Monday, April 22, 2024
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माँ को कोरोना हो गया, माँ मर गईं… बेटे ने डर से अंतिम संस्कार भी नहीं किया: दुखद है लेकिन भारत की घटना है!

लोगों में इस वायरस का डर इस कदर है कि वो अपने परिवार के किसी संक्रमित का शव लेने से भी मना कर दे रहे हैं। अब इसे कोरोना का डर कहें या कलियुग का प्रभाव, जिस माँ ने जन्म दिया, उनकी लाश को लेने से बेटे ने इनकार कर दिया।

देश में हर दिन कोरोना वायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। लोगों में इस वायरस का डर इस कदर है कि वो अपने परिवार के किसी संक्रमित का शव लेने से भी मना कर दे रहे हैं। अब इसे कोरोना का डर कहें या कलियुग का प्रभाव, जिस माँ ने जन्म दिया, उनकी लाश को लेने से बेटे ने इनकार कर दिया। 

पंजाब के लुधियाना में रविवार को कोरोना की वजह से हुई बुजुर्ग महिला की मौत के बाद उसके परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया, इसके बाद प्रशासन ने खुद ही महिला का अंतिम संस्कार करवाया। साथ ही अब अंतिम अरदास भी खुद ही करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि महिला के परिवार ने 100 मीटर से भी ज्यादा दूर से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया देखी। उन्होंने कहा कि मृतक के बेटे सहित परिवार के सदस्यों का शव लेने से इनकार करना काफी आश्चर्यजनक था।

यह बात एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (एडीसी) जनरल इकबाल सिंह संधू ने एक वीडियो के जरिए लोगों से मार्मिक अपील करते हुए कही है। उन्होंने कहा कि वह इस कोरोना बीमारी की वजह से रिश्तों को ताक पर न रखें। जारी की गई वीडियो में एडीसी संधू ने कहा कि महिला के परिवार की तरफ से शव लेने से इंकार करने के बाद सारी औपचारिकताएँ ड्यूटी मजिस्ट्रेट (तहसीलदार) जगसीर सिंह ने पूरी की और शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुँचाया। परिजन अंतिम संस्कार को दूर अपनी कार में ही बैठकर देखते रहे। वे कार में से भी नहीं उतरे।

एडीसी ने दावा कि हमने उन मेंबर्स को कोरोना से बचाव के लिए मँगवाई गई विशेष ड्रेस के साथ 12 फीट दूर से ही शव अग्नि देने के लिए कहा, पर उन्होंने कार से बाहर आने से ही इनकार कर दिया। ये हमारे लिए बहुत दुख की बात थी। माँ का अंतिम संस्कार करना बेटे का अति महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में श्मशान घाट के सेवादार ने 12 फीट लंबे बाँस के साथ ही शव का अंतिम संस्कार किया। एडीसी ने बताया की दिवंगत की आत्मिक शांति के लिए एसडीएम पश्चिम अमरिंदर सिंह मल्ली, जिला लोक संपर्क अधिकारी प्रभदीप सिंह नत्थोवाल और वह खुद अपनी जेब से रकम खर्च करके गुरुद्वारा शहीद बाबा दीप सिंह में अखंड पाठ रखवाने जा रहे हैं। इसका भोग शनिवार को डाला जाएगा।

बता दें कि 69 साल की महिला कुछ दिन पहले ही कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाई गई थी, जिसके बाद उन्हें फॉर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार दोपहर 2:30 बजे उनकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने जब परिवार से लाश लेने को कहा, तो परिवार ने मना कर दिया। महिला हाल ही में अपनी भतीजी से मिलने मोहाली गई थीं, जहाँ उन्हें बुखार आया और हालत खराब होने पर उन्हें 31 मार्च को लुधियाना के फॉर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार को कार्डिएक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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