Homeदेश-समाजएक महीने बाद मेघालय की कोयला खदान से निकाला गया पहला शव, 14 मज़दूरों...

एक महीने बाद मेघालय की कोयला खदान से निकाला गया पहला शव, 14 मज़दूरों की तलाश जारी

इस घटना के 34 दिन बीतने के बाद बचाव एवं राहत कार्यों में जुटे बलों को 200 फीट की गहराई में एक मज़दूर का शव बरामद हुआ है जिससे बाकी मज़दूरों को जीवित निकालने की उम्मीद को झटका लगा है।

मेघालय के पूर्वी जयंतिया पर्वतीय ज़िले की एक कोयला खदान में 13 दिसंबर 2018 को 15 मज़दूर लितेन नदी का पानी भर जाने की वजह से वहीं फँस गए थे। इस घटना के बाद से ही एनडीआरएफ, भारतीय नौसेना और वायुसेना के जवान बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।

इस घटना के 34 दिन बीतने के बाद बचाव एवं राहत कार्यों में जुटे बलों को 200 फीट की गहराई में एक मज़दूर का शव बरामद हुआ है। इससे मज़दूरों को जीवित निकालने की उम्मीद में चलाए जा रहे बचाव अभियान को झटका लगा है। इस शव के मिलने के बाद खदान में फँसे बाकी मज़दूरों के जीवित होने में भी संदेह की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

इस पूरे बचाव अभियान में भारतीय वायु सेना, भारतीय नौसेना के गोताख़ोर और एनडीआरएफ (नैशनल डि़जास्टर रिस्पांस फोर्स) की टीम कार्य पर जुटी हुई है। इस पूरे अभियान में ओडिशा फायर सेफ्टी टीम के साथ पंप और ज़रूरत की वस्तुओं का इंतज़ाम कराने वाली एक निजी कंपनी किर्लोस्कर की टीम भी मौके पर काम कर रही है।

गत सप्ताह इस मामले पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार से कहा कि अवैध कोयला खदान में फँसे हुए मज़दूरों को बचाने के लिए किए जा रहे प्रयास बिलकुल भी संतोषजनक नहीं हैं। आपको बता दें कि जिस खदान में ये मज़दूर काम कर रहे थे वो रैट होल माइनिंग की प्रक्रिया से अवैध रूप से खनन की जाने वाली खदान थी जिस पर मेघालय में प्रतिबंध लगा हुआ है।

मेघालय की जयंतिया पहाड़ियों में बहुत सी कोयला खदानों में गैरकानूनी रूप से खनन हो रहा है। पहाड़ी इलाके पर होने की वजह से यहाँ तक मशीनों को ले जाने से बचा जाता है और मज़दूरो की मदद से कोयला निकाला जाता है। इस प्रक्रिया को रैट होल माइनिंग का नाम दिया जाता है क्योंकि जिस तरह चूहे ज़मीन में गड्ढा करते हैं उसी तरह इन खदानों में काम करने के लिए मज़दूर लेट कर घुसते हैं। ऐसे कार्यों के लिए बच्चों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है जिसकी वजह से कई NGO ऐसे कार्य करवाने वालों के ऊपर बाल मज़दूरी का भी आरोप लगा चुके हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

12 वर्ष पहले गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर, फिर देश के सबसे बड़े सूबे के CM: जनता तक पहुँच और समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया –...

योगी आदित्यनाथ की गोरखनाथ पीठाधीश्वर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक की यात्रा, विरासत को आगे बढ़ाने से लेकर विकसित होते UP की पूरी कहानी।

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।
- विज्ञापन -