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Ola-Uber-Rapido ड्राइवरों की हड़ताल, 7 फरवरी को नहीं मिलेगी कैब सर्विस: जानें यात्रियों के लिए कैसे भरोसेमंद विकल्प बनेगी Bharat Taxi

ओला, उबर और रैपिडो ड्राइवरों की 7 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल से यात्रा प्रभावित हो सकती है, वहीं सरकार समर्थित भारत टैक्सी ऐप यात्रियों के लिए नया सस्ता विकल्प बन रहा है।

भारत के शहरी परिवहन सेक्टर में इस समय एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ सरकार समर्थित भारत टैक्सी ऐप का लॉन्च हुआ है, तो दूसरी ओर ओला, उबर और रैपिडो से जुड़े ड्राइवरों ने शनिवार (7 फरवरी 2026) को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान कर दिया है।

यह स्थिति यात्रियों, ड्राइवरों और डिजिटल ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकती है। ड्राइवर अपनी आय और किराया नीति को लेकर नाराज हैं, जबकि सरकार ड्राइवर-फ्रेंडली मॉडल को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

भारत टैक्सी ऐप क्या है?

भारत टैक्सी भारत का पहला सहकारी (को-ऑपरेटिव) राइड-हेलिंग ऐप है, जिसे केंद्र सरकार के सहयोग से लॉन्च किया गया है और इसका उद्घाटन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया।

यह ऐप दिल्ली और गुजरात के कुछ शहरों में शुरू हो चुका है और आगे चलकर पूरे देश में विस्तार करने की योजना है। भारत टैक्सी का मुख्य उद्देश्य निजी कंपनियों जैसे ओला और उबर के मुकाबले एक भारतीय, पारदर्शी और ड्राइवर-केंद्रित विकल्प देना है, जिसमें ड्राइवरों से कोई कमीशन नहीं लिया जाएगा और उन्हें हर राइड की 100% कमाई मिलेगी।

इस प्लेटफॉर्म पर पीक ऑवर्स में सर्ज प्राइसिंग लागू नहीं होगी, जिससे यात्रियों को किफायती और स्थिर किराया मिलेगा। साथ ही, ड्राइवरों को एक्सीडेंटल और हेल्थ इंश्योरेंस, रिटायरमेंट सेविंग्स, सपोर्ट सिस्टम और शेयर सर्टिफिकेट जैसी सुविधाएँ दी जाएँगी, जिससे वे सिर्फ सेवा प्रदाता नहीं बल्कि इस प्लेटफॉर्म के हिस्सेदार भी बनेंगे।

ओला, उबर और रैपिडो ड्राइवर क्यों कर रहे हड़ताल

देशभर में ओला, उबर और रैपिडो से जुड़े कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी ड्राइवर शनिवार (7 फरवरी 2026) को  देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। इस विरोध को ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ नाम दिया गया है, जिसका नेतृत्व तेलंगाना गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) कर रही है और इसे कई राष्ट्रीय श्रमिक संगठनों का समर्थन मिला है।

इस हड़ताल के दौरान ड्राइवर लगभग 6 घंटे तक अपने ऐप्स से लॉग-ऑफ रहेंगे, खासकर सुबह और शाम के पीक टाइम में, जिससे यात्रियों को कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी बुक करने में भारी परेशानी हो सकती है।

ड्राइवरों की हड़ताल की मुख्य वजह कम होती कमाई, मनमाना किराया, बढ़ता खर्च और काम की असुरक्षित स्थिति है। यूनियन का आरोप है कि ओला, उबर, रैपिडो, पोर्टर और अन्य एग्रीगेटर कंपनियाँ मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश, 2025 के बावजूद किराया अपनी मर्जी से तय कर रही हैं और न्यूनतम बेस फेयर लागू नहीं कर रहीं। इससे ड्राइवरों की आय अस्थिर हो गई है और कई ड्राइवर आर्थिक संकट और गरीबी की ओर धकेले जा रहे हैं, जबकि प्लेटफॉर्म कंपनियाँ मुनाफा कमाना जारी रखे हुए हैं।

यूनियन का कहना है कि कंपनियों को दिए गए Clause 17.3 के तहत बेस फेयर को 50% तक घटाने की अनुमति ड्राइवरों के लिए बेहद नुकसानदेह है, इसलिए इस प्रावधान को हटाया जाना चाहिए।

ड्राइवरों का आरोप है कि किराया लगातार कम किया जा रहा है, जबकि ईंधन की कीमतें, वाहन मेंटेनेंस, लोन की EMI, बीमा और अन्य खर्च बढ़ते जा रहे हैं, जिससे मेहनत के बावजूद ड्राइवरों के हाथ में बहुत कम पैसा बचता है।

ड्राइवर सरकार से माँग कर रहे हैं कि ऐप-आधारित टैक्सी सेवाओं (जैसे ओला-उबर) के लिए न्यूनतम किराया तय किया जाए, ताकि उन्हें कम पैसे में काम न करना पड़े। वे चाहते हैं कि किराया नीति साफ, समझने में आसान और पारदर्शी हो और किराया तय करने से पहले ड्राइवर यूनियनों की राय ली जाए।

इसके अलावा, यूनियन की माँग है कि प्राइवेट गाड़ियों का कमर्शियल इस्तेमाल रोका जाए या फिर ऐसी गाड़ियों को कमर्शियल कैटेगरी में बदला जाए, ताकि मोटर व्हीकल एक्ट और एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 के नियमों का सही तरीके से पालन हो सके।

ड्राइवर चाहते हैं कि उन्हें बेहतर काम की सुविधाएँ, सामाजिक सुरक्षा, बीमा, पेंशन और स्थिर आमदनी मिले। उनका कहना है कि अभी गिग वर्कर्स (ऐप पर काम करने वाले ड्राइवर) को न तो तय सैलरी मिलती है और न ही स्थायी सुरक्षा, जिससे उनका भविष्य असुरक्षित रहता है।

इकोनॉमिक सर्वे 2025–26 के अनुसार, भारत में गिग वर्कर्स की संख्या बढ़कर 1.2 करोड़ हो गई है, लेकिन करीब 40% गिग वर्कर्स महीने में ₹15,000 से भी कम कमाते हैं। इससे साफ पता चलता है कि इस सेक्टर में आय की अस्थिरता एक बड़ी समस्या बनी हुई है।

भारत टैक्सी VS ओला-उबर

बिंदुभारत टैक्सीओला / उबर / रैपिडो एवं अन्य
मॉडल का प्रकारसरकार-समर्थित, साझेदारी पर आधारितनिजी और कॉरपोरेट
स्वामित्व (Ownership)सहकार टैक्सी को-ऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा संचालितनिजी/विदेशी कंपनियाँ
ड्राइवर की भूमिकाड्राइवर प्लेटफॉर्म के हिस्सेदार (शेयरहोल्डर)ड्राइवर केवल सेवा देने वाले
कमीशनजीरो-कमीशन20% से 35% तक कमीशन
किराया मॉडलफिक्स्ड किरायाडिमांड-आधारित, पीक टाइम में बढ़ता है
पीक टाइम सर्ज चार्जनहींहाँ
ड्राइवर की कमाईपूरी कमाई ड्राइवर कोकमीशन कटने के बाद
ड्राइवर सुविधाएँबीमा, हेल्थ कवर, रिटायरमेंट सेविंग्स, सपोर्ट सिस्टमसामाजिक सुरक्षा और लाभ सीमित
यात्रियों के लिए किरायासस्ता, स्थिर और पारदर्शीकई बार महँगा और अस्थिर
पारदर्शिताअधिकसीमित
सरकारी पहल से जुड़ावडिजिटल इंडिया, मिल-जुलकर काम करने का मॉडलनहीं
भविष्य की योजनाFASTag और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) से जुड़ावमुख्य रूप से ऐप-आधारित
मुख्य उद्देश्यड्राइवर-फ्रेंडली और न्यायपूर्ण व्यवस्थामुनाफा-केंद्रित

‘भारत टैक्सी’ को लेकर बढ़ा लोगों का विश्वास

देश में कैब सेवाओं को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ ओला, उबर और रैपिडो के ड्राइवर हड़ताल कर रहे हैं, जिससे लोगों को सफर करने में परेशानी हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ ‘भारत टैक्सी’ एक अच्छा और भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आई है।

भारत टैक्सी को इस तरह बनाया गया है कि यात्रियों को सस्ता, सुरक्षित और साफ-साफ किराया मिले। इसमें सर्ज प्राइसिंग नहीं होती, यानी ट्रैफिक या भीड़ के समय किराया अचानक नहीं बढ़ेगा। यात्रा बुक करने से पहले ही पूरा किराया दिख जाता है, जिससे लोगों को यह भरोसा रहता है कि बाद में कोई छुपा हुआ चार्ज नहीं लगेगा।

इस ऐप की सबसे खास बात यह है कि यहाँ ड्राइवर सिर्फ कर्मचारी नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म के हिस्सेदार होते हैं। ड्राइवरों को राइड का पूरा किराया मिलता है, जिससे उनकी कमाई बेहतर होती है। भारत टैक्सी एक सरकार समर्थित भारतीय प्लेटफॉर्म है, जो ओला और उबर जैसी कंपनियों की जगह एक मजबूत विकल्प बन सकती है।

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विवेकानंद मिश्र
विवेकानंद मिश्र
एक पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर। राजनीति, संस्कृति, समाज से जुड़ी अनसुनी कहानियाँ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध।

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