Homeदेश-समाजतमिलनाडु: होटल ने नॉनवेज डिश का रखा ब्राह्मण नाम, विरोध होने पर माँगी ...

तमिलनाडु: होटल ने नॉनवेज डिश का रखा ब्राह्मण नाम, विरोध होने पर माँगी माफी

मिलागु नाम के होटल ने अपनी चिकन डिश का नाम 'कुंबाकोनम अय्यर चिकन' रखा था, जो ब्राह्मण समुदाय के लोगों को अखर गया। कुंबाकोनम अय्यर एक ब्राह्मण जाति है।

तमिलनाडु के मदुरई स्थित एक होटल को चिकन डिश का नाम रखना इतना महँगा पड़ गया कि उन्हें उसके लिए ब्राह्मण समुदाय से माफ़ी माँगनी पड़ी। दरअसल, मिलागु नाम के होटल ने अपनी चिकन डिश का नाम ‘कुंबाकोनम अय्यर चिकन’ रखा था, जो ब्राह्मण समुदाय के लोगों को अखर गया।

जानकारी के मुताबिक ब्राह्मण समुदाय को इस बात से आपत्ति थी क्योंकि ‘कुंबाकोनम अय्यर’ एक ब्राह्मण जाति है और उसका प्रयोग एक नॉनवेज डिश के साथ किया जा रहा है।

अपना विरोध दर्ज करने के लिए ब्राह्मण समुदाय के लोगों ने होटल के अधिकारियों से मिलकर बात की और डिश के नाम पर आपत्ति जताई। जिसके बाद होटल ने अपनी गलती मानी और इस पर माफ़ी माँगते हुए होटल की ओर से बयान जारी किया कि वे इस डिश का नाम बदल देंगे।

होटल मिलागु ने लिखा, “ब्राह्मण समुदाय के प्रतिनिधी हमसे मिले और ‘कुंबाकोनम अय्यर चिकन’ के नाम को लेकर गंभीर मुद्दा उठाया। हम उनसे माफ़ी माँगते हैं।”

होटल अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि वे इसके बाद सोशल मीडिया पर मौजूद विज्ञापनों को हटा लेंगे और साथ ही नाम को भी डिश से अलग करेंगे।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -