बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, NPCI का कहना है कि इससे रिस्पॉन्स टाइम (भुगतान में लगने वाला समय) बेहतर होगा और UPI ट्रांजैक्शन्स की परफॉर्मेंस सुधरेगी। अब आप एक दिन में किसी एक UPI एप से 50 से ज्यादा बार अपना बैंक बैलेंस चेक कर पाएँगे। वहीं ऑटो-पे (जैसे EMI, सब्सक्रिप्शन या बिल पेमेंट) अब किसी भी समय के बजाय तय समय स्लॉट्स में होंगे। वहीं अगर कोई पेमेंट अटक जाता है तो आप उसका स्टेटस सिर्फ 3 बार चेक कर सकते हैं।
जानिए कौन-कौन से फीचर्स में होगा बदलाव?
1. डेली बैलेंस चेक लिमिट: अब हर UPI ऐप पर यूजर एक दिन में केवल 50 बार ही अपना बैंक बैलेंस चेक कर सकेंगे। अगर आप अलग-अलग ऐप (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm) इस्तेमाल करते हैं, तो हर ऐप पर अलग-अलग यह लिमिट लागू होगी।
2. ट्रांजैक्शन स्टेटस चेक लिमिट: पेंडिंग ट्रांजैक्शन का स्टेटस आप सिर्फ 3 बार ही चेक कर सकते हैं और हर बार इसके बीच में 90 सेकंड का अंतर जरूरी होगा।
3. ऑटो-पे (AutoPay) टाइमिंग: ऑटो पे ट्रांजैक्शन्स में अब सिर्फ तीन विशेष समय स्लॉट में ही प्रोसेस होंगी- सुबह 10 बजे से पहले, दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे के बीच और रात 9:30 बजे के बाद
4. लिंक्ड बैंक अकाउंट व्यू लिमिट: इसके तहत आप अपने ऐप में बैंक अकाउंट की डिटेल्स एक दिन में केवल 25 बार ही देख पाएँगे।
5. पेमेंट रिवर्सल लिमिट: अगर कोई ट्रांजैक्शन गलत हो गया हो, तो आप 30 दिनों में अधिकतम 10 बार रिवर्सल की रिक्वेस्ट कर सकते हैं। वहीं एक सेंडर की ओर से अधिकतम 5 रिक्वेस्ट ही मान्य होंगी।
6. बेनीफिशियरी नाम डिस्प्ले: अब पेमेंट करने से पहले रिसीवर का बैंक में रजिस्टर्ड नाम दिखेगा, जिससे गलती और फ्रॉड की संभावना कम होगी।
7. बैंक और UPI ऐप्स पर सख्त निगरानी: NPCI अब बैंकों और UPI ऐप्स की API यूजेज को मॉनिटर करेगा। अगर कोई ऐप या बैंक नियमों का पालन नहीं करता, तो उस पर जुर्माना लग सकता है या उसकी UPI एक्सेस सीमित भी की जा सकती है।
यूजर्स के लिए ऐप में खुद ही लागू होंगे सभी बदलाव
आम यूजर्स को इन बदलावों के लिए कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं होगी। आपका हर दिन का पेमेंट, बिल पेमेंट या मनी ट्रांसफर सब उसी तरह से चलता रहेगा, जैसे नियम बदलने से पहले चलता था। वहीं ये सभी बदलाव आपके UPI एप्स में अपने आप लागू हो जाएँगे।
NPCI का कहना है कि पिछले महीनों में UPI सर्वर पर बोझ बढ़ा था, जिससे कई बार ट्रांजैक्शन फेल होने या स्लो होने की शिकायतें आईं थी। NPCI के मुताबिक, बार-बार बैलेंस चेक करने या ऑटोपे प्रोसेसिंग से सिस्टम पर दबाव पड़ता है। अब नए नियमों से सर्वर लोड कम होगा।
NPCI इस नई तकनीक पर काम कर रहा है ताकि बढ़ते साइबर क्राइम से बचा जा सके और पेमेंट प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाया जा सके। इसके अलावा इस योजना पर भी विचार चल रहा है कि UPI में पिन को वैकल्पिक करके फेस और फिंगर का भी इस्तेमाल किया जाए।
भविष्य में यह सुविधा करोड़ों UPI यूजर्स के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। यह फीचर कम पढ़े-लिखे लोगों और बुजुर्गों के लिए मददगार सिद्ध होगा। जानकारी के अनुसार, हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की तेज और उन्नत डिजिटल पेमेंट प्रणाली की तारीफ भी की है।
IMF ने कहा, “भारत अब दुनिया में सबसे तेज पेमेंट्स करने वाला देश बन गया है।” गौरतलब है कि UPI के आने के बाद से कैश का इस्तेमाल धीरे-धीरे कम हो रहा है और डेबिट/क्रेडिट कार्ड्स जैसे अन्य माध्यमों की तुलना में UPI ने बहुत तेजी से विस्तार किया है।
आज UPI हर महीने 18 अरब (18 billion) से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है और भारत में इलेक्ट्रॉनिक रिटेल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है।


