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तमिलनाडु में बिहारी मजदूर पर हमला, भीड़ ने बुरी तरह पीटा: उत्तर भारतीयों पर हमले की बढ़ रही घटनाओं पर पुलिस बोली – लोग अफवाहों पर ध्यान ना दें

सबसे पहले 19 फरवरी 2024 को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में ऐसी ही घटना सामने आई थी। आईटी कंपनी में काम करने वाले 25 साल के एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को अपहरणकर्ता होने के संदेह में भीड़ ने पकड़ लिया था। इसके बाद उसे एक लैंप-पोस्ट से बाँधकर उसके कपड़े उतार दिए थे और पिटाई की थी। वह शख्स शहर के एक भोजनालय से खाना खाकर लौट रहा था।

तमिलनाडु में मंगलवार (12 मार्च 2024) को भीड़ द्वारा बिहार के एक प्रवासी श्रमिक पर हमला करने का मामला सामने आया। श्रमिक वीडियो कॉल पर बात करता हुआ सड़क से जा रहा था। इसी दौरान वहाँ के लोगों ने उसे अपहरणकर्ता समझकर पकड़ लिया और जमकर उसकी पिटाई कर दी। यह पाँचवाँ ऐसा मामला है, जहाँ किसी प्रवासी श्रमिक को अपहरणकर्ता के संदेह में भीड़ द्वारा पीटा गया है।

दरअसल, उसे वीडियो कॉ़ल पर बातें करते हुए देख कुछ लोगों ने उसे पकड़ लिया। इसी दौरान आसपास के और भी इकट्ठा हो गए। भीड़ उससे उसके बारे में और उसके ठिकाने के बारे में पूछताछ करने लगी। कहा जा रहा है कि श्रमिक नशे में था। या तो नशे के कारण या फिर भाषा के कारण वह जवाब नहीं दे पा रहा था।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान स्थानीय लोगों ने उसका फोन माँगा तो उसने देने से इनकार कर दिया और फोन को स्विच ऑफ कर दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इतने पर ही भीड़ ने उसे अपहरणकर्ता समझ लिया और उसे पीटने लगी। उस मजदूर को जमकर पीटने के बाद भीड़ ने उसे स्थानीय पुलिस को सौंप दिया।

तमिलनाडु पुलिस ने उस व्यक्ति की पहचान एक श्रमिक के रूप में की, जो बिहार से आकर यहाँ काम कर रहा था। जाँच में पता चला कि वह शख्स अपने रिश्तेदार के साथ वीडियो कॉल पर बाते करते हुए जा रहा था। उसने इस डर से अपना मोबाइल फोन ऑफ कर दिया कि भीड़ उसका मोबाइल छिनने की कोशिश कर रही है।

तमिलनाडु पुलिस ने भीड़ के इस दावे को खारिज कर दिया कि वह श्रमिक अपहरणकर्ता है। पुलिस ने आखिरकार उसे रिहा कर दिया। इसके साथ ही पुलिस ने स्थानीय लोगों से अनुरोध किया कि वे उत्तर भारत के लोगों द्वारा राज्य में बच्चों के अपहरण का प्रयास करने की झूठी बातों में विश्वास ना करें।

इससे पहले 6 मार्च 2024 को तमिलनाडु के कृष्णगिरि जिले में एक महिला और उसके बच्चे का अपहरण करने की कोशिश के संदेह के जुटी भीड़ ने पाँच मजदूरों पर हमला कर दिया था। 50 से अधिक लोगों की भीड़ के इस हमले में ये मजदूर बुरी तरह घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ये सभी असम के रहने वाले थे।

ऐसी ही एक घटना को 2 मार्च 2024 को भी सामने आई थी। तमिलनाडु के तिरुवल्लूर के परिकापातु गाँव में भीड़ ने एक प्रवासी श्रमिक को अपहरणकर्ता समझकर उस पर हमला कर दिया था। वह आदमी गाँव से गुजर रहा था और सड़क पर कुछ बच्चों से बात कर रहा था। इसी दौरान उसके अपहरणकर्ता होने की अफवाह पूरे गाँव में फैल गई।

अफवाह फैलते ही भीड़ इकट्ठा हो गई और उसे घेर लिया। इसके बाद भीड़ ने उस पर हमला कर दिया था। इस हमले में उसके चेहरे और कंधे पर चोटें आई थीं। बाद में उसे एक मंदिर के अंदर बंद कर दिया गया था और पुलिस को सूचित कर दिया गया था। जाँच में पता चला कि इलाके में सोशल मीडिया के जरिए अपहरण को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही थीं।

इससे भी पहले 19 फरवरी 2024 को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से ऐसी एक घटना सामने आई थी। आईटी कंपनी में काम करने वाले 25 साल के एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को अपहरणकर्ता होने के संदेह में भीड़ ने पकड़ लिया था। इसके बाद उसे एक लैंप-पोस्ट से बाँधकर उसके कपड़े उतार दिए थे और पिटाई की थी। वह शख्स शहर के एक भोजनालय से खाना खाकर लौट रहा था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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