एक हलफनामा दायर किया है। दायर हलफनामे में यूपी पुलिस ने दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए हाथरस मामले को विपक्ष की सोची समझी साजिश बताया है।

यूपी पुलिस द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि कुछ राजनीतिक दलों के पदाधिकारी पीड़िता की मौत के तुरंत बाद सफदरजंग अस्पताल पहुँचे और परिवार को उकसाते हुए कहा कि जब तक उनकी माँगे पूरी नहीं होती, तब तक वे शव नहीं लेंगे।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने 29 सितंबर की खुफिया विभाग की एक रिपोर्ट भी हलफनामें में संलग्न की है। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि वाल्मीकि समुदाय, भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी से जुड़े संगठन बड़ी संख्या में हाथरस में इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं, जो हिंसक मोड़ ले सकता है।

इसके अलावा, हलफनामे में उत्तर प्रदेश पुलिस ने दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले के डेप्युटी कमिश्नर ऑफ पुलिस द्वारा गृह विभाग, टुर्न गाबा के सचिव को 4 अक्टूबर को भेजी गई एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे ही मृतक का पोस्टमार्टम शुरू हुआ, दलित नेता उदित राज, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्र शेखर आजाद, कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद पीएल पुनिया और उनके समर्थकों सहित बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होने लगे। इसके बाद AAP विधायक राखी बिड़ला ने विरोध शुरू कर दिया। पुलिस ने उनसे शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वहाँ मौजूद लोग मृतका के परिजनों को भड़का रहे थे कि जब तक उनकी न्याय की माँग पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे पीड़िता का शव न लें। कुछ प्रदर्शनकारी माँग कर रहे थे कि मुख्यमंत्री को अस्पताल आना चाहिए और परिवार को आश्वासन देना चाहिए। परिवार इन नेताओं के प्रभाव में था और भीड़ ने परिवार को घेर लिया। यहाँ तक की पुलिस अधिकारियों को भी परिवार से बात नहीं करने दी गई।

यूपी पुलिस ने 29 सितंबर को एसपी, कानून व्यवस्था द्वारा साझा की गई एक खुफिया रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि हाथरस पीड़िता का शव आते ही, परिवार, समर्थक और राजनीतिक संगठन उसका शव लेने और दाह संस्कार करने से इनकार कर सकते हैं।

ऐसी जानकारी मिली हैं कि वे पीड़िता के शव को सड़क पर रखकर हिंसक विरोध प्रदर्शन कर सकते थे। इसके अलावा, वे प्रदर्शन की आड़ में पथराव और बवाल भी कर सकते हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि प्रदर्शनकारी गाड़ियों को रोक सकते हैं, पुतले जला सकते हैं और हंगामा कर सकते हैं।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि प्रदर्शनकारी गाड़ियों को रोक सकते हैं, पुतले जला सकते हैं और हंगामा कर सकते हैं। मूल रूप से रिपोर्ट्स में इस बात की चेतावनी दी गई थी कि, हाथरस की घटना पर अशांति फैलाने के लिए एक साजिश रची जा रही थी। रिपोर्ट से मिली जानकारी के आधार पर यूपी पुलिस ने 19 एफआईआर दर्ज कीं।

एफआईआर में 700 लोगों के नाम हैं, जिन पर हिंसक घटना में साजिश रचने का आरोप है। इसी तरह के कारणों का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले को उच्चतम न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जाँच का आदेश दिया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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