Saturday, July 2, 2022
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जिसने रचा था कानपुर हिंसा का षड्यंत्र… UP पुलिस ने उस जफर हयात हाशमी को दबोचा

जफर हयात हशामी मौलाना मुहम्मद जौहर अली फैन्स एसोसिएशन का संचालक है। इसके पहले उसका नाम  CAA-NRC के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन में भी सामने आया था। इस मामले में कानपुर के कर्नलगंज थाने में हयात जफर हाशमी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।

कानपुर हिंसा (Kanpur Voilence) मामले की साजिश रचने वाला जफर हयात हाशमी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उससे पूछताछ जारी है। हयात जफर हाशमी पर हिंसा फैलाने और लोगों को भड़काने का आरोप है। जफर हयात हाशमी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए लोगों को कानपुर में बाजार बंद करने और जेल भरो आंदोलन की अपील की थी।

जफर हयात हशामी मौलाना मुहम्मद जौहर अली फैन्स एसोसिएशन का संचालक है। इसके पहले उसका नाम  CAA-NRC के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन में भी सामने आया था। इस मामले में कानपुर के कर्नलगंज थाने में जफर हयात हाशमी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।

कानपुर में शुक्रवार को जुमे की नमाज के के बाद हिंसा भड़की। एक न्यूज डिबेट में बीजेपी की प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने कथित रुप से पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कर दी थी, जिसको लेकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग नाराज थे। इसके विरोध में मुस्लिम पक्ष ने जुलूस निकाला था। इस दौरान हिंसा भड़क गई। पुलिस ने हिंसा में शामिल 36 उपद्रवियों को हिरासत में लिया है। हिंसा की शुरुआत यतीमखाना इलाके की मुख्य सड़क और बाजार से हुई। मजहब के नाम पर सामने आए दो गुटों के बीच पहले बहस हुई। इसके बाद टकराव हुआ और फिर पथराव हुए। 

बता दें कि अवैध रूप से बने धार्मिक ढाँचे भी विवाद के महत्वपूर्ण कारण हैं। इसको लेकर उत्तर प्रदेश में समय-समय पर शिकायतें की जाती रही हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसके जरिए जमीन कब्जा करने की कोशिश की जाती हैं और कई मामलों इन ढाँचों के कारण सड़कों पर दुर्घटनाएँ होती रहती हैं।

कानपुर मामले में PFI की भूमिका और उसका इतिहास

वहीं कानपुर पुलिस कमिश्नर विजय मीणा का कहना है कि प्रशासन से बातचीत के लिए बंद के ऐलान को वापस ले लिया गया था, लेकिन शुक्रवार को नमाज के बाद अचानक हिंसा फैल गई। एमएमए जौहर फैन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हयात जफर हाशमी सहित कुछ स्थानीय नेताओं ने बंद का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि इस घटना में शामिल किसी भी साजिशकर्ता या संगठन को बख्शा नहीं जाएगा।

माना जा रहा है कि इस हिंसा में PFI की भी भूमिका हो सकती है, क्योंकि ऐसे मामलों को सांप्रदायिक रंग देने का उसका इतिहास रहा है। पुलिस कानपुर मामले में इस ऐंगल से भी जाँच कर रही है। पुलिस जाँच कर रही है कि बंद बुलाने वाले संगठनों का PFI या किसी अन्य कट्टरपंथी संगठनों से संपर्क तो नहीं है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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