Friday, September 17, 2021
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टैगोर इंटरनेशनल स्कूल ने हिंदू छात्राओं को हिजाब पहनाकर दिलवाया इस्लाम का संदेश, पहले भी रह चुका है विवादों में

एक और हिन्दू छात्रा दीक्षा पंडित स्क्रीन पर इस्लामी आस्था के पाँच स्तंभों के बारे में दर्शकों को सूचित करती है। उसने भी हिजाब पहना हुआ था। यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रक्रिया में हिंदू लड़कियों को शामिल करने की क्या जरूरत थी?

टैगोर इंटरनेशनल स्कूल एक बार फिर से विवादों में है। दरअसल इस बार इस स्कूल ने अपनी हिंदू छात्राओं से इस्लामिक त्योहार ईद पर लोगों का अभिवादन करते समय हिजाब पहनने के लिए कहा। इसका एक वीडियो स्कूल के YouTube चैनल पर अगस्त 04, 2020 को अपलोड किया गया जिसे कैप्शन दिया गया, “ईद-उल-अजहा के शुभ अवसर पर बधाई।”

वीडियो में, इशिता वर्मा नाम की एक छात्रा ने इस्लामिक त्योहार के बारे में जानकारी दी। जिसे सुनकर ऐसा लगता है कि उसने इसे पहले से याद किया हो। हालाँकि, वीडियो से यह पता नहीं चल पा रहा है कि इशिता वर्मा किस कक्षा की छात्रा है। वीडियो में इशिता बताती है कि किस तरह से इब्राहीम (इस्लामी ग्रंथों में इब्राहिम) अल्लाह की आज्ञा से अपने 13 साल के बेटे इस्माइल का बलिदान करने के लिए तैयार था मगर देवदूत गेब्रियल ने इसे रोक दिया।

YouTube screengrab

इसके तुरंत बाद, एक और हिंदू लड़की, दीक्षा पंडित स्क्रीन पर इस्लामी आस्था के पाँच स्तंभों के बारे में दर्शकों को सूचित करती है। उसने भी हिजाब पहना हुआ था। ईद मुबारक की कामना करने के लिए वीडियो में भाग लेने वालों में मुस्लिम छात्र भी थे। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रक्रिया में हिंदू लड़कियों को शामिल करने की क्या जरूरत थी।

यह सेक्युलरिज्म के उसी ब्रांड की तरह प्रतीत होता है जिसकी माँग होती है कि सांप्रदायिक सौहार्द और बेहतर पारस्परिक संबंधों की खातिर हिंदू घुटनों पर झुकें। इसके अलावा, हिंदू लड़कियों को हिजाब पहनाने का कोई औचित्य नहीं है, विशेष रूप से एक ऐसी उम्र में, जिसमें वे खुद के लिए खुल कर नहीं सोच सकती हैं।

वीडियो में जो दिखाया जा रहा है, उससे साफ पता चल रहा है कि ब्रेनवॉश किए गए बच्चों का इस्तेमाल करके दूसरे बच्चों के ब्रेनवॉश की भी कोशिश की जा रही है। टैगोर इंटरनेशनल स्कूल वही है, जो हाल ही में एक एलजीबीटी की पैरवी करने वाले समूह ‘नजरिया क्यूएफआरजी’ की एक एक्टिविटी के कारण विवादों में था। इस एक्टिविटी में बच्चों के लिए ऐसी कलरिंग बुक दी गईं थीं, जिनमें हस्तमैथुन करने वाली नग्न महिलाओं वाली कलर बुक शामिल थीं।

उन्होंने हादिया के मुद्दे पर भी बच्चों का ब्रेनवॉश किया। हादिया वही लड़की है जिसने अपने पति से शादी करने के लिए इस्लाम धर्म कबूला था। एएनआई इसकी जाँच कर रही है। कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पीएफआई ने इसके ऊपर अदालती मामलों में 1 करोड़ रुपए खर्च किए।

इस तरह से हादिया के लव जिहाद मामले के बारे में बच्चों का ब्रेनवॉश करने के बाद, अब यह हिंदू लड़कियों को हिजाब पहनकर वीडियो पर दिखा रहा है। यह एक अत्यंत घातक परम्परा है, जिसके विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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