Tuesday, April 23, 2024
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‘नया साल गैरों का त्योहार, मुस्लिम न मनाएँ खुशी वरना बनेंगे गुनहगार: देवबंद के उलेमा का फतवा’

मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है तथाकथित न्यू ईयर का जश्न मनाने के दौरान कई गुनाह होते हैं, जैसे नाच-गाने के दौरान महिला और पुरुष के बीच कोई पर्दा न होता, लोग शराब पीते हैं आदि-आदि। इसलिए गैर-मुस्लिमों को ही ये त्योहार मनाने देना चाहिए और इस तरह की चीजों का अनुसरण नहीं करना चाहिए।

उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में देवबंदी उलेमा ने नए साल के मौक़े पर मुस्लिमों से अपील की है कि वे 1 जनवरी को नया साल न मनाएँ। न्यूजस्टेट की रिपोर्ट के मुताबिक उनका तर्क है कि 1 जनवरी को ईसाई धर्म के लोग नया साल मनाते हैं। इस्लाम में नया साल तो मोहर्रम से शुरु होता है। इसलिए वे लोग गैरों के त्योहार न मनाएँ और जो मुस्लिम इस 1 जनवरी को नया साल मनाते हैं वो गुनहगार होते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, नए साल के जश्न में डूबे युवाओं से इस तरह की अपील इत्तेहाद उलेमा ए हिन्द के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुफ्ती असद कासमी ने की है। उन्होंने कहा है कि आम तौर पर जनवरी को ही नए साल के रूप में मनाया जाता है। लेकिन इस्लामी नजरिए के एतबार से जनवरी इस्लामी साल की शुरुआत नहीं हैं। इसलिए वे इस्लामी नजरिए से बताते हुए कहते हैं कि इस्लाम का नया साल मोहर्रम से शुरु होता है और इस्लाम के अंदर मोहर्रम को ही नया साल माना जाता है।

उनके मुताबिक, जनवरी से जो नया साल शुरु होता है, उसे ईसाई धर्म को मानने वाले मनाते हैं। जिससे उन्हें कोई आपत्ति नहीं। लेकिन वह मुस्लिमों से ये अपील करना चाहते हैं कि जनवरी में कोई भी मुस्लिम इसकों न मनाए। क्योंकि जो भी जनवरी की शुरुआत में नया साल मनाते हैं वे गुनहगार होते हैं।

गौरतलब है कि इंटरनेट पर मौजूद इस विषय की जानकारी के अनुसार, इस विषय पर कई लोगों की अलग-अलग राय हैं। कुछ लोगों का मानना है कि वाकई इस्लाम के मुताबिक जनवरी में नए साल को मनाना एक गुनाह हैं और भूलकर भी ऐसा नहीं करना चाहिए। वहीं, कुछ समुदाय के लोगों का कहना है तथाकथित न्यू ईयर का जश्न मनाने के दौरान कई गुनाह होते हैं, जैसे नाच-गाने के दौरान महिला और पुरुष के बीच कोई पर्दा न होता, लोग शराब पीते हैं आदि-आदि। इसलिए गैर-मुस्लिमों को ही ये त्योहार मनाने देना चाहिए और इस तरह की चीजों का अनुसरण नहीं करना चाहिए। इसके अलावा लोग कहते हैं कि अगर इतने के बावजूद भी उनके मन में सवाल उठते हैं तो उन्हें इस विषय के बारे में मुफ्ती से पता करना चाहिए, ताकि मुफ्ती अन्य मुफ्तियों से बात करके इस बारे में फतवा जारी कर सके।

नए साल के अवसर पर मुस्लिम युवकों से अपील करने वाले उलेमा इससे पहले टीएमसी सांसद पर की गई टिप्पणी के कारण चर्चा का विषय रह चुके हैं। जहाँ उन्होंने नुसरत जहाँ द्वारा दुर्गा पूजा करने को नाजायज ठहराया था और कहा था कि इस्लाम में अल्लाह की इबादत के सिवा किसी और की इबादत करना/पूजा करना जायज नहीं है, उनको अपना नाम बदल लेना चाहिए। इस्लाम को ऐसे लोगों की जरूरत नहीं है जो मुस्लिम नाम रखकर इस्लाम और मुस्लिमों को बदनाम करे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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