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डॉ जावेद के जहरीले इंजेक्शन से खाँसी के मरीज की मौत, मृतक को लौटने थे ₹1 लाख

"मेरे भाई को खाँसी थी। वो दवाई लेने के लिए डॉ जावेद के पास गया था। जावेद को उनके एक लाख रुपए लौटाने थे। उसने मेरे भाई को जहरीला इंजेक्शन लगाया जिसके बाद उसकी मौत हो गई।"

उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित टांडा इलाके के मंजारा गाँव में जावेद नाम के एक डॉक्टर ने खाँसी वाले मरीज की जान ले ली। परिजनों का आरोप है कि मरीज जब डॉक्टर जावेद के पास गया तो उसने उसको गलत इंजेक्शन दिया जिससे मरीज की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने कार्रवाई की माँग करते हुए थाने के बाहर जमकर प्रदर्शन किया।

मृतक के भाई अनिल कुमार ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “मेरे भाई को खाँसी थी। वो दवाई लेने के लिए डॉ जावेद के पास गया था। जावेद को उनके एक लाख रुपए लौटाने थे। उसने मेरे भाई को जहरीला इंजेक्शन लगाया जिसके बाद उसकी मौत हो गई। जब हम न्याय की माँग करने थाने पहुँचे तो थाना प्रभारी ने हमारे साथ मारपीट की।”

इस पूरे मामले को लेकर रामपुर जिलाधिकारी अंजनेय कुमार सिंह का कहना है कि उन्होंने शिकायत ले ली है और जाँच होने के बाद सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अपनी ओर से पूरे मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि यूपी के रामपुर से यह मामला सामने आने के बाद लोग इस पर हैरानी व्यक्त कर रहे हैं। लोगों का पूछना है कि आखिर कोई डॉक्टर अपने मरीज के साथ ऐसा कैसे कर सकता है। वहीं एक रविशंकर नाम के यूजर का लिखना है कि भारतीय पुलिस के पास हिंदुओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की पूरी आजादी है, लेकिन समुदाय विशेष के अपराध खिलाफ़ एफआईआर भी दर्ज नहीं कर सकते।

समाचार एजेंसी एएनआई के ट्वीट पर रामपुर पुलिस से जुड़े पुलिसकर्मी रोहित यादव का ट्वीट भी आया है। इस ट्वीट में उन्होंने बताया है कि इस घटना की बाबत पुलिस ने झोलाछाप को हिरासत में ले लिया है और आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने जानकारी दी है कि मृतक के पंचायत नामा की कार्रवाई की जा चुकी है तथा अन्य विधिक कार्रवाई की जा रही हैं।

रामपुर पुलिस ने भी अपने ट्विटर अकॉउंट से बताया है कि मृतक का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के जिला अस्पताल भिजवा दिया गया है। कानून व्यवस्था की स्थिति सामान्य है। अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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