उन्नाव रेप मामला: AIIMS में लगी अदालत, कैमरे पर होगा पीड़िता का बयान

पीड़िता के साथ हुए सड़क हादसे की जाँच सीबीआई के हाथों में है, जिसे जस्टिस दीपक गुप्ता के नेतृत्व वाली बेंच से पिछले हफ्ते ही मामले की तफ्तीश पूरी करने के लिए दो हफ्ते की अतिरिक्त मोहलत मिली है।

उन्नाव गैंगरेप की पीड़िता का बयान लेने के लिए AIIMS में विशेष अदालत लगा कर कार्रवाई शुरू हो गई है। बुधवार (11 सितंबर, 2019) को लगी इस अदालत का मकसद एम्स में ज़िंदगी-मौत से जूझ रही पीड़िता का विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ बयान दर्ज करना है। इसके लिए AIIMS में विशेष अदालत लगाने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट से ली गई थी

नाबालिग के साथ बलात्कार, बाद में पिता की हत्या और गैंगरेप का आरोप

अपने साथ 2017 में बलात्कार और बाद में सामूहिक बलात्कार का आरोप पीड़िता ने विधायक कुलदीप सेंगर पर लगाया था। साथ ही आरोप लगाया था कि उसके पिता को पहले झूठे आर्म्स एक्ट मामले में हिरासत में ले लिया गया, और बाद में हिरासत में पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी गई। उपरोक्त मामलों में सीबीआई जाँच के बाद कुलदीप सेंगर पर दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 120B, गैंगरेप के अतिरिक्त पीड़िता के पिता को झूठे आर्म्स एक्ट मुकदमे में फँसाने को लेकर आरोप तय कर दिए थे

28 जुलाई को 19-वर्षीया पीड़िता, उसके वकील और अन्य रिश्तेदारों की कार उलटी दिशा से तेज़ गति में आ रहे ट्रक से भिड़ गई थी। इसमें उसकी दो महिला रिश्तेदारों की मौत हो गई, और उसके वकील की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। उसकी माँ ने कुछ ही दिन पहले अदालत में सेंगर और अन्य आरोपितों की शिनाख्त की है

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पीड़िता के साथ हुए सड़क हादसे की जाँच सीबीआई के हाथों में है, जिसे जस्टिस दीपक गुप्ता के नेतृत्व वाली बेंच से पिछले हफ्ते ही मामले की तफ्तीश पूरी करने के लिए दो हफ्ते की अतिरिक्त मोहलत मिली है। 19 अगस्त को एजेंसी को पहले भी दो हफ्ते का समय-सीमा विस्तार दिया गया था।

सेंगर को लाया गया, पब्लिक, प्रेस को अनुमति नहीं

कानूनी खबरों के पोर्टल LiveLaw.in के मुताबिक इस कार्रवाई में पब्लिक या प्रेस को आने की अनुमति नहीं है। सेंगर को सह-अभियुक्त शशि सिंह के साथ अस्थायी अदालत में पेश किया गया। इसके लिए दोनों को एम्स के जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में लाया गया, जहाँ पीड़िता 28 जुलाई से भर्ती है। इस अस्थायी कोर्ट के लिए दिल्ली हाई कोर्ट प्रशासन ने एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि विशेष जज धर्मेश शर्मा की अदालत पीड़िता का बयान रिकॉर्ड करेगी।

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