Homeदेश-समाजJNU महिला प्रोफेसर का आरोप - मुस्लिम होने के कारण किया जा रहा है...

JNU महिला प्रोफेसर का आरोप – मुस्लिम होने के कारण किया जा रहा है प्रताड़ित

विश्वविद्यालय के अधिकारियों की मानें तो महिला की सैलरी विश्वविद्यालय उन्हें नहीं देता बल्कि उनकी सैलरी यूजीसी के जरिए आती थी। इसलिए यूजीसी द्वारा सैलरी रिलीज न करने के कारण उनको उनका वेतन नहीं मिला था

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ मुस्लिम महिला प्रोफेसर ने शिकायत की है कि उन्हें मुस्लिम होने के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है। जिसके बाद दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने मामले पर संज्ञान लिया और जेएनयू के रजिस्ट्रार को नोटिस भी जारी किया है

आयोग के मुताबिक प्रोफेसर ने जेएनयू प्रशासन पर उत्पीड़न का आरोप लगाने के साथ सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल एक्सक्लूजन एंड इनक्लूसिव के निदेशक पर भी उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

महिला प्रोफेसर का आरोप है कि अप्रैल 2019 से बिना कोई कारण उनका वेतन रोक दिया गया है। साथ ही उन्हें पीएचडी और एमफिल के छात्रों का सुपरवाइजर भी नहीं बनाया जा रहा है, जबकि बहुत से छात्र ऐसे हैं जो उन्हें सुपरवाइजर चुनना चाहते हैं।

महिला प्रोफेसर ने वीसी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके साथ ये सब वीसी की मिलीभगत से हो रहा है। उन्हें पिछले कुछ समय से प्रशासनिक बैठकों में भी नहीं बुलाया जा रहा है। साथ ही उन्हें उनका ऑफिशियल ई-मेल भी इस्तेमाल करने पर रोका जा रहा है।

इसके अलावा उनकी शिकायत है कि यूनिवर्सिटी स्थित आवास खाली करने के लिए भी उनपर दबाव बनाया जा रहा है। प्रोफेसर के मुताबिक उनके साथ ये सब सिर्फ़ उनके मुस्लिम होने के कारण किया जा रहा है।

इस मामले पर जेएनयू अधिकारियों ने महिला प्रोफेसर के आरोपों को खारिज किया है और बताया है, “2013 में यूजीसी के योजनाबद्ध परियोजना के तहत महिला ने जेएनयू ज्वाइन किया था, वे यहाँ स्थायी कर्मचारी नहीं हैं।” विश्वविद्यालय के अधिकारियों की मानें तो महिला की सैलरी विश्वविद्यालय उन्हें नहीं देता बल्कि उनकी सैलरी यूजीसी के जरिए आती थी। इसलिए यूजीसी द्वारा सैलरी रिलीज न करने के कारण उनको उनका वेतन नहीं मिला था, लेकिन अब जब यूजीसी ने सैलरी जारी कर दी है तो उनकों उनका वेतन दे दिया गया है।

गौरतलब है महिला प्रोफेसर इससे पहले हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में 4 साल पढ़ा चुकी हैं। उनका कहना है कि वो बहुत परेशान है क्योंकि इससे पहले भी उन्हें वेतन के लिए लड़ाई लड़नी पड़ी थी, जिसके कारण वे हाईकोर्ट तक पहुँच गई थी। बाद में उन्हें उनका वेतन मिलना शुरू हुआ था।

इस मामले पर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने जेएनयू प्रशासन को नोटिस जारी किया और उनसे 1 अगस्त तक जवाब माँगा है। आयोग का कहना है कि महिला प्रोफेसर उत्पीड़न से इतनी त्रस्त हो चुकी हैं कि उनके मन में कई बार आत्महत्या का भी ख्याल आया है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जयललिता से तृषा कृष्णन तक: कैसे तमिलनाडु की राजनीति में बार-बार निशाने पर आईं महिलाएँ

जयललिता से तृषा कृष्णन तक मामला बताता है कि तमिलनाडु की राजनीति में महिलाओं को कैसे निशाना बनाया जाता है। एक विधानसभा के अंदर का तो दूसरा राजनीतिक मंच का।

इजरायल को 99% हथियार देने वाले पश्चिमी देशों को छोड़ भारत के खिलाफ प्रोपेगैंडा फैला रहा एमनेस्टी, समझिए गाजा की आड़ में किस खेल...

भारत डिफेंस एक्सपोर्ट में तेजी से उभरता खिलाड़ी है। भारत की प्राथमिकता अपने साथ अपने मित्र देशों को सुरक्षा उपकरण मुहैया कराना है।
- विज्ञापन -