Sunday, August 1, 2021
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सिस्टर अभया की हत्या कर कुएँ में फेंकने वाले पादरी-नन को पेरोल, हाई कोर्ट ने केरल सरकार से माँगा जवाब

सिस्टर अभया की लाश कुएँ से मिली थी। उसकी मौत के 28 साल बाद तिरुवनंतपुरम की सीबीआई अदालत ने 23 दिसंबर 2020 को पादरी फादर थॉमस और नन सिस्टर सेफी को हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

सिस्टर अभया हत्याकांड के दोषियों को पेरोल पर रिहा करने को लेकर केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब माँगा है। जस्टिस ज़ियाद रहमान एए और के विनोद चंद्रन की डिवीजन बेंच ने इससे जुड़ी याचिका पर सोमवार (जुलाई 12, 2021) को सुनवाई की। याचिका में दोषियों को दी गई पैरोल तत्काल वापस करने की अपील की गई है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से बताया गया कि दोषियों की आयु वर्ग के सभी व्यक्तियों को पेरोल पर रिहा किया गया था। कोट्टयम के सेंट पायस कॉन्वेंट में रहने वालीं सिस्टर अभया की लाश कुएँ से मिली थी। उसकी मौत के 28 साल बाद तिरुवनंतपुरम की सीबीआई अदालत ने 23 दिसंबर 2020 को पादरी फादर थॉमस और नन सिस्टर सेफी को हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मई में इन्हें पेरोल पर रिहा कर दिया गया था। इसे अवैध बताते हुए कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता का पक्ष एडवोकेट पिराप्पनकोडे सुधीर ने रखा।

21 वर्षीय सिस्टर अभया का शव 27 मार्च 1992 को सेंट पायस कॉन्वेंट (Pious X Convent) के कुएँ में मिली थी। वैसे यह पहला मामला नहीं है जब केरल की वामपंथी सरकार पर चर्च के अपराधों और गुनहगारों के प्रति नरमी दिखाने के आरोप लगे हैं। पिछले दिनों फ्रांसिस्कन क्राइस्ट कॉन्ग्रेगेशन (FCC) द्वारा सिस्टर लूसी कलापुरा को बर्खास्त करने के कुछ दिनों के बाद ही वेटिकन ने उन्हें बहुत ही तुच्छ आरोप लगाकर चर्च से निष्कासित कर दिया। सिस्टर लूसी उस पाँच ननों में से एक थीं, जो बिशप फ्रेंको मुलक्कल पर रेप का आरोप लगाने वाली नन के साथ खड़ी थीं।

इससे कुछ दिनों पहले आरोपित बिशप को नोटिस जारी करने के बाद केरल पुलिस के एक अधिकारी का तत्काल तबादला कर दिया गया था। 19 अक्टूबर को पीड़िता ने मलयालम यूट्यूब चैनल क्रिश्चियन टाइम्स के ख़िलाफ़ कुराविलंगद पुलिस स्टेशन में शिक़ायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि बिशप फ्रैंको के इशारे पर चैनल उन्हें परेशान कर रहा है। कुराविलंगद पुलिस ने इस मामले का जाँच वैकोम पुलिस को सौंप दी थी।

वैकोम पुलिस स्टेशन के सब इंस्पेक्टर मोहनदास ने फ्रैंको को एक नोटिस जारी कर पूछा कि पीड़िता की शिक़ायत पर क्यों नहीं उनकी ज़मानत रद्द कर दी जाए। द न्यूज़ मिनट ने बताया था कि नोटिस जारी करने के बाद पुलिस अधिकारी का तबादला कोट्टायम अपराध शाखा में कर दिया गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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