पुलिस ने पीड़ित बच्ची के अब्बू की शिकायत पर केस दर्ज किया। फिर मौलाना अब्दुल को जाकर गिरफ्तार किया। वह बच्ची को तालाब दिखाने के बहाने एकांत में ले गया था।
दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 4 मार्च को सेंगर समेत 7 लोगों को इस मामले में दोषी करार दिया था। सेंगर के साथ ही अन्य दोषियों को भी 10 साल की सजा सुनाई गई है। पीड़िता के पिता की मृत्यु 9 अप्रैल 2018 को पुलिस हिरासत में हो गई थी।
रेप पीड़िता के वकील ने बताया कि पीड़िता का घर पूरी तरह से टूट चुका है। उन्होंने कहा कि कुलदीप सेंगर ने अपने अपराध को छिपाने के लिए पीड़िता पर न सिर्फ़ केस वापस लेने का दबाव बनाया बल्कि एक विधायक के तौर पर डराया-धमकाया भी।
30 सितंबर को पीड़िता के घर पर मारपीट करने के मामले में उसने एसपी को प्रार्थना-पत्र दिया था। आरोपितों ने हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मामत ले रखी थी, इसलिए उनकी गिरफ़्तारी नहीं की गई। इस मामले में मुक़दमा दर्ज करने के साथ पुलिस विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केस को लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर किया गया था। 5 अगस्त से ही नियमित सुनवाई शुरू कर दी गई थी। सुनवाई बंद कमरे में हो रही थी। इस दौरान अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों और बचाव पक्ष के 9 गवाहों के बीच जिरह हुई।