Tuesday, August 9, 2022
Homeदेश-समाज1 किलोमीटर की दूरी 9 साल में... Google ने मिलाया असली माँ से: दूसरी...

1 किलोमीटर की दूरी 9 साल में… Google ने मिलाया असली माँ से: दूसरी क्लास की पूजा को किडनैप कर बना दिया था ईसाई एनी

पिछले 9 सालों में पूजा के पिता संतोष का निधन हो गया। पूजा की माँ पूनम अँधेरी स्टेशन के बाहर चने बेचने का काम करती हैं। पूजा के 2 भाई हैं। अपहरण वाले दिन पूजा का बड़ा भाई भी था लेकिन वो...

मुंबई में 9 साल पहले अपहरण की गई एक लड़की अपने असली परिजनों से 5 अगस्त 2022 (शुक्रवार) को मिलीं। इतने सालों तक असली माँ-बाप से अलग रही लड़की का नाम है पूजा गौड़। अब पूजा 16 साल की हो गई हैं। जब पूजा का अपहरण हुआ था, तब वो मात्र 7 साल की थीं।

इस कहानी की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि अपहरण कर ली गई पूजा अपने असली माँ-बाप और भाई-बहन से महज 1 किलोमीटर दूर झुग्गियों में रहती थी, मतलब अपने अपहरणकर्ताओं के साथ। इस केस में पुलिस ने आरोपित डिसूजा पति-पत्नी पर केस दर्ज कर के पति हैरी डिसूजा को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूजा का अपहरण करने के आरोपित हैरी डिसूजा और उसकी पत्नी सोनी अँधेरी के डीएन नगर पुलिस स्टेशन क्षेत्र की जूही गली में रहते थे। पूजा का अपहरण 22 जनवरी 2013 को तब हुआ, जब वो क्लास 2 में थी और अपने घर से 1 किलोमीटर दूर नगर निगम के स्कूल में सुबह 8:30 पर पढ़ने जा रही थी।

जिस दिन पूजा का अपहरण हुआ, उस समय उनके आगे उनका भाई रोहित भी चल रहा था, जो क्लास 4 में पढ़ता था। अब 19 साल के हो चुके रोहित के मुताबिक थोड़ी देर बाद जब उसने पीछे मुड़ कर देखा तो उसकी बहन पूजा उसे नहीं दिखी। रोहित ने आगे बताया:

“मैं स्कूल में अपनी बहन को खोजा पर वो वहाँ नहीं थी। आखिरकार मैं उसी दिन 9:30 पर अपने घर भाग आया और अपने परिवार वालों को इसकी जानकारी दी। मेरे पिता संतोष और चाचा विनोद ने पूजा को खोजा और जब वो नहीं मिली तब डीएन नगर थाने में उन्होंने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। रिपोर्ट के बाद भी हम लगातार पूजा को तलाशते रहे। पर वो नहीं मिली। मेरी माँ पूनम लगातार पूजा को याद कर के रोती रहीं।”

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस की खोजी लिस्ट में पूजा का नंबर 66 था। पूजा के मुताबिक, “डिसूजा अंकल ने घटना के दिन मुझ चॉकलेट और आइसक्रीम का लालच दिया था। घटना के बाद पति-पत्नी मुझे एक पहाड़ी पर मौजूद हाजी मलंग ले गए, जहाँ वो 2 दिन रहे। इस दौरान मुझे धमकियाँ दी जाती रहीं कि अगर मैंने किसी को अपने अपहरण की बात बताई तो मुझे पहाड़ी के नीचे फेंक दिया जाएगा।”

पूजा ने आगे बताया कि हाजी मलंग के बाद हैरी डिसूजा और उसकी पत्नी सोनी गोवा गए। यहाँ वो हैरी की मौसी के घर पर 3 से 4 महीने रहे। गोवा के बाद ये लोग फिर मुंबई आ गए और विरार में रहने लगे। इन लोगों ने इसके बाद पढ़ाई के लिए पूजा को कर्नाटक के रायचूर भेज दिया, वहाँ पूजा एक हॉस्टल में रहती थी।

पूजा के मुताबिक, “साल 2015 में वो मुझे लेकर मुंबई लौट आए। मुझे नया नाम ‘एनी’ दिया गया। शुरू में हैरी और सोनी ने मुझे अच्छे से रखा लेकिन बाद में जब सोनी का अपना बच्चा हो गया, तब वो मुझे परेशान करने लगी। मेरी पिटाई होती थी और जेल जैसे घर में बंद रखा जाता था। हैरी अंग्रजी बोलता था और उसने मुझे घर पर ही अंग्रेजी लिखना सिखाया। बाद में हैरी ने मुझे जुहू में एक बिजनेसमैन के घर पर काम करने और उसके छोटे बच्चों की देखभाल के लिए लगा दिया।”

कैसे मिली पूजा

मुंबई पुलिस ने पूजा को खोजने की तमाम कोशिशें कीं लेकिन वो नाकामयाब रहे। पूजा के वापस मिलने की सूत्रधार पुलिस नहीं बल्कि प्रमिला नाम की एक महिला बनीं, जो घरों में काम करती हैं। हुआ यूँ कि आरोपित हैरी ने पूजा को जिस व्यापारी के घर काम पर लगाया था, उसी घर में प्रमिला भी काम करती थीं। एक साथ काम करने के दौरान पूजा ने प्रमिला को बताया कि बचपन में उसका अपहरण हुआ था और उसका अपहरण करने वाले उसको परेशान करते हैं।

पूजा की दी गई जानकारी पर प्रमिला ने गूगल से जानकारी जुटाई। पुरानी खबरों, उसमें छपी फोटो के आधार पर पूजा ने खुद के बचपन वाले फोटो को पहचान लिया। 9 साल बाद वो अपने असली परिवार से मिल पाईं, जिसे उनसे छिन लिया गया था। बस एक अफसोस के साथ… असली पिता से भेंट नहीं हो पाई।

पिछले 9 सालों में पूजा के पिता संतोष का निधन हो गया। पूजा की माँ पूनम अँधेरी स्टेशन के बाहर चने बेचने का काम करती हैं। उनके 2 बेटे हैं। पहला 19 साल का रोहित और दूसरा 12 साल का राहुल। रोहित ने 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ कर प्राइवेट सेक्टर में काम शुरू कर दिया है।

आरोपित हैरी पर पुलिस ने अपहरण की धारा 363, अपहरण के प्रयास की धारा 365, अवैध तरीके से कैद करने की धारा 368, मानव तस्करी की धारा 370 और जबरन काम करवाने की धारा 374 के तहत FIR दर्ज की है। हैरी डिसूजा 10 अगस्त तक पुलिस की कस्टडी रिमांड पर है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

केजरीवाल ने दिए 9 साल में सिर्फ 857 ऑनलाइन जॉब्स, चुनावी राज्यों में लाखों नौकरियों के वादे: RTI से खुलासा

केजरीवाल के रोजगार को लेकर बड़े-बड़े वादों और विज्ञापनों की पोल दिल्ली में नौकरियों पर डाले गए एक RTI ने खोल दी है।

जब सिंध में हिन्दुओं-सिखों का हो रहा था कत्लेआम, 10000 स्वयंसेवकों के साथ पहुँचे थे ‘गुरुजी’: भारत-Pak विभाजन के समय कहाँ थे कॉन्ग्रेस नेता?

विभाजन के दौरान पाकिस्तान में हिन्दुओं-सिखों की मदद के लिए न आई कोई राजनीतिक पार्टियाँ और ना ही आए वह नेता, जो उस समय इतिहास में खुद को दर्ज कराना चाहते थे।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
212,538FollowersFollow
416,000SubscribersSubscribe