राजीव कुमार के खिलाफ CBI ने जारी किया लुकआउट नोटिस, नहीं छोड़ सकते देश

राजीव कुमार घोटाले की जाँच राज्य पुलिस के हाथ रहते एसआईटी के मुखिया थे। बाद में उन्हें 2016 में कोलकाता पुलिस का प्रमुख बना दिया गया था। उन पर आरोप है कि सीबीआई को बरामद कॉल रिकॉर्डिंग सौंपने से पहले उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण अंश मिटा दिए थे।

सीबीआई ने शारदा चिट फंड घोटाले में राजीव कुमार पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। एजेंसी ने उनके खिलाफ एक साल की वैधता वाला लुकआउट नोटिस जारी किया है, जिसके बाद राजीव कुमार हवाई मार्ग से देश छोड़कर नहीं जा सकते, और हर एयरपोर्ट पर उनके देखे जाने की सूचना देनी होगी।

1989 बैच के पुलिस अधिकारी कुमार ₹2,500 करोड़ के घोटाले की जाँच की पहली टीम, पश्चिम बंगाल पुलिस की एसआईटी के अध्यक्ष थे। बाद में सीबीआई ने मामले की जाँच अपने हाथ में ले ली थी और पाया था कि राजीव कुमार ने अहम सबूतों वाले और मामले के संदिग्धों से जब्त कई लैपटॉप और फ़ोन अपनी हिरासत से रिलीज़ कर दिए थे। कुमार से पूछताछ करने गई सीबीआई टीम के कई लोगों को भी इस साल की शुरूआत में पश्चिम बंगाल की पुलिस ने हिरासत में ले लिया था (उस समय राजीव कुमार कमिश्नर के पद पर कायम थे)। इसको लेकर लोकसभा निर्वाचन के ठीक पहले केंद्र और राज्य सरकार के बीच गंभीर टकराव के आसार बन गए थे।

सहयोग नहीं कर रहे कुमार, सॉलिसिटर जनरल का आरोप

सीबीआई की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि राजीव कुमार सरकार के साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं। वह न केवल रौब झाड़ रहे हैं बल्कि सवालों को भी टालने और बात को घुमाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें 24 मई यानि (बीते हुए) कल तक गिरफ़्तारी से छूट मिली हुई थी। उन्होंने जब सुप्रीम कोर्ट से छूट की मियाद आगे बढ़ाने की गुज़ारिश की थी तो उन्हें अदालत ने इसके लिए कोलकाता उच्च न्यायालय जाने के लिए कह दिया था। पिछले महीने ही शीर्ष अदालत ने सीबीआई से भी अपने आरोपों के पक्ष में सबूत पेश करने के लिए कहा था ताकि सुप्रीम कोर्ट को यह तसल्ली हो सके कि राजीव कुमार की गिरफ्तारी राजनीतिक कारणों से नहीं हो रही।

क्या है मामला  

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सारधा घोटाले में सीबीआई के अनुसार सारधा समूह की कंपनियों ने ऊँचे रिटर्न का लालच देकर लाखों निवेशकों के पैसे ऐंठ लिए थे। मामले की सीबीआई जाँच का आदेश सुप्रीम कोर्ट से मिलने के बाद जब एजेंसी ने पड़ताल शुरू की तो पाया कि घोटाले को अंजाम देने के लिए स्कीम ऑपरेटरों की कथित तौर पर नेताओं और पुलिस विभाग में भी साथ-गाँठ थी। सारधा के संस्थापक सुदीप्तो सेन ने भी सीबीआई को 2013 में लिखे गए इकबालिया खत में पत्रकारों, नेताओं, पुलिस वालों आदि को रिश्वत देने के बात कबूली थी

राजीव कुमार घोटाले की जाँच राज्य पुलिस के हाथ रहते एसआईटी के मुखिया थे। बाद में उन्हें 2016 में कोलकाता पुलिस का प्रमुख बना दिया गया था। उन पर आरोप है कि सीबीआई को बरामद कॉल रिकॉर्डिंग सौंपने से पहले उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण अंश मिटा दिए थे। इसके अलावा उन पर सुदीप्तो सेन का फोन उसे लौटा देने का भी आरोप है

चार्ज लेने दिल्ली भी नहीं पहुँचे राजीव कुमार   

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली में भाजपा और तृणमूल कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसा के बाद पश्चिम बंगाल सीआईडी के एडीजी पद से हटाए गए राजीव कुमार को दिल्ली में गृह मंत्रालय में तैनाती मिली थी। वहाँ भी वह चार्ज लेने नहीं पहुँचे थे और यह मामला चर्चा में आ गया था। बाद में सफाई आई कि कुछ निजी कारणों के चलते वह चार्ज नहीं ले पाए

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