Homeदेश-समाज900+ फ्लैट, 40 मंजिला ट्विन टावर सुपरटेक को ढहाना होगा... वो भी खुद के...

900+ फ्लैट, 40 मंजिला ट्विन टावर सुपरटेक को ढहाना होगा… वो भी खुद के पैसे से: SC का फैसला

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाते हुए कहा इन टावरों का निर्माण नोएडा प्राधिकरण और सुपरटेक के अधिकारियों के बीच मिलीभगत का परिणाम था।

सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्‍टेट कंपनी सुपरटेक को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने नोएडा स्थित एक हाउजिंग प्रॉजेक्‍ट (सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट) में कंपनी के दो- 40 मंजिला टावर को गिराने का आदेश दिया है। फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें इन बिल्डिंग्स को अवैध करार दिया गया था। इसके अलावा नोएडा अथॉरिटी को भी अदालत ने फटकार लगाई।

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार (अगस्त 31, 2021) को अपना फैसला सुनाते हुए कहा इन टावरों का निर्माण नोएडा प्राधिकरण और सुपरटेक के अधिकारियों के बीच मिलीभगत का परिणाम था। इससे पहले कोर्ट ने 3 अगस्‍त को पिछली सुनवाई में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। उस समय भी कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी को खूब फटकारा था।

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और एम आर शाह की पीठ ने मामले की सुनवाई में पाया कि अतिरिक्त टावरों का निर्माण जिसमें तकरीबन 1000 फ्लैट बनने थे, वह नियम और कानून के विरुद्ध है। फैसले में ये भी कहा गया है कि ये निर्माण सुपरटेक द्वारा अपनी लागत पर दो माह के भीतर तोड़ा जाना चाहिए।

बेंच ने रियल स्टेट कंपनी को उन सभी लोगों के पैसे लौटाने का निर्देश दिया जिन्होंने इस बिल्डिंग में घर के लिए पेमेंट की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक को इन ट्विन टावरों के सभी फ्लैट मालिकों को 12% ब्याज के साथ रकम वापस करने का आदेश दिया है।

इससे पहले इसी मामले में ऐसा ही फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुनाया था। साल 2014 में कोर्ट ने निर्देश दिया था कि कंपनी घर खरीददारों को सारा पैसा वापस दे जिन्होंने नोएडा के सेक्टर 93ए में एमरॉल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के लिए पहले से बुकिंग कराई है।

हाई कोर्ट के इसी फैसले के बाद कंपनी ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जिसके कारण आदेश पर स्टे लग गया, लेकिन घर खरीददारों का पैसा वापस करने का निर्देश बरकरार रहा। जब मामला सर्वोच्च न्यायालय में चल रहा था उस समय नोएडा अथॉरिटी ने कहा कि पूरा निर्माण स्वीकृत योजना के तहत हो रहा है, इसमें कोई अवैधता नहीं है। जबकि एम्रॉल्ड कोर्ट ओनर आरडब्लूए की ओर से कहा गया कि दो टावरों का बनना पूर्णत: यूपी अपार्टमेंट एक्ट का उल्लंघन हैं। इसके लिए प्लॉन चेंज करने से पहले कोई अप्रूवल भी नहीं लिया गया।

कोर्ट ने अपने जजमेंट में आरडब्लूए की इस याचिका पर संज्ञान लिया और नोएडा व बिल्डर के पक्ष को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अथॉरिटी को फटकारा और कहा कि उनकी और बिल्डर्स की मिलीभगत से ये अवैध निर्माण हुआ। मालूम हो कि सुपरटेक के दोनों टावरों में 950 से ज्‍यादा फ्लैट्स बनाए जाने थे। 32 फ्लोर का कंस्‍ट्रक्‍शन पूरा हो चुका था जब एमरॉल्‍ड कोर्ट हाउजिंग सोसायटी के लोगों की याचिका पर टावर ढहाने का आदेश आया। जानकारी के मुताबिक, 633 लोगों ने फ्लैट बुक कराए थे जिनमें से 248 रिफंड ले चुके हैं, 133 दूसरे प्रॉजेक्‍ट्स में शिफ्ट हो गए, लेकिन 252 ने अब भी निवेश कर रखा है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।

संभल की डेमोग्राफी: हिंदू 13 हजार से हुए 47 हजार, मुस्लिम 23 हजार से हो गए 1 लाख 71 हजार – मुस्लिम भीड़ की...

2011 की जनगणना के अनुसार संभल शहर की डेमोग्राफी 77.67% मुस्लिम आबादी जबकि हिंदू आबादी सिर्फ 22% वाली बताई गई है। वर्तमान में मुस्लिम 80% तक।
- विज्ञापन -