शाहीन बाग ने ली इंजीनियर की नौकरी, रास्ता खुलवाने को कैंडल मार्च निकालेंगी महिलाएँ

सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रशांत के अनुसार पहले वे 40-45 मिनट में ऑफिस पहुॅंच जाते थे। अब 3 घंटे से ज्यादा लग रहा था। बावजूद वे इसके टाइम पर नहीं पहुॅंच पाते थे और 37 दिन से हाफ डे की अटेंडेंस लग रही थी। सैलरी आधी हो गई और सफर का खर्च दोगुना।

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में शाहीन बाग में समुदाय विशेष की औरतों ने डेरा डाल रखा है। इसके कारण कालिंदी कुंज-नोएडा रोड बंद है। इसकी वजह से आसपास के लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रोड बंद होने से परेशान होकर एक इंजीनियर को नौकरी छोड़नी पड़ी है। अब रास्ता खुलवाने के लिए आसापास की मुहल्लों की महिलाएँ कैंडल मार्च निकालने की योजना बना रही हैं।

खबर के मुताबिक नॉलेज पार्क की एक आईटी कंपनी के सॉफ्टवेयर इंजीनियर का कहना है कि कालिंदी कुंज मार्ग बंद होने की वजह से उनके घर से ऑफिस तक का सफर काफी लंबा हो गया था। इस वजह से उन्हें आर्थिक और शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसको लेकर वो पिछले 37 दिन से परेशान थे और इस समस्या की वजह से आखिरकार नौकरी छोड़ने का फैसला लेना पड़ा।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रशांत ग्रेटर नोएडा में रहते हैं। ऑफिस जाने में उन्हें 40-45 मिनट लगता था। सब कुछ बड़े ही आराम से चल रहा था। लेकिन कालिंदी कुंज रोड बंद होने के बाद उनकी परेशानी बढ़ गई। प्रशांत को ऑफिस पहुँचने में 3 से साढ़े 3 घंटे लगने लगे। उन्होंने समय से ऑफिस पहुँचने की काफी कोशिश की, लेकिन जाम इतना ज्यादा होता था कि रोज लेट पहुँचते थे। 37 दिन से हाफ डे की अटेंडेंस लग रही थी। सैलरी आधी हो गई और सफर का खर्च दोगुना। 6-7 घंटे रोड पर बीतने लगा, उसके बाद 9 घंटे की नौकरी। इतनी मेहनत के बाद भी सैलरी आधी मिल रही थी। ऐसे में जॉब कर पाना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा था।

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प्रशांत का कहना है कि उन्होंने इस परेशानी के बारे में ऑफिस में भी बताया लेकिन उन्होंने उनकी परेशानी नहीं सुनी और हाफ डे अटेंडेंस लगने लगी। प्रशांत ने कुछ दिन तक इंतजार किया कि शायद लोगों की परेशानी समझते हुए रास्ता खोलने का फैसला ले लिया जाए। लेकिन, ऐसा नहीं होने पर सोमवार (जनवरी 20, 2020) को उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

नवभारत टाइम्स में छपी खबर

वहीं अब इस बंद के खिलाफ स्थानीय निवासी कैंडल मार्च निकालने की तैयारी में हैं। इसकी जिम्मेदारी महिलाओं को सौंपी गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नोएडा स्थित अपने स्कूल और कॉलेजों में उत्तरी-बाहरी दिल्ली के स्टूडेंट्स समय पर नहीं पहुँच पा रहे हैं। इसके अलावा नौकरीपेशा लोग भी बुरी तरह से प्रभावित हैं। रोड बंदी के कारण समय की बर्बादी हो रही है।

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