Tuesday, July 27, 2021
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सिस्टर लूसी को वेटिकन ने कविता लिखने व कार चलाने पर चर्च से किया बर्खास्त: एक नन की संघर्ष की कहानी

लूसी ने चर्च के पादरियों की ओर यौन शोषण का इशारा करते हुए एक संस्मरण लिखा था, जिससे वेटिकन भी नाराज था। जहाँ तक कार खरीदने के अपराध के आरोप हैं, सिस्टर लूसी ने कार खरीदने की अनुमति माँगी थी, लेकिन उसे ठुकरा दिया गया था।

फ्रांसिस्कन क्राइस्ट कॉन्ग्रेगेशन (FCC) द्वारा सिस्टर लूसी कलापुरा को बर्खास्त करने के कुछ दिनों के बाद ही वेटिकन ने उन्हें बहुत ही तुच्छ आरोप लगाकर चर्च से निष्कासित कर दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई। सिस्टर लूसी उस पांच ननों में से एक थीं, जो बिशप फ्रेंको मुलक्कल पर रेप का आरोप लगाने वाली नन के साथ खड़ी थीं।

पूर्व नन लूसी 17 साल की कमसिन उम्र में एफसीसी में शामिल हुई थीं। हालाँकि, चर्च का आरोप है कि इतने दिनों में उन्होंने बहुत-से ‘अपराध’ किए हैं, जिनमें कार खरीदना और बिना अनुमति के कविताएँ प्रकाशित करना शामिल हैं। कथित तौर पर अपना ‘प्रतिज्ञा’ तोड़ने के लिए सम्मन दिए जाने के बावजूद सिस्टर लूसी अपने फैसले पर अडिग रहीं। उन्होंने आज्ञा का उल्लंघन करते हुए सलवार कुर्ता के लिए अपनी नन की आदत को भी त्याग दिया। कैथोलिक चर्च के पाखंड की ओर इशारा करते हुए लूसी कहती हैं कि नन के विपरीत पादरियों को सामान्य पोशाकों को पहनने की अनुमति थी।

Screengrab of the report by The Times of India

लूसी ने चर्च के पादरियों की ओर यौन शोषण का इशारा करते हुए एक संस्मरण लिखा था, जिससे वेटिकन भी नाराज था। जहाँ तक कार खरीदने के अपराध के आरोप हैं, सिस्टर लूसी ने कार खरीदने की अनुमति माँगी थी, लेकिन उसे ठुकरा दिया गया था। हालाँकि, वह एक सफेद ऑल्टो खरीदकर लाईँ और ड्राइविंग स्कूल चलाने वाली एक महिला से ड्राइविंग भी सीखी। सिस्टर लूसी ने तर्क दिया था, “किराए की कारों में सिस्टर्स दिन-रात पुरुष चालकों के साथ यात्रा करती हैं। क्या यह अधिक सुरक्षित नहीं होगा कि नन ही गाड़ी चलाए?” 

उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान आपातकालीन सेवाएँ प्रदान करने और लॉकडाउन के प्रबंधन में पुलिस की सहायता करने के लिए कार का रखना लाभदायक सिद्ध हुआ। हालाँकि, कार रखने का औचित्य फ्रांसिस्कन क्राइस्ट कॉन्ग्रिगेशन (FCC) को संतुष्ट नहीं कर सका। इसका परिणाम यह हुआ कि चर्च ने उन्हें बर्खास्त कर दिया और पिछले सप्ताह वेटिकन ने भी अपील को ठुकरा दिया।

लेकिन, एक दृढ़ निश्चयी सिस्टर चर्च की जबरदस्ती वाली इस रणनीति के आगे झुकने को तैयार नहीं है। लूसी ने कहा, “मेरे कमरे के अलावा, उन्होंने मुझे कॉन्वेंट के अन्य दूसरी जगहों पर जाने से मना कर दिया है। वे मुझसे बात नहीं करते। फिर भी, मैं अपनी लड़ाई जारी रखूँगी और मैं इस कॉन्वेंट को नहीं छोड़ूँगी।” इस पूर्व नन ने अफसोस जताया कि उसे अपने साथी ननों द्वारा ‘अत्यधिक अलगाव’ का सामना करना पड़ता है। हालाँकि, सिस्टर लूसी को ‘Save our Sisters’ फोरम के संयुक्त-संयोजक रिज्जू कंज्जूकरन का समर्थन मिला है। 

सिस्टर लूसी को कार्यकर्ताओं और चर्च सुधारकों का समर्थन मिला

ऐक्टिविस्ट का कहना है, “आज्ञाकारिता की प्रतिज्ञा’ का यह मतलब नहीं है कि किसी को कुछ भी और सब कुछ मानना ​​चाहिए। आज्ञाकारिता और दासता के बीच अंतर है।” उनके खिलाफ कार्रवाई नन के प्रोटेस्ट में भाग लेने के बाद तेज हो गई थी। विडंबना यह है कि बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किए गए फ्रेंको मुलक्कल और सीनियर सेफी और फादर थॉमस कोट्टूर, जिन्हें अभया हत्याकांड में सीबीआई अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, सभी अभी भी क्रमशः बिशप, नन और प्रीस्ट हैं।

रिज्जू कंज्जूकरन बताते हैं कि सिस्टर लूसी को आम लोगों का जबरदस्त समर्थन प्राप्त है। चर्च ‘सुधारक’ इंदुलेखा जोसेफ ने कहा कि सिस्टर लूसी की तरह ननों में भीतर की व्यवस्था से लड़ने का साहस नहीं है। पूर्व नन के लिए आने वाली चुनौतियों के बारे में बोलते हुए जोसेफ ने कहा, “यदि कोई नन कॉन्वेंट लाइफ से बाहर आने का फैसला करती है या उसे निष्कासित कर दिया जाता है तो वह वर्षों तक की अपनी सेवा के किसी भी लाभ का पात्र नहीं होगी।” 

सिस्टर लूसी को कॉन्वेंट छोड़ना ही होगा: चर्च कार्यकर्ता

फ्रांसिस्कन क्राइस्ट कॉन्ग्रिगेशन (FCC) से सिस्टर लूसी को बर्खास्त किए जाने के बाद कई लोगों ने कॉन्वेंट परिसर में उनके रहने पर आपत्ति जताई है। कैनेडी कार्तम्बिंकलायटल नाम की एक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि पूर्व नन ने ‘निराधार आरोपों’ के आधार पर अपने संस्मरण में कई पादरियों और ननों के नाम पर धब्बा लगाया है। उन्होंने दावा किया कि वह अपनी अनुशासनहीनता को फ्रेंको मुद्दे से जोड़कर उसका राजनीतिकरण कर रही हैं।

कैसे सिस्टर लूसी बनी बदनाम करने के अभियान का निशाना?

ध्यान देने की बात है कि बलात्कार के आरोपी बिशप फ्रेंको मुलक्कल के खिलाफ प्रदर्शन को समर्थन देने के कारण चर्च ने सिस्टर लूसी को बदनाम करने का एक अभियान छेड़ रखा है। सिस्टर लूसी को अगस्त 2019 में अनुशासनहीनता और ‘नियमों के उल्लंघन में’ अपनी जीवन शैली के लिए एक संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहने के आधार पर फ्रांसिस्कन क्लैरिस्ट कांग्रेगेशन (FCC) से निष्कासित कर दिया गया था। कुछ दिनों के बाद सिस्टर लूसी ने केरल के वेल्लामुंडा पुलिस में वायनाड जिले के मनंतवाडी में कराक्कमाला में एक कॉन्वेंट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

उन्होंने कॉन्वेंट पर अवैध रूप से बंधक बनाने का आरोप लगाया था। सिस्टर लूसी ने अपनी शिकायत में कहा था कि अवैध बंधन के कारण वह पास के एक चर्च में पवित्र सभा में शामिल नहीं हो पा रही थीं। उसने पाया कि कॉन्वेंट के गेट बाहर से बंद थे जिसके बाद उन्होंने पुलिस को फोन किया, जिसने गेट खोलने में मदद की। कॉन्वेंट ने बाद में उन्हें इसके खिलाफ दायर दो मामलों को वापस लेने और अगर वह वहाँ रहना चाहती थीं तो बिना शर्त माफी माँगने के लिए के लिए मजबूर किया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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