नोटबंदी में गड़बड़ी पर पहली सजा: PNB के 3 कर्मचारियों को 4 साल की जेल, 4-4 लाख रुपए का जुर्माना

जमाकर्ताओं ने वैध नोट नकदी में जमा कराए थे, लेकिन दोषी कर्मचारियों ने कम्प्यूटर में इन्हें प्रतिबंधित नोट (एक हजार और पांच सौ रुपये) के तौर पर दिखाया। सीबीआई ने छह अप्रैल 2017 को मामला दर्ज किया था।

नोटबंदी के बाद अवैध तरीके से धन के लेन-देन के मामले में CBI की विशेष अदालत ने शुक्रवार (23 अगस्त) को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के तीन कर्मचारियों को चार साल जेल की सज़ा सुनाई। नोटबंदी के दौरान गड़बड़ी करने के मामले में संभवत: यह सजा सुनाए जाने का पहला मामला है। अदालत ने कहा कि बैंक कर्मचारियों ने अपने कृत्यों से ‘उस संस्थान पर धब्बा‘ लगाया, जिसमें काम करते हुए वे आगे बढ़े।

विशेष न्यायाधीश राजकुमार चौहान ने पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों रामानंद गुप्ता, भुवनेश कुमार जुल्का और जितेन्दर वीर अरोड़ा को 10.51 लाख रुपए की वैध राशि को ग़लत तरीके से नोटबंदी की राशि के रूप में दिखाने और इसे ‘अनधिकृत और अवैध’ रूप से बदलने के लिए दोषी ठहराया।

अदालत ने कहा,

“दोषी के बैंक अधिकारी होने के कारण उनसे उम्मीद की जा रही थी कि वे ईमानदारी और सत्यनिष्ठा का पालन करें। दोषियों के कृत्य ने संस्थान पर धब्बा लगा दिया जिसमें काम करते हुए वे वरिष्ठ अधिकारी के पद तक पहुँचे…यह नोटबंदी के बाद बैंक अधिकारियों द्वारा शक्ति के दुरूपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रतीत होता है।”

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अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) के साथ धारा 409 (आपराधिक विश्वासभंजन), धारा 471 (फ़र्ज़ी दस्तावेज़ो को मूल दस्तावेज़ के तौर पर इस्तेमाल करना), 477 ए (खाते में धोखाधड़ी) के साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (2), धारा 13(1) (डी) (नौकरशा द्वारा आपराधिक आचरण) के तहत दोषी ठहराया। साथ ही अदालत ने हर दोषी पर चार- चार लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया।

ग़ौरतलब है कि तीनों बैंक कर्मचारियों के ख़िलाफ़ PNB की एक शाखा के उप सर्कल प्रमुख ने पांच अप्रैल 2017 को शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि आरोपियों ने PNB की सिविल लाइन ब्रांच में दो बार ग़लत रिकॉर्ड बनाया है, जो कि डिपॉजिटर द्वारा भरे गए असली वाउचर से मेल नहीं खा रहा था। डिपॉजिटर ने लीगल टेंडर के रूप में कैश जमा कराया था। इनमें, 100, 50, 20, 05, 02 और 1 रुपए के नोट और सिक्के थे।

तीनों बैंक कर्मचारियों ने साज़िश रचते हुए डिपॉजिट को चलन से बाहर हो गए 500 और 1000 के नोट के रूप में दिखाया। CBI के आरोप के मुताबिक़, बैंक कर्मचारियों ने 10.51 लाख रुपए को अवैध तरीके से एक्सचेंज किया। CBI ने 6 अप्रैल, 2017 को FIR दर्ज की थी। ट्रांजेक्शन की जाँच से पता चला कि कैश लेने के बाद कर्मचारियों ने अपनी आईडी से CBS सिस्टम में फीड किया था। बैंक के वाउचर में दर्ज डिनॉमिनेशन बैंक सिस्टम में अलग थे।

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