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बिहार में SIR के बाद 3 लाख वोटरों की नागरिकता पर संदेह, दस्तावेजों में मिली गड़बड़ियाँ तो चुनाव आयोग ने भेजे नोटिस: 7 दिनों में कागजात दिखाने का दिया आदेश

बिहार में चल रही वोटर लिस्ट की जाँच में इलेक्शन कमीशन ने 3 लाख वोटरों को नोटिस भेजा है, क्योंकि उनके दस्तावेजों में गड़बड़ी निकली है। 7 दिनों के भीतर अधिकारियों ने कागजात दिखाने का आदेश दिया है। आशंका जताई जा रही है कि ये लोग अवैध प्रवासी है।

बिहार में चल रही वोटर लिस्ट की विशेष जाँच (SIR) में एक बड़ा खुलासा हुआ है। इलेक्शन कमीशन (EC) की जाँच में अब तक करीब 3 लाख वोटरों के दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई है। इन सभी को नोटिस भेजा गया है और 7 दिनों के भीतर अधिकारियों के सामने हाजिर होकर अपने कागजात दिखाने को कहा गया है।

यह संख्या और भी बढ़ सकती है, क्योंकि अभी भी दस्तावेजों की जाँच चल रही है। जाँच के दौरान ऐसे कई वोटर मिले हैं, जिनके भारतीय नागरिक होने पर शक है। खासकर नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों के वोटर बनने की आशंका जताई जा रही है। रविवार (24 अगस्त 2025) को चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा था कि 98.2% मतदाताओं के दस्तावेज प्राप्त हो चुके हैं।

कैसे मिला गड़बड़ी का सुराग?

इलेक्शन कमीशन के अधिकारियों के मुताबिक, जिन लोगों को नोटिस भेजा गया है, उन्होंने या तो कोई दस्तावेज जमा नहीं किया या गलत दस्तावेज दिए हैं। कुछ मामलों में तो वोटर की नागरिकता ही संदिग्ध पाई गई है। ये जानकारी बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) और पुलिस जैसी एजेंसियों से मिली है।

नोटिस में कहा गया है कि उनके द्वारा दिए गए दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ियाँ पाई गई हैं, जिससे इस बात पर शक होता है कि उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल होना चाहिए या नहीं।

कहाँ से आए हैं ये ‘संदिग्ध वोटर’?

जानकारी के अनुसार, ज्यादातर नोटिस पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, मधुबनी, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और सुपौल जिलों में भेजे गए हैं। ये इलाके सीमांचल क्षेत्र में आते हैं, जिनकी सीमाएँ खुली हैं। भाजपा जैसे राजनीतिक दलों ने इस इलाके में बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों के अवैध रूप से बसने का आरोप लगाया है। हालाँकि, कुछ पार्टियाँ इसे शिक्षा की कमी और बाढ़ की वजह से दस्तावेज खोने का मामला बता रही हैं।

इलेक्शन कमीशन ने साफ किया है कि बिना सुनवाई के किसी भी वोटर का नाम लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा। सभी संदिग्ध लोगों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। अधिकारियों ने बताया कि इन 3 लाख लोगों में से ज्यादातर का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं था। उनके आधार कार्ड और बाकी दस्तावेजों में भी नाम और पता मेल नहीं खा रहा था।

बिहार में कुल 7.89 करोड़ वोटर थे, जिनमें से पहले चरण की जाँच में ही 65 लाख नाम हटा दिए गए। हटाए गए नामों में या तो मर चुके थे, या कहीं और चले गए थे, या फिर एक से ज़्यादा जगह पर नाम रजिस्टर्ड थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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