Thursday, September 23, 2021
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कहॉं है निर्भया का छठा गुनहगार? AAP सरकार ने दिए थे ₹10 हजार और सिलाई मशीन

फॉंसी पर लटकाए गए चार दरिंदों के अलावा पूरे देश को झकझोर देने वाले इस मामले में दो और भी गुनहगार थे। मुख्य आरोपित राम सिंह ने 11 मार्च 2013 को तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी। छठा गुनहगार नाबालिग था जो अब आजाद है।

16 दिसंबर 2012 की रात को निर्भया के साथ दरिंदगी करने वाले चार दोषियों को आज तड़के तिहाड़ जेल में फाँसी दे दी गई। दोषियों ने पैरामेडिकल की छात्रा निर्भया का न सिर्फ सामूहिक दुष्कर्म किया बल्कि उसके साथ बर्बरता की सारी हदें पार कर दी थी। फॉंसी पर लटकाए गए इन दरिंदों के अलावा पूरे देश को झकझोर देने वाले इस मामले में दो और भी गुनहगार थे। मुख्य आरोपित राम सिंह ने 11 मार्च 2013 को तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी।

वहीं, छठा बलात्कारी घटना के वक्त नाबालिग था, जिसे जुवेनाइल कोर्ट ने तीन साल की कैद की सजा सुनाई थी। दिसंबर 2015 में उसे बाल सुधार गृह से रिहा कर दिया गया था। चार दोषियों को फाँसी पर लटकाए जाने के बाद एक बार फिर इस छठे गुनहगार की चर्चा हो रही है। लोग पूछ रहे हैं कि अभी वह कहाँ है। बताया जाता है कि इसी छठे गुनहगार ने निर्भया और उनके दोस्‍त को आवाज देकर बस में बैठने के लिए बुलाया था। साथ ही इसी नाबालिग दोषी ने निर्भया से सबसे पहले छेड़छाड़ शुरू की थी और अपने साथियों को इस वारदात को अंजाम देने के लिए उकसाया था। इसी ने निर्भया के साथ सबसे अधिक बर्बरता की थी। इसी ने निर्भया के शरीर में लोहे की रॉड डाल दी थी, जिससे निर्भया की आँतें तक बाहर आ गई थी। जंग लगी लोहे की रॉड से निर्भया का टॉचर करने वालों में यही दोषी था। घटना के वक्‍त इस नाबालिग की उम्र 17 साल 6 महीने थी, यानी वह बालिग होने में मात्र 6 महीने ही छोटा था। 

जानकारी के मुताबिक वह मूल रूप से उत्‍तर प्रदेश का रहने वाला है। जब वह करीब 11 साल का था, तभी घर से भाग निकला और दिल्‍ली आ गया था। दिल्‍ली में आकर वह काम करने लगा और उसके बाद वह राम सिंह के सम्‍पर्क में आ गया। उसने कुछ समय तक राम सिंह के लिए काम किया था। उसके राम सिंह पर 8000 रुपए बकाया थे, जिसे लेने के लिए 16 दिसंबर को वह पहुँचा था और इस घिनौने वारदात का हिस्सा बना।

2015 में जब वह जेल से रिहा हुआ तो उसके बाद परिवार वालों से बात करने के बाद उसे दक्षिण भारत के किसी स्‍थान पर भेज दिया गया था और यहाँ तक कि उसका नाम तक बदल दिया गया था। अब वह अपने बदले हुए नाम और बदली हुई पहचान के बाद एक एनजीओ की निगरानी में दक्षिण भारत के किसी होटल में बावर्ची का काम करता है।

बता दें कि जब नाबालिग बलात्कारी को रिहा किया गया था तो लोगों के बीच काफी आक्रोश देखने को मिला था। रिहाई की खबर पाकर निर्भया के परिजनों समेत हजारों की संख्‍या में लोग इंडिया गेट पर प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए थे। बवाल बढ़ने पर पुलिस को इंडिया गेट पर धारा 144 लगानी पड़ी थी। वहीं निर्भया की माँ और पिता की आँखों से आँसू बह रहे थे। वह बार-बार ये ही कर रहे थे कि उनके साथ न्‍याय नहीं हुआ।

इस दौरान कहा गया कि छठा नाबालिग बलात्कारी कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) गलती से जेल से रिहा होने में सफल हो गया था। कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के इस केस को लेकर गैरजिम्मेदाराना रवैया दिखाया, जिसकी वजह से दरिंदे की रिहाई संभव हुई थी। कॉन्ग्रेस और AAP पर तब यह आरोप लगा था कि दिल्ली सरकार अगर दोषी की रिहाई न होने के लिए अगर थोड़ी भी गंभीर होती तो वह उस दोषी की रिहाई की तारीख के काफी पहले ही कानूनी प्रकिया का सहारा लेती।

दोषी की रिहाई के एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में अनुरोध करने वाली AAP सरकार के मुख्‍यमंत्री ने उसे रिहा होने पर 10 हजार रुपए और सिलाई मशीन देने का एलान किया था। तब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि केजरीवाल सरकार ने नाबालिग दोषी को 10000 रुपए और सिलाई मशीन देकर क्यों रिहा किया? क्या उन्हें निर्भया की माँ के आँसू नजर नहीं आए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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