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SC की शरण में भगोड़ा विजय माल्या, संपत्ति जब्त करने पर रोक की लगाई गुहार

खुद को आर्थिक भगोड़ा अपराधी घोषित करने के फैसले को माल्या ने चुनौती दे रखी है। उसका कहना है कि जब तक हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं होती, एजेंसियाँ उसकी निजी संपत्तियों को कुर्क न करें।

जैसे-जैसे शिकंजा कसता जा रहा है भगोड़े कारोबारी विजय माल्या की नींद उड़ती जा रही है। बैंकों का 9 हजार करोड़ रुपया लेकर देश से भागे माल्या ने अब सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है। उसने शीर्ष अदालत से अपनी और रिश्तेदारों की संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की अपील की है।

अपनी याचिका में उसने कहा है कि केवल किंगफिशर कंपनी से संबंधित संपत्ति ही कुर्क की जाए और उसकी निजी और पारिवारिक संपत्ति जब्त न की जाए। याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार (जुलाई 29, 2019) को सुनवाई करेगा।

माल्या की इस अपील को बॉम्बे हाई कोर्ट ने 11 जुलाई को ख़ारिज कर दिया था।

इस समय ब्रिटेन में प्रत्यर्पण की कार्यवाही का सामना कर रहे माल्या को 5 जनवरी, 2019 को विशेष पीएमएलए अदालत ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था। इसके बाद उसकी संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई शुरू की गई थी। खुद को आर्थिक भगोड़ा अपराधी घोषित करने के फैसले को माल्या ने चुनौती दे रखी है। उसका कहना है कि जब तक हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं होती, एजेंसियाँ उसकी निजी संपत्तियों को कुर्क न करें।

63 साल के विजय माल्या ने भारतीय बैंकों से 9,000 करोड़ रुपए का लोन लिया था और उसे चुका नहीं पाने के कारण 2 मार्च, 2016 को देश छोड़ दिया था। भारत ने 2017 में प्रत्यर्पण की मांग की थी और फिलहाल वह जमानत पर बाहर है। ब्रिटेन के हाई कोर्ट में प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ उसकी अर्जी पर अगले साल 11 फरवरी से सुनवाई होगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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