Thursday, October 22, 2020
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पेट्रोल बम लेकर घूम रहे दंगाइयों से निर्दोष छात्रों को बचाने के लिए जामिया लाइब्रेरी में घुसना पड़ा: दिल्ली पुलिस

इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि दिल्ली पुलिस ने न सिर्फ बेरहमी से विश्वविद्यालय स्टूडेंट्स को पीटा, उन्हें गालियाँ दीं, अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं बल्कि बगैर किसी ठोस कारण के उसने लाइब्रेरी के मेन गेट को तोड़ उसके भीतर आँसू गैस के गोले भी छोड़े।

नए नागरिकता कानून के विरोध के नाम पर जामिया विश्विद्यालय में हुई हिंसा पर दिल्ली पुलिस द्वारा दिल्ली के कोर्ट में फाइल की गई ‘एक्शन टेकेन रिपोर्ट’ में दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि वह लाइब्रेरी में फँसे हुए मासूम स्टूडेंट्स को बचाने के लिए ही जामिया लाइब्रेरी में प्रवेश की थी।

मीडिया के अनुसार, यह रिपोर्ट पुलिस ने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट रजत गोयल के आदेश के बाद दाखिल की। याद रहे कि मजिस्ट्रेट गोयल ने दिल्ली पुलिस को ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ फाइल करने का आदेश जामिया प्रशासन की उस याचिका पर दिया था, जिसमें कोर्ट से दिल्ली पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अपील की गई थी।

इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि दिल्ली पुलिस ने न सिर्फ बेरहमी से विश्वविद्यालय स्टूडेंट्स को पीटा, उन्हें गालियाँ दीं, अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं बल्कि बगैर किसी ठोस कारण के उसने लाइब्रेरी के मेन गेट को तोड़ उसके भीतर आँसू गैस के गोले भी छोड़े।

इन आरोपों पर कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में दिल्ली पुलिस ने कहा कि कानून और व्यवस्था को बरकरार रखने और यूनिवर्सिटी तथा लाइब्रेरी के भीतर फँसे निर्दोष स्टूडेंट्स को बचाने के लिए उन्हें जरूरी कदम उठाने पड़े, जिसमें लाइब्रेरी में घुसना भी शामिल था। इससे पहले जामिया मिलिया इस्लामिया ने कोर्ट से कहा था कि तमाम कोशिशों और प्रार्थनाओं के बाद भी दिल्ली पुलिस ने न तो किसी भी दोषी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज की है और न ही किसी के खिलाफ किसी भी प्रकार की जाँच शुरू की है।

दिल्ली पुलिस ने अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट में यह भी कहा है कि पेट्रोल बम लिए घूम रहे दंगाइयों और फँसे हुए निर्दोष स्टूडेंट्स के बीच फर्क करना बेहद मुश्किल था, क्योंकि उस समय अँधेरा हो चुका था। इसलिए उसने वहाँ मौजूद सभी को हाथ ऊपर कर के बाहर आने का आदेश दिया।

अपनी अर्जी में जामिया प्रबंधन ने आरोप लगाया था कि दिसंबर हिंसा में विश्विद्यालय की सरकारी सम्पत्ति को भारी नुकसान पहुँचाने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ वीडियो और फोटोग्राफ मौजूद हैं। जबकि पुलिस ने कोर्ट में दाखिल अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दंगाइयों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में मौजूद लाइट्स को तोड़ दिया था जिसके कारण दंगाइयों और मासूम स्टूडेंट्स के बीच फर्क करना मुश्किल था। इसके अतिरिक्त पुलिस ने जामिया हिंसा में अपने कई अधिकरियों और कर्मियों के घायल होने की बात भी कही है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब 7 अप्रैल को होगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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