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मज़हब के आगे PM मोदी की अपील बेअसर: गोरखपुर में आम दिनों की तरह ही खुले में पढ़ी गई नमाज

कोरोना को देखते हुए उम्मीद थी कि आज मुस्लिम समुदाय के लोग जुमे की नमाज को मस्जिद में न पढ़कर अपने-अपने घरों में पढ़ेंगे, जिससे सैंकड़ों लोगों के एक जगह एकत्रित होने से बचा जा सकेगा। लेकिन अफ़सोस कि इस संदर्भ में की गईं तमाम अपीलों के बावजूद भी गोरखपुर में जुमे की नमाज के लिए आज कई जगह सैंकड़ों की भीड़ देखी गई।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार (मार्च 19, 2020) शाम राष्ट्र के नाम अपने संदेश में कहा था कि कोरोना के खिलाफ ‘संकल्प और संयम’ से ही यह लड़ाई जीती जा सकती है और उसके लिए हमें अपना मूवमेंट कम से कम करने की जरूरत है। पीएम मोदी ने सलाह देते हुए कहा था कि भीड़-भाड़ वाले इलाकों से बचने की जरूरत है तथा जितना हो सके घर बैठ कर ही काम करने की जरूरत है। लेकिन कुछ लोग मात्र मजहबी आस्था में अंधे होकर कोरोना के कहर तक को नजरअंदाज करते हुए अपने साथ-साथ और लोगों की भी जिन्दगी को जोखिम में डाल रहे हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में प्रधानमंत्री की इस अपील का मजाक बनाते हुए देखा गया। दरअसल, कोरोना को देखते हुए उम्मीद थी कि आज मुस्लिम समुदाय के लोग जुमे की नमाज को मस्जिद में न पढ़कर अपने-अपने घरों में पढ़ेंगे, जिससे सैंकड़ों लोगों के एक जगह एकत्रित होने से बचा जा सकेगा। लेकिन अफ़सोस कि इस संदर्भ में की गईं तमाम अपीलों के बावजूद भी गोरखपुर में जुमे की नमाज के लिए आज कई जगह सैंकड़ों की भीड़ देखी गई। आम दिनों की तरह ही घंटाघर और कलेक्ट्रेट में दोपहर से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। 

देश के नाम अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने अगले एक हफ्ते तक सामाजिक मेल-जोल कम करने, भीड़ वाले इलाक़ों से बचकर रहने और 22 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू’ का पालन करने की अपील की थी। बृहस्पतिवार को गोरखपुर के जिलाधिकारी के विजयेंद्र पांडियन ने भी शहर के लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की और भीड़ भाड़ वाली जगहों से दूर रहने की अपील की थी।

शाहीन बाग़ में भी जारी है मनमानी

ऐसी ही जिद पिछले कई दिनों से लगातार शाहीन बाग में देखने में आ रही है, जहाँ से लोग हटने का नाम नहीं ले रहे हैं। शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारी अब मानवता के लिए ख़तरा बन कर उभर रहे हैं। जहाँ एक तरफ सरकार लोगों से अपील कर रही है कि भीड़ न जुटाएँ और किसी भी सामाजिक फंक्शन इत्यादि का हिस्सा न बनें, वहीं शाहीन बाग़ में सीएए के विरोध के नाम पर बैठी महिलाएँ वहाँ से हटने का नाम ही नहीं ले रही है। ऐसा ही कुछ दक्षिण कोरिया में हुआ था जहाँ एक चर्च की जिद के कारण 5000 से भी अधिक लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ गए थे। ठीक उसी तरह, दिल्ली का शाहीन बाग़ एक खतरनाक स्पॉट बन कर भर रहा है, जहाँ डॉक्टरों व विशेषज्ञों की हर सलाह को धता बताया जा रहा है।

गौरतलब है कि शाहीन बाग़ का धरना 95 दिनों से लगातार जारी है। अब महिलाएँ वहाँ भूमि पर बैठने की बजाए लकड़ी की चौकियों पर बैठी हुई हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि वो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के उस आदेश को मानेंगी, जिसमें 50 से ज्यादा लोगों के एक साथ एक जगह न जुटने की बात कही गई है।

वैसे ये पहली बार नहीं है कि शाहीन बाग़ में इस तरह की असंवेदनशीलता दिखाई जा रही है। इससे पहले एक नवजात शिशु की मौत हो गई थी। उसे उसकी अम्मी हमेशा भीषण ठण्ड में भी प्रदर्शन में लेकर जाती थी। मौत के बाद उसके वहाँ की कई महिलाओं ने कहा था कि अल्लाह की बच्ची है, अल्लाह ने बुला लिया। भाजपा नेता अमित मालवीय ने याद दिलाया कि 1918 फ़िलेडैल्फ़िया में एक परेड को रोके जाने को कहा गया लेकिन उनकी जिद के कारण स्पेनिश फ्लू फैला और स्पेन की 80% जनसंख्या संक्रमित हो गई। लाखों की मौत हो गई थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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