Thursday, July 7, 2022
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केजरीवाल सरकार के दो विरोधाभासी आदेशों ने कोरोना को लेकर सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों के लिए खड़ी की मुसीबत

“अगर हम बिना टेस्ट के मरीज को कोरोना वायरस पॉजिटिव मानकर इलाज करते हैं, तो मरीज के इलाज में पर्याप्त सुरक्षा (पीपीई, अलग डॉक्टर, समर्पित नर्सों के साथ एक अलग वार्ड) के लिए लाखों का खर्चा होगा और अगर मैं उसे अन्य कोरोना वायरस रोगियों के साथ रखता हूँ, तो यह मासूम बच्चा उनसे संक्रमित हो सकता है।"

दिल्ली में कोरोना वायरस के बढ़ते सक्रिय मामलों के बीच, राज्य सरकार ने कथित तौर पर दो विरोधाभासी आदेश जारी किया। जिसकी वजह से सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है।

3 जून को, अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार ने कथित तौर पर अस्पताल को आदेश दिया था कि वह ICMR के दिशानिर्देशों की धज्जियाँ उड़ाते हुए कोरोना वायरस संक्रमितों का टेस्ट करना बंद कर दे।

नोटिस में लिखा था, “जिले को पता चला है कि अस्पताल आज भी RT, PCR ऐप का उपयोग नहीं कर रहा है। अस्पताल को यह बताने के लिए निर्देशित किया जाता है कि उन्होंने आदेश की प्राप्ति के दो दिनों के बाद भी RT PCR ऐप के माध्यम से सैंपल इकट्ठा करना शुरू क्यों नहीं किया है। कोरोना वायरस संदिग्ध / पुष्टि के मामलों के लिए RT PCR सैंपलिंग को तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए।”

उसी दिन, दिल्ली सरकार ने एक और घोषणा की कि 675 बेड वाले सर गंगाराम हॉस्पिटल को कोरोना वायरस मरीजों के इलाज के लिए 80 प्रतिशत बेड आरक्षित करने होंगे। डॉक्टरों का कहना है कि एक तरफ कोरोना संक्रमितों का टेस्ट करने से मना करना और दूसरी तरफ उनके इलाज के लिए बेड की संख्या बढ़ाना विरोधाभासी आदेश है, जिसकी वजह से काफी मुश्किलें हो रही हैं।

सर गंगा राम अस्पताल में मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ श्याम अग्रवाल ने बताया कि उनके पास कैंसर के मरीज के लगातार फोन आ रहे हैं, जिन्हें कीमोथैरेपी दी जानी है। उन्होंने बताया, “हमने यह सुनिश्चित किया है कि उन्हें हर दो सप्ताह में एक बार कोरोना वायरस परीक्षण कराना चाहिए क्योंकि कोविड पॉजिटिव वाले रोगी पर कीमोथैरेपी विनाशकारी हो सकती है। हमने उन्हें बताया है कि यदि परीक्षण नहीं किया जाता है, तो यह (कीमोथैरेपी) उनके लिए हानिकारक हो सकता है।”

अग्रवाल को कैंसर मरीजों ने बताया कि कई लैब ने टेस्ट करना बंद कर दिया है। ऐसे में वो अपना टेस्ट कहाँ पर करवाएँ? इस तरह दिल्ली सरकार के आदेश की वजह से कैंसर के मरीज बिना इलाज के रहने को मजबूर हैं।

बुधवार को हॉस्पिटल के लैब में कोरोना वायरस टेस्ट के लिए 174 सैंपल एकत्र किए गए थे। टेस्ट बंद होने से पहले अस्पताल में प्रतिदिन 150 से 170 सैंपलों का टेस्ट हुआ करता था। वहीं डॉक्टरों के मुताबिक एक दिन में लगभग 30-40 सर्जरी की जाती थी। मगर गुरुवार से टेस्ट के साथ सर्जरी भी बंद हो गई। सब कुछ ठप हो गया है।

डॉ अग्रवाल ने एक ब्रेस्ट कैंसर रोगी की कहानी सुनाई, जिसे न चाहते हुए भी सरकारी आदेश की वजह से उन्हें छुट्टी देनी पड़ी। उन्होंने स्वीकार किया कि गुरुवार को महिला का ऑपरेशन होना तय था। मगर आवश्यक टेस्ट किए बिना उस ऑपरेशन को नहीं किया जा सकता था। इसलिए ऑन्कोलॉजिस्ट को उनके परिवार को सरकारी आदेश के बारे में समझाना पड़ा और यह जानने के बावजूद कि कैंसर फैल सकता है, रोगियों को छुट्टी देनी पड़ी। उन्होंने बताया कि पिछले 2 दिनों में तीन रोगियों की सर्जरी को इसी तरह से स्थगित किया गया।

सर गंगा राम अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ ने कहा, “अगर हम बिना टेस्ट के मरीज को कोरोना वायरस पॉजिटिव मानकर इलाज करते हैं, तो मरीज के इलाज में पर्याप्त सुरक्षा (पीपीई, अलग डॉक्टर, समर्पित नर्सों के साथ एक अलग वार्ड) के लिए लाखों का खर्चा होगा और अगर मैं उसे अन्य कोरोना वायरस रोगियों के साथ रखता हूँ, तो यह मासूम बच्चा उनसे संक्रमित हो सकता है।”

सर गंगाराम अस्पताल से जुड़े 40 बेड वाले कोलमेट और 140 बेड वाले सिटी हॉस्पिटल को पहले ही कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए परिवर्तित कर दिया गया है। सरकारी आदेश के अनुसार, सर गंगाराम अस्पताल में केवल 20% बेड गैर-कोरोना वायरस रोगियों के लिए उपलब्ध हैं।

दिल्ली सरकार के एक प्रवक्ता ने दावा किया था कि 35 मान्यता प्राप्त ICMR प्रयोगशालाओं में से 8 आधिकारिक दिशानिर्देशों की धज्जियाँ उड़ाते हुए पाए गए थे। जिसके बाद उनके खिलाफ अस्थायी रुप से कार्रवाई की गई थी। इन प्रयोगशालाओं को व्यक्तिगत सैंपल नहीं लेने का निर्देश दिया गया था। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पतालों द्वारा भेजे गए नमूने को मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में संसाधित किया जाना जारी है।

जब डॉक्टरों द्वारा उठाए गए मुद्दे पर दिल्ली सरकार के प्रवक्ता से पूछा गया तो उन्होंने कहा, “दिल्ली में ICMR द्वारा अधिकृत दिल्ली में 35 लैब हैं। इनमें से आठ प्रयोगशालाओं में ICMR द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया था। इसलिए कार्रवाई शुरू की गई। एक अस्थाई उपाय के रूप में, इन प्रयोगशालाओं को व्यक्तिगत नमूने नहीं लेने के लिए कहा गया है। हालाँकि, विभिन्न अस्पतालों और अन्य एजेंसियों द्वारा भेजे गए नमूनों को इन प्रयोगशालाओं में संसाधित किया जाएगा।”

अपने बचाव में, सर गंगा राम अस्पताल के अध्यक्ष ने कहा कि प्रबंधन ने सरकार के नोटिस का जवाब दिया था और दोहराया कि यह एक मामूली मुद्दा था। उन्होंने जोर दिया कि टेस्ट सेवाओं को बहुत जल्द फिर से शुरू किया जाएगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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