194 लोगों ने की जिसकी ‘मॉब लिंचिंग’ वह 3 महीने बाद ज़िंदा लौटा: कठघरे में मीडिया और पुलिस

कृष्णा के घर लौटने से पुलिस पसोपेश में है। मीडिया के दावों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर किस आधार पर 10 अगस्त को उसकी हत्या के आरोप में 44 लोगों के खिलाफ नामजद और 150 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था?

जिसकी मॉब लिंचिंग को लेकर मीडिया ने नकारात्मकता फैलाई, वो ज़िंदा वापस लौट आया। घटना पटना स्थित नौबतपुर के महमदपुर गाँव की है। यहाँ एक ऐसा व्यक्ति सकुशल वापस लौट आया, जिसे पुलिस एवं प्रशासन ने मृत घोषित कर दिया था। इस व्यक्ति का नाम कृष्णा है। अगस्त में ख़बर आई थी कि बच्चा चोर समझ कर उसे भीड़ ने पीट पीटकर मार डाला। इसके बाद गिरोह विशेष का मीडिया हरकत में आ गया था। स्क्रॉल ने एक लम्बी-चौड़ी ग्राउंड रिपोर्ट कर के बताया था कि किस तरह से देश में मॉब लिंचिंग की घटनाएँ बढ़ गई हैं और ये चिंता का विषय है।

उस समय ख़बर आई थी कि मृतक की पत्नी ने लाश के हाथ में गोदना देख कर अपने पति की पहचान की थी। इसके अलावा एक टूटे हुए दाँत को देख कर शव की पहचान हुई थी, क्योंकि चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। अब जब कृष्णा लौट आया है, उसके हाथ में कोई गोदना नहीं है। इससे पुलिस की कार्यवाही पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब मॉब लिंचिंग की ख़बर आई थी, तब परिजनों ने ख़ुद पुलिस से संपर्क किया था। शव क्षत-विक्षत हो चुका था और उससे दुर्गन्ध आ रही थी। अब पुलिस इस बात को लेकर माथापच्ची कर रही है कि ‘मृतक’ लौट आया है तो मरने वाला कौन था?

स्क्रॉल ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कारवाँ-ए-मोहब्बत नामक संगठन ने ‘कृष्णा की मॉब लिंचिंग’ की ख़बर के बाद उसके परिवार के लिए फंड्स जुटाए थे। लोगों से चंदा लेकर रुपए इकट्ठे किए गए थे। अनवारुल हक़ और इब्राहम नामक एक्टिविस्ट्स इस मामले में काफ़ी सक्रिय रहे थे। इस पूरे मामले की सच्चाई तब उजागर हुई जब कृष्णा को उसके एक रिश्तेदार ने कन्याकुमारी में देखा। कृष्णा के श्राद्ध के बाद कन्याकुमारी गया यह रिश्तेदार उसे देख हतप्रभ रह गया।

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रिश्तेदारों का कहना है कि कृष्णा 3-4 बार कन्याकुमारी जाकर आ चुका था। वह वहाँ काम करता था और कभी-कभी दूसरा काम खोजने जाता था। वह अगस्त महीने में घर लौटा और फिर बिना किसी को बताए वापस कन्याकुमारी चला गया। परिजनों ने उसके लापता होने की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने एक शव परिवार को सौंप कर दावा किया कि यही कृष्णा है। इसके बाद मीडिया को मसाला मिला और मॉब लिंचिंग की बात फैलाई गई। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर आक्रोश जताया गया, न्यूज़ पोर्टल्स में ओपिनियन लिखे गए और इसे ‘मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं’ के क्रम में रख दिया गया।

अब कृष्णा के वापस लौट आने से मीडिया और बिहार पुलिस, दोनों की ही पोल खुलती नज़र आ रही है। वहीं परिवार ख़ुश है। जिस रुदी देवी के माथे का सिन्दूर पोछ दिया गया था, अब वो फिर से सिन्दूर लगा रही हैं। एक और आश्चर्यजनक बात ये है कि 10 अगस्त को इस मामले में जो केस दर्ज किया गया था, उसमें 44 नामजद और 150 अज्ञात आरोपित थे। तो क्या 194 लोगों ने जिसे मिल कर मार डाला, उसके ज़िंदा लौट आने के बाद पुलिस और मीडिया पर सवाल खड़े नहीं होते?

वहीं, अब पुलिस को इस बात की टेंशन है कि जिस व्यक्ति की पहचान कृष्णा के रूप में हुई थी, उसे जलाए जाने के बाद उससे जुड़े सभी साक्ष्य भी चले गए हैं। ऐसे में उसकी पहचान कैसे हो पाएगी? वो कौन था? कैसे मरा? इन सभी सवालों के जवाब आने बाकी हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस रिपोर्ट में क्या कृष्णा की शारीरिक बनावट और लाश के डील डॉल में कोई अंतर दिखा भी या नहीं? या फिर सिर्फ़ खानापूर्ति की गई, जिससे मीडिया को एक बड़ा मसाला मिल गया?

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