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‘जब ऑक्सफोर्ड बना था तब सुल्तान मकबरा बना रहे थे’: मुस्लिम शासकों पर IAS अधिकारी के कमेंट से लिबरल और इस्लामी सुलगे

माहिर अब्बास ने लिखा, "सुल्तानों और मुग़लों ने देश में तमाम मदरसे बनवाए थे, जिनसे उस वक्त के बेहद शिक्षित और बुद्धिजीवी लोग निकले थे।" लेकिन अब्बास यह लिखना भूल गया कि इन्हीं सुल्तानों ने दुनिया के सबसे बड़े और प्राचीन शैक्षणिक केंद्र 'नालंदा' को ध्वस्त कर दिए थे।

IAS अधिकारी सोमेश उपाध्याय ने शताब्दियों तक भारत पर राज करने वाले इस्लामी अक्रांताओं को लेकर ट्विटर पर टिप्पणी की। इससे भन्नाया लिबरल और इस्लामी गैंग उन पर टूट पड़ा।

उपाध्याय ने ट्वीट किया कि जब ऑक्सफोर्ड की स्थापना हुई थी तब हमारे सुल्तान मकबरा बनाने में लगे थे। लेकिन इस्लामी कट्टरपंथियों और लिबरल्स को यह सच हजम नहीं हुआ।

माहिर अब्बास ने लिखा, “सुल्तानों और मुग़लों ने देश में तमाम मदरसे बनवाए थे, जिनसे उस वक्त के बेहद शिक्षित और बुद्धिजीवी लोग निकले थे।” लेकिन अब्बास यह लिखना भूल गया कि इन्हीं सुल्तानों ने दुनिया के सबसे बड़े और प्राचीन शैक्षणिक केंद्र ‘नालंदा’ को ध्वस्त कर दिए थे। आज की तारीख में उसी मदरसे से इस्लामी आतंकवादी निकलते हैं। 

टीए रिज़वी ने ट्वीट का कहा कि सुल्तानों ने ताजमहल, लाल किला और क़ुतुब मीनार भी बनवाए।  

एक इस्लामी कट्टरपंथी ने कॉन्ग्रेस को सुल्तान बता दिया। 

कुछ लिबरल्स ने यहाँ तक कह दिया कि इस आलोचना के बाद सोमेश उपाध्याय की पदोन्नति पक्की है। 

कुछ सोमेश उपाध्याय पर जातिगत टिपण्णी करने से भी बाज नहीं आए। 

एक व्यक्ति ने उनके ‘ब्राह्मण होने’ पर ही आलोचना शुरू कर दी। 

एक स्वघोषित इतिहासकार ट्विटर पर ही सोमेश को इतिहास का पाठ पढ़ाने लगीं। 

ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय की स्थापना भले उस वक्त न हुई हो जब भारत पर मुग़ल शासकों का राज था। लेकिन यह बात पूरी तरह सच है कि मुग़ल शासक भारत को लूटने में ज़रूर व्यस्त थे।  महमूद गज़नवी ने 1024 AD में पहली बार भारत पर हमला किया और सोमनाथ मंदिर को लूटा। इसके ठीक पाँच साल बाद ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। इसके बाद 1175 एडी में महमूद गोरी ने भारत पर हमला किया था। 

इसके बाद स्वघोषित इतिहासकार ने क़ुतुब परिसर में बने मदरसे का ज़िक्र किया। जबकि यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में इस बात का उल्लेख है कि 20 ब्राह्मण मंदिरों से निकले सामान की मदद से 2 मंदिर बनाए गए थे। हालांकि इसे कुछ इस तरह कहना ज्यादा बेहतर होगा ‘हिन्दू मंदिरों को तोड़ कर।’ 

ब्रिटिश पुस्तकालय के अनुसार दक्षिणी दिल्ली स्थित क़ुतुब परिसर की शुरुआत कुतुब-उद्दीन-एबक ने कराई थी। जिसे दिल्ली का पहला सुल्तान कहा जाता था। पहले यह राय पिथौड़ा मंदिर की जगह थी जिसे 27 हिन्दू और जैन मंदिर के अवशेषों से बनाया गया था। वहाँ की मस्जिद पर हिन्दू सभ्यता से जुड़ी कई तरह की नक्काशी और नमूने मिल जाते हैं। इससे यह बात साफ़ होती है कि उसका निर्माण मंदिर के अवशेषों से ही हुआ था और उसके ऊपर अरबी भाषा में क़ुरान से जुड़ी चीज़ें लिख दी गईं।

इतना कुछ होने के बाद सोमेश उपाध्याय ने एक बार फिर ट्वीट किया। तंज कसते हुए कहा वही लिबरल और बुद्धिजीवी जो खुद को अभिव्यक्ति की आज़ादी का पुरोधा कहते नहीं थकते, कितनी दमदारी से अपने अधिकार का सदुपयोग कर रहे हैं। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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