Tuesday, September 21, 2021
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‘दूसरे मजहब के साथ कर के देखो’: भगवान गणेश के हाथों में सेनेटरी नैपकिन्स थमाने वाले NGO के खिलाफ हिन्दू महिलाएँ

एक अन्य महिला ने पूछा कि किसी अन्य मजहब में ऐसा क्यों नहीं होता? साथ ही उन्होंने कहा कि ये बेवकूफी है, क्योंकि पब्लिसिटी के लिए हमारे देवी-देवताओं का इस तरह से इस्तेमाल करना गलत है।

मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित महू (डॉक्टर आंबेडकर नगर) शहर में गणेश चतुर्थी के मौके पर भगवान गणेश की प्रतिमा के हाथ में सेनेटरी नैपकिन थमा दिए गए। एक NGO ने ये करतूत की, जिसके बाद लोग नाराज़ हो गए और इस तरह हिन्दू त्योहारों व देवी-देवताओं के साथ छेड़छाड़ किए जाने पर आपत्ति जताई। NGO का कहना था कि उसने ‘मेन्सुरल हाइजीन’ को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया।

भगवान गणेश की प्रतिमा के दो हाथों में सेनेटरी नैपकिन्स थमाए हुए देखे जा सकते हैं। ‘अनिवार्य’ नामक NGO ने भगवान गणेश को एक ‘जिम्मेदार पति’ के रूप में प्रदर्शित करने के लिए ऐसा किया। ये संस्था लोगों के बीच ‘मेन्सुरल हाइजीन’ को लेकर जागरूकता फैलाने और सेनेटरी नैपकिन्स के वितरण का दावा करती है। भगवान गणेश की प्रतिमा के दोनों तरफ देवियों रिद्धि और सिद्धि को दिखाया गया था।

महू में भगवान गणेश की प्रतिमा के हाथों में थमा दी सेनेटरी नैपकिन्स

NGO के संस्थापक और युवा लेखक अंकित बागड़ी ने कहा कि ‘बाहुबली’ फिल्म सीरीज की सफलता के बाद बाप्पा को बाहुबली की वेशभूषा में दिखाया गया था, तभी उन्हें ये आईडिया आया कि क्यों न गणेश चतुर्थी के जरिए ‘मासिक धर्म’ को लेकर जागरूकता फैलाई जाए। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2020 से अब तक वो अपने खुद के बचाव हुए रुपयों से 20 लाख सेनेटरी पैड्स का वितरण कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि अब जब हम ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मना रहे हैं, क्योंकि न महिलाओं की स्वतंत्रता के लिए इस तरह के क्रियाकलाप किए जाएँ। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर भी उनकी पहल की प्रशंसा की गई है। हालाँकि, सच्चाई इसके उलट है। सोशल मीडिया पर कई ऐसे हिन्दू भी हैं जिन्हें इस तरह की चीजें पसंद नहीं आईं और उन्होंने ऐसे छेड़छाड़ किए जाने के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।

सुमित गुप्ता ने पूछा कि विज्ञापन करने के लिए ये किस तरह की हरकत है? वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा कि ये सही तरीका नहीं है। एक यूजर ने लिखा, “क्या हम भगवान को सिर्फ भगवान नहीं रहने दे सकते? तथाकथित जागरूकता फैलाने के लिए विज्ञापन ही काफी हैं। हम देवी-देवताओं को मास्क से लेकर ये सारी चीजें पहनना शुरू नहीं कर सकते।” जागृति खन्ना ने इसे बेवकूफी बताते हुए कहा कि जागरूकता फैलाने के और भी कई तरीके हैं।

एक अन्य महिला ने पूछा कि किसी अन्य मजहब में ऐसा क्यों नहीं होता? साथ ही उन्होंने कहा कि ये बेवकूफी है, क्योंकि पब्लिसिटी के लिए हमारे देवी-देवताओं का इस तरह से इस्तेमाल करना गलत है। वहीं अर्चि नाम की महिला ने कहा कि भगवान का सम्मान करना अलग चीज है और मेन्सुरल हाइजीन के प्रति जागरूकता अलग, दोनों को मिलाओ नहीं। लोगों ने कहा कि जागरूकता फैलाने के और भी कई तरीके हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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