Homeदेश-समाजदिल से सटाया पिस्तौल, फिर मार दी गोली: कश्मीर में आतंकियों ने की सब-इंस्पेक्टर...

दिल से सटाया पिस्तौल, फिर मार दी गोली: कश्मीर में आतंकियों ने की सब-इंस्पेक्टर की हत्या, खेत में जाते समय किया था अपहरण

जाँच के दौरान पुलिस ने मौके से 2 कारतूस बरामद किया है। मृतक दारोगा की उम्र लगभग 50 वर्ष थी। उनके परिवार में उनके पिता अब गनी मीर के अलावा पत्नी, 2 बेटियाँ और 1 बेटा शामिल है।

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों ने एक पुलिस सब इंस्पेक्टर की हत्या कर दी है। बलिदान हुए पुलिसकर्मी का नाम फारूक अहमद मीर है। उनका गोलियों से छलनी शव पम्पोर इलाके के एक खेत में मिला है। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। घटना शुक्रवार (17 जून 2022) की है।

18 जून को कश्मीर पुलिस के मुताबिक सब इंस्पेक्टर फारूक अहमद मीर मूल रूप से सम्बूरा के रहने वाले थे। जम्मू-कश्मीर पुलिस की IPR 23 बटालियन में तैनात थे। आरम्भिक जाँच में निकल कर सामने आया है कि वो शुक्रवार को अपने खेतों की तरफ गए थे जहाँ आतंकियों ने उनकी हत्या कर दी। हत्या के लिए पिस्टल का प्रयोग किया गया है।

सब इंस्पेक्टर फारूक की हत्या की खबर सुन कर उनके परिवार में कोहराम मच गया। बाद में उनके पर्थिव शव को राजकीय सम्मान के साथ तिरंगे के ताबूत में रख कर ले जाय गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जाँच के दौरान पुलिस ने मौके से 2 कारतूस बरामद किया है। मृतक दारोगा की उम्र लगभग 50 वर्ष थी। उनके परिवार में उनके पिता अब गनी मीर के अलावा पत्नी, 2 बेटियाँ और 1 बेटा शामिल है। हत्या के लिए उनके दिल के पास गोली मारी गई बताया जा रहा है। अंदाजा इस बात का भी लगाया जा रहा है कि अपने धान के खेतों की तरफ जा रहे फारूक का पहले अपहरण हुआ। बाद में किसी सुनसान स्थान पर ले जा कर उनकी हत्या की गई। आतंकी किस समूह या संगठन से जुड़े थे यह जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

चेहरे चमक गए, पर मुद्दे धुंधले पड़े: CJP की अंदरूनी लड़ाई ने आंदोलन की साख पर उठाए सवाल, छात्रों के टूटते भरोसे की कहानी

CJP के भीतर विवाद, नेताओं की सक्रियता और छात्रों की नाराजगी ने आंदोलन की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ दी है। समझें कैसे असली मुद्दे पीछे छूट गए?

CJP प्रोपेगेंडा आपकी टाइमलाइन तक कैसे पहुँच रहा? समझिए Meta का एल्गोरिदम और मॉडरेशन कैसे साध रहे ग्लोबल लेफ्ट का नैरेटिव

CJP के प्रदर्शन से जुड़े Videos और पोस्ट Meta का एल्गोरिदम कैसे लोगों के फीड तक पहुँचा रहा है, जिन्होंने फॉलो नहीं किया, वो भी इनको देख रहे।
- विज्ञापन -