Homeदेश-समाज'लव जिहाद' के खिलाफ बने कानूनों पर रोक लगाने से SC का इनकार, तीस्ता...

‘लव जिहाद’ के खिलाफ बने कानूनों पर रोक लगाने से SC का इनकार, तीस्ता सीतलवाड़ जैसों ने लगाई थी कई याचिकाएँ

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि किसी भी शादी को लेकर ये साबित करना कि ये धर्मांतरण के लिए नहीं किया गया है - कपल्स पर ही इसका सारा दारोमदार थोप दिया गया है, जो आपत्तिजनक है। लेकिन, जब उन्होंने इन कानूनों के लागू होने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की माँग की, तो...

हाल ही में विभिन्न राज्य सरकारों ने ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून बनाया, ताकि महिलाओं की प्रताड़ना रोकी जा सके। उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और असम में ऐसे कानून बने, जबकि कर्नाटक, मध्य प्रदेश और हरियाणा में इसकी तैयारी चल रही है। ये सभी भाजपा शासित राज्य हैं। इन कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में धड़ल्ले से याचिकाएँ दाखिल की गई हैं, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इन कानूनों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

हालाँकि, इन याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई हेतु स्वीकार भी कर लिया है। इन याचिकाओं में ‘लव जिहाद’ के खिलाफ बने राज्य सरकारों के कानूनों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस बात का डर जताया है कि अन्य राज्यों में भी इसी तरह के कानून आ रहे हैं, जो ठीक नहीं है। इन कानूनों को धोखे से शादी और जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया गया है, ताकि महिलाएँ इसका शिकार न बनें।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि किसी भी शादी को लेकर ये साबित करना कि ये धर्मांतरण के लिए नहीं किया गया है – कपल्स पर ही इसका सारा दारोमदार थोप दिया गया है, जो आपत्तिजनक है। लेकिन, जब उन्होंने इन कानूनों के लागू होने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की माँग की, तो मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इसके लिए याचिएकाकर्ताओं को उन राज्यों के हाईकोर्ट्स में जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इन मुद्दों पर चर्चा कर के दलीलें सुनने के पक्ष में है, बजाए कि इसे अभी रोकने के। इस मामले में राज्य सरकारों का पक्ष जानने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (जनवरी 4, 2021) को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकारों को नोटिस भी जारी किया। इस पीठ में जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम और जस्टिस एएस बोपन्ना भी शामिल थे। विकास ठाकरे और तीस्ता सीतलवाड़ के NGO ने ये याचिकाएँ दायर की हैं।

इन याचिकाकर्ताओं ने अपने वकीलों के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि ‘लव जिहाद’ कानून की आड़ में पुलिस ने कई निर्दोष लोगों को उठा लिया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि इलाहबाद हाईकोर्ट में ऐसी याचिकाओं पर पहले से ही सुनवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि जब कई हाईकोर्ट्स में केस पेंडिंग हैं तो सुप्रीम कोर्ट को सुनना चाहिए। CJI ने कहा कि वो देखेंगे कि ये कानून ‘दमनकारी’ (आरोपों के हिसाब से) हैं या नहीं।

हाल ही में उत्तर प्रदेश में लव जिहाद पर बने कानून के खिलाफ 104 रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों ने सीएम योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखते हुए इसे नफरत की राजनीति का केंद्र बताया था। जिस पर योगी सरकार के मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि उन अधिकारियों को सेवा के दौरान गलत तरीके से हासिल की गई संपत्ति को खोने का डर सता रहा है। हालाँकि, इससे दोगुने से भी ज्यादा अधिकारियों ने पत्र लिख कर कानून का समर्थन भी किया।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -