Wednesday, July 28, 2021
Homeदेश-समाज23846 मंदिरों पर आंध्र सरकार का नियंत्रण, चर्च-मस्जिदों की तरह ​हिंदुओं को मिले: पूर्व...

23846 मंदिरों पर आंध्र सरकार का नियंत्रण, चर्च-मस्जिदों की तरह ​हिंदुओं को मिले: पूर्व IAS/IPS की CM जगन से डिमांड

डॉ. चौधरी कहते हैं, "हिंदू मंदिरों के प्रबंधन और प्रशासन से खुद को अलग कर लें। आप (मंदिरों) को सौंपने की तिथि घोषित करें और हिंदुओं से सुझाव माँगे कि मंदिरों को किसे सौंपा जाना चाहिए।" उन्होंने जगन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार से अपील की कि वह 31 दिसंबर 2021 तक मंदिरों का नियंत्रण हिंदुओं को सौंप दे।

मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मु​क्त करने की माँग लगातार उठती रहती है। इसी कड़ी में आंध्र प्रदेश में पद्मश्री से सम्मानित डॉ. टी हनुमान चौधरी ने कुछ रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के साथ मुहिम शुरू की है। राज्य की जगनमोहन सरकार से इन लोगों ने मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मॉंग की है।

इस संबंध में क्राउडकैश (CrowdKash) की याचिका को डॉ. चौधरी सहित कई नामचीन व्यक्तियों मसलन पूर्व आईएएस अधिकारी आईवाईआर कृष्णा राव, के पद्मनाभैया और पूर्व IPS अधिकारियों एम नागेश्वर राव और के अरविन्द राव का समर्थन हासिल है। इन्होंने मंदिरों का प्रबंधन हिन्दुओं के हवाले करने की माँग की है।

याचिका में कहा गया है कि आंध्र प्रदेश सरकार 23,846 हिंदू मंदिरों और उनकी संपत्तियों को नियंत्रित करती है। इनकी कीमत हजारों करोड़ रुपए है। डॉ. चौधरी का कहना है कि हिंदुओं को अपने मंदिरों के प्रबंधन में उतनी ही स्वतंत्रता होनी चाहिए जितनी कि मस्जिदों और चर्चों के प्रबंधन के लिए दी गई है।

डॉ. चौधरी कहते हैं, “हिंदू मंदिरों के प्रबंधन और प्रशासन से खुद को अलग कर लें। आप (मंदिरों) को सौंपने की तिथि घोषित करें और हिंदुओं से सुझाव माँगे कि मंदिरों को किसे सौंपा जाना चाहिए।” उन्होंने जगन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार से अपील की कि वह 31 दिसंबर 2021 तक मंदिरों का नियंत्रण हिंदुओं को सौंप दे।

इस याचिका पर अब तक 7,000 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। याचिका में यह भी माँग की गई है कि आंध्र प्रदेश धर्मार्थ और हिंदू धार्मिक संस्था अधिनियम, 1987 को निरस्त किया जाए और इसके स्थान पर एक नया कानून बनाया जाए।

याचिका में कहा गया है कि हिंदुओं को हिंदू मंदिरों और उनकी संपत्तियों को धार्मिक व्यक्तियों और सरकार के साथ हिंदू प्रतिनिधियों को शामिल करने की अनुमति देनी चाहिए। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि धन, संपत्ति और मंदिरों के सभी संसाधनों का उपयोग केवल हिंदू मंदिरों के रखरखाव एवं विकास के लिए, हिंदुओं और हिंदू समुदाय की धार्मिक भलाई के लिए, हिंदू धर्म के संरक्षण, प्रचार और प्रसार के लिए किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश सरकार ईसाइयों पर काफी मेहरबान रहती है। पिछले दिनों आंध्र प्रदेश के सत्ताधारी दल के ही एक सांसद ने ईसाई धर्मांतरण को सरकारी संरक्षण दिए जाने का खुलासा किया था। इसके बाद ऐसे इलाके में चर्च का निर्माण किए जाने का मामला सामने आया जहॉं केवल हिंदू ही रहते हैं। इतना ही नहीं जब ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जताई तो प्रशासन ने उनका कथित तौर पर उत्पीड़न किया। 

धर्मांतरण को लेकर मिशनरीज की हकीकत का खुलासा करने वाले YSRCP नेता रघु रामकृष्णा राजू ने प्रदेश की सच्चाई बताते हुए खुलेआम कहा था कि सरकारी रिकॉर्ड में भले ही ईसाइयों की संख्या 2.5% है मगर, हकीकत में ये आँकड़ा 25% से कम नहीं है।

वहीं आंध्र प्रदेश में NGO ‘लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम’ ने अपनी रिसर्च में पाया था कि राज्य में 29841 ईसाई पादरियों को 5000 रुपए का एकबारगी मानदेय दिया गया। ये रुपए ‘डिजास्टर रिलीफ फण्ड’ से दिए गए। साथ ही इनमें से 70% ऐसे हैं, जिनके पास SC/OBC जाति प्रमाण-पत्र थे। जिसके बाद केंद्रीय समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने इस मामले में कार्रवाई के लिए आंध्र प्रदेश के अधिकारी को पत्र लिखा था।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘बद्रीनाथ नहीं, वो बदरुद्दीन शाह हैं…मुस्लिमों का तीर्थ स्थल’: देवबंदी मौलाना पर उत्तराखंड में FIR, कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी

मौलाना के खिलाफ़ आईपीसी की धारा 153ए, 505, और आईटी एक्ट की धारा 66F के तहत केस किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसके बयान से हिंदू भावनाएँ आहत हुईं।

बसवराज बोम्मई होंगे कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री: पिता भी थे CM, राजीव गाँधी के जमाने में गवर्नर ने छीन ली थी कुर्सी

बसवराज बोम्मई के पिता एस आर बोम्मई भी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जबकि बसवराज ने भाजपा 2008 में ज्वाइन की थी।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
111,576FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe