Saturday, December 4, 2021
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बेंगलुरु दंगों के लिए जानबूझकर चुना था कृष्ण जन्माष्टमी का दिन, SDPI ने रची थी देश में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की साजिश: NIA

आरोप पत्र के अनुसार, SDPI अनुच्छेद-370 हटाने, सीएए व एनआरसी, अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और तत्काल तीन तलाक जैसे कुछ मुद्दों पर केंद्र सरकार के फैसलों से नाराज था।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने हाल ही में बेंगलुरु की विशेष अदालत में एक आरोप पत्र दाखिल किया है। इस आरोप पत्र में कहा गया कि बेंगलुरु में पिछले साल 12 अगस्त को हुई हिंसा, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) द्वारा रची गई देश में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की एक बड़ी साजिश थी।

11 अगस्त को 3000 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने कॉन्ग्रेस विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति, उनकी बहन और डीजे हल्ली व केजी हल्ली पुलिस थानों में आग लगा दी थी। भीड़ सोशल मीडिया पर विधायक के एक रिश्तेदार की तरफ से अपलोड की गई भड़काऊ पोस्ट को लेकर नाराज थी।

एक व्यक्ति ने इस मामले की जाँच एनआईए से कराने के लिए कर्नाटक उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसके बाद राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने इस मामले में जाँच शुरू कर दी। एनआईए के मुताबिक, एजेंसी ने मामले में 247 लोगों को आरोपित बनाया है। 

विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर गहरी साजिश को किया उजागर

एनआईए के आरोप पत्र के मुताबिक, अल्पसंख्यक समुदाय के चार हजार से ज्यादा लोगों द्वारा हिंसा का तात्कालिक कारण पुलकेशीनगर के विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन की कथित इंटरनेट मीडिया पोस्ट थी, लेकिन असल में एसडीपीआइ कैडर ने हिंदू देवताओं के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट और उन्हें टैग करके नवीन को उकसाया था। आरोप पत्र में कहा गया, “बेंगलुरु SDPI अनुच्छेद-370 हटाने, सीएए व एनआरसी, अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और तत्काल तीन तलाक जैसे कुछ मुद्दों पर केंद्र सरकार के फैसलों से नाराज था। वे देश में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और उसके जरिए देश में अशांति फैलाने की फिराक में थे।”

SDPI ने आपराधिक और हिंदू समुदाय को भड़काने की साजिश रची थी

प्रमुख अभियुक्त फिरोज पाशा के SDPI में शामिल होने के बाद मुहम्मद शरीफ, मुजम्मिल पाशा और एसडीपीआई बेंगलुरु के अन्य नेताओं ने एक आपराधिक साजिश रची। इसके तहत उन्होंने फिरोज पाशा के फेसबुक अकाउंट के जरिए हिंदू देवताओं का अपमान करने वाले कुछ संदेशों को पोस्ट करके हिंदू समुदाय को भड़काने का फैसला किया। उन्होंने जानबूझकर 11 अगस्त, 2020 की तारीख चुनी क्योंकि उस दिन हिंदुओं का पवित्र त्योहार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी थी।

फिरोज पाशा हिंसक हमले की योजना पर अमल के लिए पूरी तरह तैयार था: NIA

जाँच एजेंसी ने बताया कि एसडीपीआई का कैडर किसी भी स्थिति और हिंसक हमले की योजना पर अमल के लिए पूरी तरह तैयार था। इसी के तहत फिरोज पाशा ने 11 अगस्त की दोपहर को वीडियो और आडियो क्लिप पोस्ट की थी। इसके बाद फिरोज ने नवीन को पोस्ट में टैग कर लिया, जिस पर नवीन ने उसी आक्रामक अंदाज में पैगंबर के खिलाफ प्रतिक्रिया व्यक्त की। 

नवीन के जवाब को देखने के बाद फिरोज ने मुस्लिम समुदाय और संगठनों के नेताओं से नवीन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने और पुलिस व सरकार पर कार्रवाई का दबाव बनाने के लिए संपर्क किया। रात में फिरोज पाशा ने एसडीपीआई कैडर और अन्य को नवीन व मूर्ति के घरों के साथ-साथ केजी हल्ली व डीजी हल्ली पुलिस थानों पर हमला करने के लिए भेजा था।

वहीं, आरोप पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए, कर्नाटक के गृह मंत्री बासवराज बोम्मई ने कहा कि यह एसडीपीआई की एक साजिश थी और सोशल मीडिया ऐसे संगठनों के लिए एक आसान औजार बन गया है। बोम्मई ने संवाददाताओं से कहा, “ये (सोशल मीडिया के) आका भारत में ही नहीं, बल्कि बाहर भी हैं। मुझे भरोसा है कि न्याय होगा।”

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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