Thursday, May 13, 2021
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‘ऑक्सीजन की कमी से मरीज को कुछ हुआ तो हॉस्पिटल जिम्मेदार नहीं… परिवार वाले’ – दिल्ली में अस्पतालों ने खड़े किए हाथ

"अगर ऑक्सीजन की कमी से कोई मरीज पीड़ित है, तो यह रोगी के रिश्तेदारों की जिम्मेदारी होगी न कि अस्पताल की... ऑक्सीजन सप्लाई की अनिश्चितता के कारण हम ये घोषणा करते हैं कि अब हम लोगों को ऑक्सीजन नहीं दे सकते हैं।"

दिल्ली में कोरोना के कारण हालात लगातार भयावह होते जा रहे हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के कारण हर दिन सैकड़ों जानें जा रही हैं। दिल्ली में लगातार पाँचवे दिन ऑक्सीजन की आपूर्ति में भारी कमी आई है। हालात ये हैं कि इसकी वजह से मरीजों की साँसे उखड़ने लगी हैं और अस्पताल प्रशासन ने अपने हाथ खड़े कर लिए हैं। कई अस्पताल उनके यहाँ भर्ती मरीजों को छुट्टी देने के लिए परिजनों से भी संपर्क कर रहे हैं तो कुछ ने अपने यहाँ बेड्स की संख्या घटा दी है।

शनिवार को भी दिल्ली के दो अस्पताल सरोज सुपर स्पेशियलिटी और बत्रा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च ने ऑक्सीजन खत्म होने का रेड अलार्म बजा दिया है।

हालात ये है कि ऑक्सीजन की कमी के चलते सरोज अस्पताल ने शनिवार (24 अप्रैल 2021) को 27 मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया। 200 मरीजों की क्षमता वाले सरोज हॉस्पिटल में 121 मरीज हैं, जिनमें से 116 कोरोना संक्रमित हैं।

इससे पहले शनिवार (24 अप्रैल 2021) को जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल ने दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। न्यायालय में हॉस्पिटल की ओर से वरिष्ठ वकील सचिन दत्ता ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार की अक्षमता पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के अधिकारी उस समय नदारद रहे, जब अस्पताल में मरीज ऑक्सीजन की कमी से मर रहे हैं। कोर्ट ने इसे संक्रमण की सुनामी बताते हुए कहा था कि यदि कोई भी अधिकारी ऑक्सीजन की आपूर्ति में बाधा डालता है तो उसे फाँसी पर चढ़ा देंगे।

वहीं सरोज अस्पताल प्रबंधन ने एक बयान जारी कर कहा, “ऑक्सीजन सप्लाई की अनिश्चितता के कारण हम ये घोषणा करते हैं कि अब हम लोगों को ऑक्सीजन नहीं दे सकते हैं। क्योंकि ऑक्सीजन सप्लायर हमारी जरूरतों के हिसाब से इसकी सप्लाई करने को तैयार ही नहीं है। इसलिए, आप अपने मरीज को अपनी पसंद के अस्पताल में शिफ्ट कर सकते हैं। अगर ऑक्सीजन की कमी से कोई मरीज पीड़ित है, तो यह रोगी के रिश्तेदारों की जिम्मेदारी होगी न कि अस्पताल की।​​”

अस्पताल के डायरेक्टर पीके भारद्वाज ने कहा, “हालाँकि, अस्पताल को शनिवार (24 अप्रैल 2021) दोपहर 3:30 बजे ऑक्सीजन आपूर्ति की गई है। हमने पहले कभी इस तरह की स्थिति नहीं देखी। हमने लोगों को भर्ती करना बंद कर दिया है, जो भर्ती हैं उन्हें छुट्टी दी जा रही है। हालाँकि, घोषणा पत्र जारी करने के बाद भी कोई भी मरीज या परिचारक अस्पताल से बाहर नहीं निकला है। हम सभी मिलकर इस लड़ाई को लड़ेंगे।”

बत्रा अस्पताल ने भी बंद की नई भर्तियाँ

इसी तरह, बत्रा अस्पताल ने भी शनिवार (24 अप्रैल 2021) को एक भी नए मरीज को भर्ती नहीं किया। अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ एससीएल गुप्ता ने कहा, “हमारे पास 350 मरीजों को भर्ती करने की क्षमता है और मौजूदा वक्त में हमारे पास 300 भर्ती हैं। हमने नई भर्तियों को बंद कर दिया है। ऑक्सीजन की सप्लाई शनिवार की शाम 5 बजे फिर से शुरू कर दी गई थी, लेकिन लगातार आपूर्ति नहीं होने से रविवार को संकट एक बार फिर से गहराएगा।

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भी ऑक्सीजन की कमी हो गई है। अस्पताल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ डीएस राणा ने कहा, “हर कुछ घंटों में, हमारे पास ऑक्सीजन का संकट शुरू हो जाएगा और पूरा प्रशासन केवल कॉल करने में पागल हुआ जा रहा है। लोगों को खुद से ऑक्सीजन सिलेंडर लाते देख हमें दुख होता है। वर्तमान में, हमारे पास 516 कोरोना मरीज हैं, जिसमें से 128 को अधिक से अधिक ऑक्सीजन की जरूरत है। यह अधिक समय तक नहीं चल सकेगा। हमारे कर्मचारी भी थकावट के शिकार हो रहे हैं। एक तरफ उन्होंने कोविड बेड बढ़ाए हैं, दूसरी तरफ वे पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं कर सकते हैं। हम कैसे काम करें? अगर यह एक कोविड सुनामी है और सरकार ने आपदा अधिनियम लागू किया है, तो उन्हें आपदा अधिनियम के अनुसार काम करना चाहिए। हमें तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है।”

दिल्ली के जीटीबी अस्पताल ने भी कोरोना संकट के चलते अपने बेड्स की संख्या को 900 से घटाकर 700 कर दिया है। अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा, “अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत है। हमें पूरी स्थिति की समीक्षा करनी थी। कई स्वास्थ्यकर्मी भी संक्रमित हुए हैं। सभी बातों पर विचार करने के बाद बेड की संख्या कम करने का निर्णय लिया गया है।”

शनिवार (24 अप्रैल 2021) को एम्स के आपातकालीन विभाग में भी एक घंटे के लिए सभी प्रवेश रोक दिया गया था। अस्पताल ने एक बयान में कहा कि आपातकालीन विभाग में प्रवेश को एक घंटे के लिए इसलिए रोक दिया गया था, क्योंकि कोरोना मरीजों की ऑक्सीजन की जरूरतों को देखते हुए पाइपालइनों को दुरुस्त किया जा रहा था। मौजूद वक्त में एमरजेंसी वार्ड में करीब 100 कोविड पेशेंट का इलाज चल रहा है। ये एम्स के अलग-अलग सेंटर्स में भर्ती 800 से अधिक मरीजों के अतिरिक्त हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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