गुजरात की धरती हमेशा से उद्यमिता और व्यापारिक समझ के लिए जानी जाती रही है। जब वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वाइब्रेंट गुजरात’ की नींव रखी थी, तब शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि यह पहल एक दिन क्षेत्रीय स्तर तक पहुँचेगी और अरबों रुपये के निवेश को आकर्षित करेगी। जनवरी 2026 में राजकोट स्थित मारवाड़ी विश्वविद्यालय में आयोजित ‘वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस’ (VGRC) ने यह साबित कर दिया कि गुजरात का विकास इंजन अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहा बल्कि सौराष्ट्र और कच्छ के दूरदराज इलाकों तक फैल चुका है।
गौरतलब है कि वाइब्रेंट गुजरात समिट का 10वां संस्करण वर्ष 2024 में आयोजित हुआ था, जिसमें 41,299 परियोजनाओं के लिए कुल 26.33 लाख करोड़ रुपए के MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए गए थे। प्री-समिट और समिट को मिलाकर कुल 98,540 परियोजनाओं के लिए 45.2 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव आए थे, जिससे करीब 81 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना बनी थी।
इसके बाद वाइब्रेंट गुजरात समिट का 11वाँ संस्करण वर्ष 2026 में प्रस्तावित था लेकिन राज्य सरकार ने क्षेत्रीय क्षेत्रों पर विशेष फोकस के लिए इस समिट को क्षेत्रीय स्तर तक विस्तार देने का फैसला किया। इसी कड़ी में सौराष्ट्र-कच्छ के लिए VGRC का आयोजन पहले अक्टूबर 2025 में उत्तर गुजरात के मेहसाणा में और फिर 11-12 जनवरी 2026 को राजकोट में किया गया। अब राज्य स्तरीय वाइब्रेंट गुजरात समिट वर्ष 2027 में आयोजित किया जाएगा।
अक्टूबर 2025 में आयोजित पहले VGRC में 1,212 MoU पर हस्ताक्षर हुए थे और इसमें 3.24 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। वहीं हाल ही में सौराष्ट्र-कच्छ में आयोजित VGRC में ब्लू इकॉनमी, ग्रीन स्टार्टअप्स, शिपबिल्डिंग, सिरेमिक उद्योग और पर्यटन जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान रखने वाले राजकोट को इस सम्मेलन के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का प्रयास किया गया। यह सम्मेलन राजकोट-मोरबी हाईवे पर स्थित मारवाड़ी विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया गया, जहाँ 55 एकड़ क्षेत्र में 6 प्रदर्शनी डोम और एक मुख्य इनोवेशन हॉल तैयार किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जनवरी को इस वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया।
VGRC के खत्म होने के बाद सामने आए आँकड़े
यह कच्छ-सौराष्ट्र के 12 जिलों को कवर करने वाला पहला कॉन्फ्रेंस था, जिसमें 24 देशों के रिप्रेजेंटेटिव, 4,000 से ज्यादा एंटरप्रेन्योर, 450 से ज्यादा एग्जिबिटर और 29,000 रजिस्ट्रेशन आए। इसके अलावा 2,200 से ज्यादा B2B/B2G मीटिंग हुईं। इसके बाद ₹5.78 लाख करोड़ के 5,492 MoU साइन हुए हैं। राज्य के डिप्टी चीफ मिनिस्टर हर्ष सांघवी ने इस बारे में जानकारी देते हुए एक पोस्ट शेयर किया है।
👉Auto, engineering and allied sectors
— Harsh Sanghavi (@sanghaviharsh) January 13, 2026
MoUs – 5
Amount- ₹381 crore pic.twitter.com/1PlrV5Rd2Y
सांघवी द्वारा साझा किए गए आँकड़ों के मुताबिक-
- ऑटो, इंजीनियरिंग और उससे जुड़े सेक्टर में 381 करोड़ रुपए के 5 MoU
- सिरेमिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 1,460 करोड़ रुपए के 5 MoU
- एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 1,650 करोड़ रुपए के 3 MoU
- स्किल डेवलपमेंट और MSME कैपेसिटी बिल्डिंग में 0.22 करोड़ रुपए के 4 MoU
- ब्लू बायोइकोनॉमी (बायोफ्यूल, फंक्शनल फूड और न्यूट्रास्यूटिकल्स) सेक्टर में 261 करोड़ रुपए के 13 MoU
- ग्रीन AI डेटा सेंटर और डीप टेक सेक्टर में 9 करोड़ रुपए के 2 MoU साइन किए गए हैं।
समापन समारोह में कैबिनेट मंत्री जीतू वाघाणी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2003 में आयोजित पहले वाइब्रेंट गुजरात के दौरान केवल 80 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे, जिनकी कुल निवेश राशि 66,000 करोड़ रुपए थी। इसके मुकाबले राजकोट में आयोजित इस क्षेत्रीय वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में 5,492 एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनकी कुल निवेश राशि 5.78 लाख करोड़ रुपए है।
उन्होंने कहा कि ये आँकड़े और कई देशों की भागीदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश-विदेश के निवेशकों के अटूट विश्वास को दर्शाती है। जीतू वाघाणी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलें जमीनी स्तर पर साकार हो रही हैं, जिसका सीधा लाभ गुजरात के उद्योगपतियों और औद्योगिक इकाइयों को मिलेगा।
सौराष्ट्र-कच्छ पर सरकार के फोकस के पीछे स्ट्रेटेजिक कारण
गुजरात सरकार जानबूझकर सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र को आगे बढ़ा रही है, क्योंकि इन इलाकों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। गुजरात की कुल समुद्री तटरेखा लगभग 1,600 किलोमीटर लंबी है जिसमें से 70% से अधिक हिस्सा सौराष्ट्र और कच्छ में आता है। यह तटरेखा दुबई, यूरोप और अफ्रीका जैसे वैश्विक बाजारों तक पहुँच का भारत का प्रमुख प्रवेश द्वार मानी जाती है। अहमदाबाद या सूरत की तुलना में सौराष्ट्र और विशेष रूप से कच्छ में बड़े पैमाने पर जमीन उपलब्ध है, जो सोलर पार्क या स्टील प्लांट जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स के लिए बेहद जरूरी है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि कच्छ-सौराष्ट्र के लोगों में उद्यमिता की मजबूत भावना है। सरकार अब इस उद्यमिता को ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर’ और ‘नीतिगत प्रोत्साहन’ के जरिए वैश्विक स्तर तक ले जा रही है। उन्होंने बताया कि मोरबी भारत के कुल सिरेमिक उत्पादन का 90% हिस्सा देता है और वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है। इसी कारण इस क्षेत्र को VGRC में एक विशेष जोन के रूप में प्रदर्शित किया गया, जहाँ आयोजित सेमिनार में 1,460 करोड़ रुपए के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
ये MoU एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, ऑटोमेशन, एनर्जी एफिशिएंसी और वेस्ट रीसाइक्लिंग के जरिए प्रोडक्शन कॉस्ट कम करेंगे, ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाएँगे और एक्सपोर्ट बढ़ाएँगे। इस सेक्टर में वर्तमान में 10,000 से 12,000 लोगों को रोजगार मिलता है, जिनमें करीब 60% महिलाएँ हैं, और इन नए निवेशों से इस रोजगार आधार को और मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, प्रस्तावित नया सिरेमिक पार्क वैल्यू-एडेड उत्पादों और आधुनिक विनिर्माण को बढ़ावा देगा।
इंजीनियरिंग उद्योग से लेकर ग्रीन एनर्जी तक
राजकोट का इंजीनियरिंग उद्योग अब ‘न्यू एज टेक्नोलॉजी’ से जुड़ रहा है। अब तक राजकोट पंप और ऑटो पार्ट्स के लिए जाना जाता था लेकिन सेमीकंडक्टर हब बनने के साथ यहाँ की छोटी इकाइयाँ हाई-टेक चिप मैन्युफैक्चरिंग की सप्लाई चेन का हिस्सा बनेंगी। इससे इंजीनियरिंग के छात्रों को विदेश जाने के बजाय राजकोट में ही लाखों रुपए के पैकेज मिलने का रास्ता खुलेगा।
इसके अलावा गुजरात का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 100 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करने का है तो ऐसे में इस सेक्टर में हुए MoUs से बड़ा लाभ होगा। ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर, विंड और ओशन एनर्जी से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, कार्बन उत्सर्जन घटेगा और खासकर ग्रामीण इलाकों में हजारों कुशल रोजगार पैदा होंगे। गाँवों में बिजली की स्थिरता बढ़ेगी और आय के नए स्रोत बनेंगे। ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में निवेश से भविष्य में कच्छ ‘एनर्जी कैपिटल’ के रूप में उभरेगा।
द्वारका, सोमनाथ और पोरबंदर के समुद्र तटों को ‘क्रूज टूरिज्म’ के लिए विकसित किया जा रहा है। इससे पर्यटन बढ़ेगा और स्थानीय हस्तशिल्प, परिवहन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके अलावा, कच्छ-सौराष्ट्र के बंदरगाह भारत के प्रमुख गेटवे हैं। निर्यात बढ़ने से परिवहन लागत घटेगी और वैश्विक व्यापार में भागीदारी बढ़ेगी। इससे ब्लू इकॉनमी और ग्रीन शिपिंग को बढ़ावा मिलेगा। मछली उद्योग में भी आधुनिक कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित होने से मछुआरों की आय बढ़ेगी।
5.78 लाख करोड़ रुपS के निवेश से लगभग 12 से 15 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे रोजगार के लिए होने वाला पलायन रुकेगा। उद्योगों के आने से नए हाईवे, रेलवे कनेक्टिविटी और स्मार्ट शहर विकसित होंगे। राजकोट का नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा इस विकास को और गति देगा। यह भी उल्लेखनीय है कि जब कोई बड़ा प्लांट स्थापित होता है, तो उसके आसपास एमएसएमई इकाइयाँ भी विकसित होती हैं। इससे राजकोट और जामनगर के छोटे उद्योगपतियों को बड़ा बाजार मिलेगा।
सरकार उद्योगों की जरूरतों के अनुसार नए स्किल विश्वविद्यालय और ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित कर रही है, जिससे युवा उद्योगों के लिए तैयार हो सकें। इस तरह गुजरात अब सिर्फ वाइब्रेंट ही नहीं बल्कि ‘रीजनली वाइब्रेंट’ भी बन रहा है।
(यह खबर गुजराती में प्रार्थना अमीन ने लिखी है जिसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ा जा सकता है)


