मालेगाँव ब्लास्ट: विशेष अदालत ने साध्वी प्रज्ञा समेत दो अन्य को पेशी से छूट दी

भोपाल से बीजेपी की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा और मिर्जापुर से निर्दलीय उम्मीदवार सुधाकर चतुर्वेदी ने अपनी याचिकाओं में चुनाव के दौरान अपनी व्यस्तताओं का हवाला दिया था। इनके अलावा कर्नल पुरोहित ने अपनी कुछ व्यक्तिगत परेशानियाँ बताई थीं।

मालेगाँव ब्लास्ट मामले में सुनवाई कर रही NIA की विशेष अदालत ने मामले के आरोपितों प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ़्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित और सुधाकर चतुर्वेदी को कोर्ट में पेशी से छूट दे दी है। इन तीनों ने निजी समस्याओं और परेशानियों का ज़िक्र करते हुए अदालत से रियायत की माँग की थी।

ख़बर के अनुसार, भोपाल से बीजेपी की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा और मिर्जापुर से निर्दलीय उम्मीदवार सुधाकर चतुर्वेदी ने अपनी याचिकाओं में चुनाव के दौरान अपनी व्यस्तताओं का हवाला दिया था। इनके अलावा कर्नल पुरोहित ने अपनी कुछ व्यक्तिगत परेशानियाँ बताई थीं। कोर्ट ने इन तीनों को पेशी से छूट तो दी ही इसके अलावा आरोपियों के वकीलों को विस्फ़ोट वाली जगह पर जाने की अनुमति भी दी।

हाल ही में, मुंबई की विशेष NIA कोर्ट ने मालेगाँव ब्लास्ट के आरोपितों के ख़िलाफ़ सख़्त रवैया अपनाया था। दरअसल, कोर्ट का यह सख़्त रवैया आरोपितों के कोर्ट में उपस्थित न होने के लिए था। पिछले काफ़ी समय से आरोपित कोर्ट में लगातार अनुपस्थित रहे थे, इसलिए कोर्ट ने सभी आरोपितों को सुनवाई के दौरान सप्ताह में एक बार कोर्ट रूम में हाज़िरी लगाने का निर्देश दिया था।

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ख़बर के अनुसार, पिछले साल सितंबर में कर्नल पुरोहित पर आरोप तय करने पर स्टे की माँग ख़ारिज कर दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की बेंच ने मालेगाँव ब्लास्ट मामले की SIT से जाँच कराने की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि वो अपनी इस याचिका को ट्रायल कोर्ट में ही दाखिल करें।

इससे पहले साध्वी प्रज्ञा ठाकुर द्वारा चुनाव लड़ने के ख़िलाफ़ भी एनआईए कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने संबंधी याचिका को ख़ारिज कर दिया था। इस याचिका पर कोर्ट ने फ़ैसला लिया था कि वर्तमान में किसी के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की ताक़त हमारे पास नहीं है। किसे चुनाव लड़ना है और किसे नहीं, इस बात का निर्णय निर्वाचन चुनाव आयोग करेगा। ऐसी सूरत में मालेगाँव ब्लास्ट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई जा सकती, इसलिए कोर्ट इस याचिका को ख़ारिज करती है। 

ग़ौरतलब है कि मालेगाँव में 29 सितंबर 2008 को एक मस्जिद के पास विस्फोट में 6 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे।

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"1985 में राम जन्मभूमि न्यास बना और 1989 में केस दाखिल किया गया। इसके बाद सोची समझी नीति के तहत कार सेवकों का आंदोलन चला। विश्व हिंदू परिषद ने माहौल बनाया जिसके कारण 1992 में बाबरी मस्जिद गिरा दी गई।"

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